ख़ुफ़िया कोड, ख़ास ज़बान वाला भूतिया रेडियो स्टेशन

रेडियो स्टेशन
    • Author, ज़ारिया गोरवेट
    • पदनाम, बीबीसी फ्यूचर

जासूसी करने के भी अजब-ग़ज़ब तरीक़े होते हैं. ख़ुफ़िया कोड, बनावटी बातें, ख़ास ज़बान, चेहरे पर चेहरा, हनीट्रैप वग़ैरह वग़ैरह...

कुल मिलाकर ख़ुफ़ियागिरी या जासूसी आम तौर पर लोगों की नज़रें बचाकर, छुप-छुपाकर की जाती है, ताकि दुश्मन की नज़र ना पड़े. कोई जान न जाए.

लेकिन आप ने कभी नहीं सुना होगा कि कोई देश रेडियो स्टेशन से जासूसी करता है और वो भी खुलेआम, पूरी दिलेरी से.

नहीं सुना, तो चलिए आपको एक ऐसे रेडियो स्टेशन का क़िस्सा सुनाते हैं. ये रेडियो स्टेशन रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर से कुछ दूर पर सुनसान इलाक़े में है. रेडियो स्टेशन से नियमित अंतराल पर कुछ प्रसारण होता है. इसके बाद जैसे किसी रेडियो स्टेशन से प्रसारण बंद हो जाता है, ठीक उसी तरह इस स्टेशन से भी भनभनाहट सुनाई देती रहती है.

इस रेडियो स्टेशन का ऐसा अजीबो-ग़रीब प्रसारण पिछले कई दशकों से जारी है. कुछ आवाज़ें और फिर वही भनभनाहट. दिलचस्प बात ये दुनिया भर में ये रेडियो स्टेशन सुना जाता है. पर किसी को नहीं मालूम कि ये रेडियो स्टेशन कौन चला रहा है. किसी भी रिकॉर्ड में ये रेडियो स्टेशन नहीं दर्ज है. रूस की सरकार इसकी मौजूदगी से अनजान बनती है.

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द बज़र, जिसे कोई डिकोड नहीं कर पाया

अब ऐसे रहस्यमयी स्टेशन का नाम भी अजीबो-ग़रीब होना तय है. तो, इस रेडियो स्टेशन का नाम है MDZhB. पश्चिमी देशों में इसे 'द बज़र' के नाम से जाना जाता है. पिछले क़रीब पैंतीस साल से ये रेडियो स्टेशन विचित्र आवाज़ें दुनिया को सुना रहा है. लेकिन कोई अब तक इसका मक़सद डिकोड नहीं कर पाया है.

इस रेडियो स्टेशन पर दुनिया की नज़र पड़ने की वजह एक अजीब सा रूटीन है. हफ़्ते में एक या दो बार कोई मर्द या औरत इस स्टेशन पर कुछ शब्द बोलते हैं, जैसे कि डिंगी या किसानी के विशेषज्ञ.

बस, इसके बाद रेडियो स्टेशन की फ्रीक्वेंसी पर वही भनभनाहट सुनाई देती है. ये रेडियो स्टेशन शॉर्ट वेव पर प्रसारित होता है. इसी वजह से ये दुनिया भर में सुना जाता है.

इस रेडियो स्टेशन के अजीब प्रसारण की वजह से ही इसे लेकर तमाम तरह के क़िस्से दुनिया भर में प्रचलित हो चले हैं. इसी तरह के दो और रेडियो स्टेशन हैं. ऐसे अजीब रेडियो सुनने के शौक़ीन लोग इन्हें 'द पिप' और 'स्क्वीकी व्हील' के नाम से बुलाते हैं.

ऑनलाइन दुनिया में इन तरह के रहस्यमयी रेडियो स्टेशनों के तमाम चाहने वाले हैं. वो नियमित रूप से इनका प्रसारण या इनकी भनभनाहट सुनते हैं.

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'रेडियो स्टेशन से रूस एलियन से करता है संपर्क'

लंदन की सिटी यूनिवर्सिटी के सिग्नल स्पेशलिस्ट डेविड स्टपल्स कहते हैं कि इन रेडियो स्टेशनों का मक़सद अब तक डिकोड नहीं हो सका. रेडियो स्टेशन की फ्रीक्वेंसी की बुनियाद पर पश्चिमी देश ये मानते हैं कि ये रूसी सेना से ताल्लुक़ रखता है.

इसका प्रसारण शीत युद्ध के आख़िरी दिनों में शुरू हुआ था. आज 'द बज़र' रेडियो स्टेशन का प्रसारण सेंट पीटर्सबर्ग और मॉस्को से होता है. सोवियत संघ के विघटन के बाद रेडियो के प्रसारण में कमी आने के उलट तेज़ी आ गई है.

रेडियो स्टेशन से सीधे-सादे कार्यक्रम या ख़बरें प्रसारित न होने की वजह से इनके बारे में तमाम अटकलें लगाई जाती हैं. कुछ लोग कहते हैं कि इनकी मदद से रूसी सेना अपनी पनडुब्बियों से संपर्क करती है.

वहीं कुछ लोग ये कहते हैं कि इनसे रूस एलियन से संपर्क करता है. वहीं कुछ लोग ये कहते हैं कि रूस पर एटमी हमला होने की सूरत में इस रेडियो स्टेशन का प्रसारण ख़ुद-ब-ख़ुद बंद हो जाएगा. इसका मतलब ये होगा कि रूस की तरफ़ से दुश्मन पर जवाबी हमला होगा. यानी रूस अपने दुश्मन को बिना कोई हरकत किए हुए तबाह कर देगा.

वैसे ये अटकल गलत सही भी हो सकती है. सोवियत संघ के ज़माने में ही एक ऐसा सिस्टम विकसित किया गया था, जिसमें कंप्यूटर के ज़रिए हवा में तरंगें सुनी जाती थीं.

ये तरंगें धरती से बाहर दुनिया की तलाश करती थीं. या फिर एटमी हमले की सूरत में देश को एलर्ट करने के काम आती थीं. पश्चिमी देशों के जानकार मानते हैं कि सोवियत संघ के ज़माने की ये तकनीक रूस आज भी इस्तेमाल कर रहा है. हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि एटमी जंग की सूरत में कोई नहीं बचेगा.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

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पलटवार का फरमान देने के लिए इस्तेमाल

तो क्या 'द बज़र' रूस पर परमाणु हमले की सूरत में अपनी एजेंसियों को पलटवार का फ़रमान देने के लिए चलाया जा रहा है ?

दुनिया भर में इंटरनेशनल रेडियो स्टेशन शॉर्टवेव पर चलाए जाते हैं. ये सिग्नल मीडियम वेव के मुक़ाबले ज़्यादा दूर तक जाते हैं और सुने जा सकते हैं. इनके मुक़ाबले टीवी, मोबाइल और लोकल रेडियो स्टेशन के सिग्नल छोटे से इलाक़े तक ही पहुंच पाते हैं.

मसलन बीबीसी रेडियो लंदन का प्रसारण स्थानीय लोग ही सुन पाते हैं. जबकि उसी इमारत से प्रसारित होने वाली बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की सेवा पूरी दुनिया में सुनी जा सकती है.

शॉर्टवेव सिग्नल की इन्हीं ख़ूबियों की वजह से इन्हें समंदर में चलने वाले जहाज़, हवाई जहाज़ और तमाम देशों की सेनाएं संदेश भेजने और सुनने के लिए इस्तेमाल करती हैं. क्योंकि ये नदी-नाले ही नहीं, ऊंचे पर्वत, गहरे समंदर और हज़ारों किलोमीटर की दूरी तय करके अपनी मंज़िल तक पहुंच जाती हैं.

डेविड स्टपल्स कहते हैं कि इन रेडियो तरंगों की मदद से हो सकता है कि रूस अपनी आसमानी सरहदों की निगरानी करता हो, ताकि कहीं और से आ रही मिसाइल का पता लगाकर उसे गिरने से पहले ही तबाह कर सके.

डिकोड

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'लिंकनशायर पोचर' रहस्यमयी स्टेशन

ऐसा ही रहस्यमयी रेडियो स्टेशन सत्तर के दशक से 2008 तक प्रसारित हुआ करता था. इसका नाम था 'लिंकनशायर पोचर'. ये रेडियो स्टेशन कहां से चलता था, किसी को नहीं पता.

कहा जाता है कि ये भूमध्य सागर स्थित साइप्रस से चलाया जाता था. इस रेडियो स्टेशन से भी अजीब सा प्रसारण होता था. इसमें एक अंग्रेज़ी का लोकगीत प्रसारित किया जाता था. ऐसा हर घंटे की शुरुआत में होता था. इस गीत को लगातार 12 बार प्रसारित करने के बाद, रेडियो स्टेशन पर एक महिला की आवाज़ सुनाई देती थी. ये महिला कुछ ऊटपटांग नंबर बोला करती थी.

ऐसे अजब-ग़जब रेडियो स्टेशन का राज़ समझने के लिए हमें बीसवीं सदी के शुरुआती दशकों में जाना होगा. उस वक़्त सोवियत संघ और ब्रिटेन के बीच कारोबार के लिए ऑल रशियन को-ऑपरेटिव सोसाइटी (आर्कोस) बनाई गई थी.

आर्कोस (Arcos) का मक़सद सोवियत संघ और ब्रिटेन के कारोबारी ताल्लुक़ बेहतर करना था. कम से कम ऊपरी तौर पर ये संस्था तो यही मक़सद बताती थी. लेकिन बाद में पता चला कि इसके ज़रिए सोवियत संघ ब्रिटेन की जासूसी करता था.

उससे भी दिलचस्प बात ये कि ब्रिटिश ख़ुफ़िया एजेंसी MI5 को इनकी करतूतों के बारे में पता था. असल में तो जब आर्कोस के ठिकाने पर 1927 में छापे पड़े, तो सोवियत संघ को पता चला कि उनकी जासूसी की हर बात से ब्रिटेन वाक़िफ़ था.

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जब आवाज़ों के ज़रिए की जाती थी जासूसी

सोवियत संघ ने हालात से निपटने के लिए कोडेड मैसेज भेजने का नया नुस्खा निकाला. कुछ शब्दों या आवाज़ों के ज़रिए जासूसी की जाने लगी. ब्रिटेन ने इसका भी पता लगा लिया बाद में ब्रिटिश और अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने रूस को इन ख़ुफ़िया संदेशों के मामले में भी मात दे दी.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पूर्वी जर्मनी में तैनात ब्रिटिश जासूसों को पता चला कि रूसी सेना, वहां अस्पतालों के टॉयलेट पेपर के ज़रिए ख़ुफ़िया संदेश भेजा करती है.

इसी के बाद रेडियो स्टेशन के ज़रिए कोडेड मैसेज भेजने का सिलसिला शुरू किया. सोवियत संघ और उसके साथी देशों ने इसकी शुरुआत की थी. बाद में अमरीका, ब्रिटेन और दूसरे कई देशों ने भी रेडियो स्टेशन के ज़रिए ख़ुफ़ियागीरी शुरू कर दी. 'लिंकनशायर पोचर', 'नैंसी एडम सूज़न', 'रशियन काउंटिंग मैन', और 'चेरी राइप' जैसे नामों वाले रेडियो स्टेशनों की एक दौर में स्थापना की गई थी.

रूस का 'द बज़र' रेडियो स्टेशन इसी सिलसिले की कड़ी माना जाता है.

2010 में अमरीकी जांच एजेंसी एफबीआई ने पूरे अमरीका में रूसी एजेंट गिरफ़्तार किए थे. एफबीआई का दावा था कि उसने अमरीका भर में फैले रूस के जासूसी के जाल को तहस-नहस कर दिया है. ऐसा माना जाता है कि अमरीका में इन रूसी एजेंटों को रेडियो की शॉर्टवेव 7887 किलोहर्ट्ज़ के ज़रिए मॉस्को से निर्देश मिला करते थे.

किम जोंग उन

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उत्तर कोरिया भी नहीं है पीछे!

पिछले साल अप्रैल में उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग से भी ऐसा ही अजीबो-ग़रीब प्रसारण होते सुना गया था. इसकी भाषा से साफ़ लगा कि उत्तर कोरिया अपने जासूसों को कोई निर्देश खुलेआम पहुंचा रहा है.

ऐसे रेडियो स्टेशन को भले ही सारी दुनिया सुन सकती है. मगर इससे प्रसारित होने वाले संदेशों को डिकोड करना बेहद मुश्किल होता है. जैसे मॉस्को से प्रसारित होने वाला 'द बज़र'. हफ़्ते में दो या तीन बार महिला अनाउंसर कुछ रूसी शब्द बोलती है. अब इन शब्दों में क्या संदेश छुपा है, ये बात तो रूसी एजेंट ही जानते हैं. हां, रेडियो के ज़रिए ये संदेश पूरी दुनिया के सामने ख़ुफ़िया तौर पर एजेंटों तक पहुंचा दिए जाते हैं.

'द बज़र' से कभी भी कोड नंबर प्रसारित नहीं होता.

जानकार मानते हैं कि रेडियो स्टेशन से आने वाली भनभनाहट मानो पूरी दुनिया को ये बताती है कि ये फ्रीक्वेंसी मेरी है. ख़बरदार! इसका कोई भी इस्तेमाल न करे.

हो सकता है कि इस रेडियो स्टेशन को किसी आफ़त की सूरत में इस्तेमाल के लिए ही चालू किया जाएगा. जैसे कभी रूस पर हमला हो जाए. तब हो सकता है कि रेडियो संदेश के ज़रिए पूरी दुनिया में फैले रूसी जासूसों को संदेश भेजा जाए. आख़िर रूस इतना बड़ा देश जो है. और इसका जासूसी का नेटवर्क भी बहुत बड़ा है. ऐसे में रेडियो प्रसारण के ज़रिए रूसी एजेंटो तक एक ही बार में पहुंचा जा सकता है.

2013 में इस रेडियो स्टेशन से एक संदेश प्रसारित हुआ था. इसमें कहा गया था, 'कमांड 135 जारी किया जाता है'.

शायद रूसी सरकार ने अपने एजेंटों को पूरी तरह एलर्ट रहने का संदेश जारी किया था. हो सकता है कि पश्चिमी देशों की ख़ुफ़िया एजेंसियों को इस रेडियो स्टेशन का असल राज़ पता भी हो.

मगर, अभी आम लोगों की नज़र में ये भूतिया रेडियो स्टेशन ही है.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)

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