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क्या पॉर्न नुक़सानदेह है? क्या सच है, क्या झूठ
- Author, जेसिका ब्राउन
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
दुनिया भर में लोग खाने-पहनने से लेकर भाषा के लिहाज़ से अलग होते हैं. लेकिन कुछ चीज़ें हैं जिन पर दुनिया का हर समाज एक मत होता है.
पॉर्न भी ऐसी ही चीज़ों में से एक है जिसके व्यापक इस्तेमाल के बावजूद इसे हर समाज की बुराई माना जाता है.
अमरीकी प्रांत यूटा में तो एक राजनेता ने पॉर्न को सामाजिक स्वास्थ्य के लिए ख़तरा भी करार दिया है.
ऐसे में आइए जानते हैं कि पॉर्न से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं?
1 - क्या पॉर्न से बढ़ते हैं यौन अपराध?
हिंसक यौन अपराध होने के बाद जब भी अपराधी के पॉर्न देखने की बात सामने आती है तो एक सवाल खड़ा होता है कि क्या पॉर्न में रेप और यौन अपराधों को बढ़ावा देने, सामान्य दिखाने और रेप करने के लिए प्रेरित करने की क्षमता है.
साल 1970 में कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर बर्ल कचिंस्की ने साठ के दशक के आखिरी और सत्तर के दशक के शुरुआती वर्षों में डेनमार्क, स्वीडन और जर्मनी में पॉर्न पर रोक हटने के बाद यौन अपराध पर अध्ययन किया.
प्रोफ़ेसर कचिंस्की को यौन अपराध और पॉर्न में किसी तरह का संबंध नहीं दिखा. यही नहीं, इस दौर में रेप और बाल यौन शोषण जैसे यौन अपराधों में कमी देखी गई.
2 - क्या पॉर्न देखने वाले महिलाओं को भोग की वस्तु मानते हैं?
साल 1995 में लोगों के बीच रेप एवं यौन हिंसा को लेकर सोच और पॉर्न के बीच संबंध जानने के लिए 4000 लोगों पर किए गए 24 अलग-अलग अध्ययनों का विश्लेषण किया गया है.
इन सभी अध्ययनों में रेप से जुड़े सोच के स्तर को जानने की कोशिश की गई. अध्ययन में शामिल लोगों से पूछा गया कि वह ऐसे कथनों से कितने सहमत हैं.
इनमें ये कथन भी शामिल था - "अगर एक महिला अपनी पहली डेट में पुरुष मित्र के घर या फ़्लैट जाती है तो इसका मतलब होता है कि वह सेक्स करने के लिए तैयार है."
अध्ययन में शामिल लोगों में से पॉर्न देखने वाले लोगों ने रेप से जुड़े ऐसे मिथकों से नियंत्रित समूह (ऐसे लोग जिन्हें अध्ययन के दौरान पॉर्न जैसी सामग्री नहीं दिखाई गई) के लोगों की अपेक्षा ज़्यादातर मिथकों से सहमति जताई.
पॉर्न का मतलब
हालांकि, ये सिर्फ़ प्रयोगात्मक अध्ययन में देखा गया. गैर-प्रयोगात्मक अध्ययन (इनमें लोग स्वयं ही जानकारी देते हैं) में कोई संबंध नहीं देखा गया.
ऐसे में इस विश्लेषण से जो जानकारी सामने आई वो कहीं ना कहीं अधूरी थी.
हाल के सालों में पॉर्न सामग्री के हिंसक होने की बात कही जा रही है.
पॉर्न से जुड़ी एक डॉक्युमेंट्री में एक अनुभवी पॉर्न स्टार ने कहा है कि 1990 में पॉर्न का मतलब सामान्य यौन संबंध होता था.
लेकिन साल 2010 में शोधकर्ताओं ने 300 पॉर्न वीडियोज़ का अध्ययन करके पता लगाया कि 88 फ़ीसदी वीडियोज़ में शारीरिक रूप से बल प्रयोग देखा गया.
पॉर्न और यौन हिंसा
बल प्रयोग करने वाले किरदारों में ज़्यादातर पुरुष महिलाओं पर अपनी शक्ति आज़माते दिख रहे हैं.
यही नहीं, आमतौर पर महिला पॉर्न स्टार्स ने बल प्रयोग की प्रतिक्रिया आनंद की अनुभूति या तटस्थ भाव से स्वीकार करना बताई थी.
ऐसे में ये हालिया शोध क्या कहता है? साल 2009 में हुई 80 से ज़्यादा अध्ययनों की समीक्षा बताती है कि पॉर्न के इस्तेमाल और हिंसा के बीच संबंध होने के सुबूत काफ़ी हल्के हैं.
इसके साथ ही इस संबंध को साबित करने के लिए किसी भी जांच में सामने आए निष्कर्षों को अक्सर मीडिया और राजनेताओं द्वारा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है.
इन अध्ययनों के समीक्षकों ने लिखा है, "अब वक़्त आ गया है कि अनुमान को ख़ारिज किया जाए कि पॉर्नोग्राफ़ी यौन हिंसा बढ़ाने में योगदान देती है."
पॉर्न सामग्री
कैलिफ़ॉर्निया यूनिवर्सिटी के समाज विज्ञानी नील मलेमथ ने पॉर्न और यौन हिंसा पर कई अध्ययन किए हैं.
मलेमथ ने 300 पुरुषों पर किए गए एक अध्ययन में पाया कि पहले से यौन आक्रामकता वाले पुरुष अगर बड़ी मात्रा में यौन आक्रामकता वाले पॉर्न वीडियोज़ देखें तो ऐसे पुरुषों के यौन रूप से आक्रामकता दिखाने की संभावना रहती है.
लेकिन मलेमथ ने साल 2013 में बीबीसी रेडियो 4 के प्रोग्राम में बात करते हुए कहा कि पॉर्न सामग्री देखना शराब पीने जैसा है जो ख़ुद में ख़तरनाक नहीं है, लेकिन जो लोग पहले से यौन रूप से आक्रामक हैं उनके लिए ख़तरनाक हो सकता है.
3 - क्या पॉर्न से सिकुड़ सकता है आपका दिमाग़?
साल 2014 में हुए अध्ययन के मुताबिक़ पॉर्न देखने से दिमाग में आनंद की अनुभूति पैदा करने वाला हिस्सा स्ट्रिएटम सिकुड़ सकता है.
ऐसा होने के बाद ऐसे लोगों को यौन रूप से सक्रिय होने के लिए दृश्यों की ज़रूरत होती है.
लेकिन, अध्ययनकर्ता इस नतीज़े पर नहीं पहुंच सके कि सिकुड़े हुए स्ट्रिएटम वाले लोग ज़्यादा पॉर्न देखते हैं या लगातार पॉर्न देखने से उनका स्ट्रिएटम सिकुड़ गया.
हालांकि, वे मानते हैं लगातार पॉर्न देखने से ऐसा संभव है.
इसके साथ ही इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन के लिए भी अक्सर पॉर्न को ही ज़िम्मेदार ठहराया जाता है. लेकिन अभी इसे साबित करने के लिए पर्याप्त शोध किए जाने बाकी हैं.
4 - क्या पॉर्न आपके संबंध ख़राब करता है?
अक्सर पॉर्न को संबंधों को ख़राब करने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता है. लेकिन पॉर्न के इस पहलू पर किए गए अध्ययनों में विरोधाभासी परिणाम सामने आए हैं.
साल 1989 में हुए डगलस केनरिक के अध्ययन में सामने आया था कि पॉर्न देखने वाले पुरुष की अपने पार्टनर्स में रुचि ख़त्म हो जाती है.
हालांकि, जब वेस्टर्न ओंटेरियो यूनिवर्सिटी की पीएचडी स्टूडेंट रोन्डा बल्ज़रीनी ने बीते साल नवंबर में समान आधार पर (दस गुना ज्यादा सहभागियों के साथ) अध्ययन किया तो विरोधाभासी परिणाम सामने आए.
बल्ज़रीनी ने महिला और पुरुष सहभागियों को न्यूड मैगज़ीन दिखाईं और कपड़ों के साथ वाली तस्वीरें दिखाईं. इसके बाद भी सहभागियों ने माना कि इससे उनके पार्टनर को देखने के अंदाज़ में परिवर्तन नहीं आया है.
हालांकि, बल्ज़रीनी मानती हैं कि दो अध्ययनों के परिणामों में अंतर की वजह दोनों अध्ययनों के समयकाल में लोगों के लिए पॉर्न की उपलब्धता और सामग्री में अंतर होना हो सकती है.
लेकिन साल 2014 में सामने आई रिसर्च में बताया गया है कि अमरीकी पुरुषों का पॉर्न देखना शुरू करना तलाक़ का संकेत है.
5 - क्या पॉर्न सेक्स लाइफ़ ख़राब कर सकती है?
पॉर्न पर लोगों की सेक्स लाइफ़ पर असर डालने का आरोप लगता रहा है.
लेकिन इस पहलू पर आई रिसर्च कहती है कि अगर पुरुष पॉर्न अकेले देखते हैं तो वे अपनी सेक्स लाइफ़ से कम संतुष्ट रहते हैं. वहीं, महिलाओं के मामले में इसका उल्टा है.
महिलाएं पॉर्न अपने पार्टनर के साथ देखना पसंद करती हैं. एक अध्ययन के मुताबिक़, ऐसा करने वाले दंपत्तियों की सेक्स लाइफ़ ज़्यादा संतुष्टि भरी होती है.
6 - क्या पॉर्न की लत लग सकती है?
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का एक अध्ययन बताता है कि पॉर्न देखने की आदत ड्रग्स जैसी होती है. दोनों चीज़ों के सेवन के बाद दिमाग़ एक समान तरह से प्रतिक्रिया देता है.
7 - क्या पॉर्न बिगाड़ता है महिलाओं के प्रति नज़रिया?
कैलिफ़ॉर्निया यूनिवर्सिटी में इस मुद्दे पर हुई रिसर्च बताती है कि पॉर्नोग्राफ़िक सामग्री लैंगिकवादी (सेक्सिस्ट) विचारों को बढ़ावा देती है.
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