You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
खाओ वही जो मन को भाए लेकिन ज़रा बचकर
- Author, वेरोनीक ग्रीनवुड
- पदनाम, बीबीसी फ्यूचर
आपने अपने बुज़ुर्गों को अक्सर ये कहते सुना होगा कि पहनो दूसरों की पसंद का लेकिन खाओ अपनी पसंद का. वहीं डॉक्टर कहते हैं कि आप वो खाएं जो आपके पेट और सेहत के लिए मुफ़ीद हो, जिसे आप आसानी से पचा सकें.
आज के दौर में लोग अपने खाने को लेकर कुछ ज़्यादा ही जागरूक हो गए हैं. कहीं मोटापा ना बढ़ जाए, कहीं कोलेस्ट्रॉल ना बढ़ जाए, इन सारी बातों का ख़्याल करते हुए हम कुछ चीज़ों से परहेज़ शुरू कर देते हैं.
कुछ चीज़ें जो अब तक नहीं खाते थे, उन्हें अपने खाने में शामिल कर लेते हैं. लेकिन कई बार हम अनजाने में अपने खाने में ऐसी चीज़ें शामिल कर लेते हैं, जो हमारी सेहत के लिए नुक़सानदेह हो सकती हैं. कई बार ऐसा करना जानलेवा भी साबित हो सकता है.
वैसे होना तो यही चाहिए कि जो फल-सब्ज़ी देसी हैं उन्हें ही खाएं. लेकिन जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था बदली है, लोग एक्ज़ोटिक फूड को लेकर तमाम तरह के तजुर्बे करने लगे हैं. हम बहुत से विदेशी फल और सब्ज़ियां भी खाने लगे हैं. लेकिन ये ज़रूरी नहीं कि वो सभी हमारी सेहत के लिए भी उतने ही फ़ायदेमंद होंगे.
जैसे कुछ सब्ज़ियों के डंठल फ़ायदेमंद होते हैं, जबकि उनकी पत्तियां ख़तरनाक होती हैं. जैसे रूबार्ब नाम की सब्ज़ी ब्रिटेन और अमरीका में ख़ूब उगाई और खाई जाती है. इसका डंठल सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होता है और ज़ायक़ेदार भी. लोग बड़े चाव से उसे खाते हैं. वहीं इसके पत्तों में इतना ज़हर होता है कि वो मौत की वजह भी बन सकता है.
पत्तों में छिपा ज़हर
अमरीका में आज से 1919 में एक वाक़या पेश आया था. हेलेना शहर में एक डॉक्टर ने अमरीकन मेडिकल एसोसिएशन को ख़त लिखकर एक घटना की जानकारी दी थी. इस डॉक्टर को एक गर्भवती महिला के बेहद बीमार होने की ख़बर मिली. डॉक्टर ने लिखा कि जब वो मरीज़ के पास पहुंचा तो उसका गर्भपात हो चुका था. ख़ून ज़्यादा निकलने की वजह से वो बेहोश हो गई थी. रात में उसकी मौत हो गई.
पता चला कि रात में उस महिला ने रूबार्ब की सब्ज़ी पकाई थी. खाने में उसने ज़्यादातर पत्तियां ही खाईं. पति ने साथ में ही खाना खाया था. मगर उसने डंठल खाए थे. बीमार वो भी पड़ा, लेकिन बाद में ठीक हो गया.
तमाम पड़ताल के बाद डॉक्टर इस नतीजे पर पहुंचे कि रूबार्ब के पत्तों में ऑक्सेलिक एसिड काफ़ी मात्रा में पाया जाता है जो सेहत के लिए घातक है. ये सीधे गुर्दों पर असर करता है. उस महिला ने डिनर में ढेर सारी पत्तियां खा ली थीं. उन्हीं से ज़हर शरीर में पहुंच गया और उसकी मौत हो गई.
जानकार बताते हैं कि इंग्लैंड में पहले विश्व युद्ध के दौरान लोगों को रूबार्ब के पत्ते खाने का सुझाव दिया गया था. लेकिन जब इसके पत्ते में ऑक्सेलिक एसिड की बात सामने आई तो इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई.
आलू जब हरा हो जाए
आलू सारी दुनिया में खूब चाव से खाया जाता है. इसकी एक बड़ी वजह ये है कि इसे किसी भी तरह से पकाया जा सकता है और कई दिन तक बिना किसी एहतियात के रखा भी जा सकता है. भारत में तो आलू सुखाकर पापड़ और चिप्स की शक्ल में साल-साल भर रख लिया जाता है.
लेकिन कई मर्तबा ये भी ख़तरनाक साबित हो सकता है. जब इसे सूरज की रोशनी में स्टोर किया जाता है, तो इसकी सतह में केमिकल रिएक्शन होते हैं, इसमें क्लोरोफिल बनता है और आलू को अंकुरित कर देता है. इसी दौरान एक और केमिकल भी बनता है, जिसे सोलेनिन कहा जाता है. ये भी सेहत के लिए ख़तरनाक होता है.
साल 1978 में दक्षिण लंदन में क़रीब 78 स्कूली बच्चे उबले हुए आलू खाने से बीमार हो गए थे. जांच में पता चला कि जो आलू उबाले गए थे, वो काफ़ी दिनों से खुले में रखे हुए थे. इससे उनमें सोलेनिन केमिकल की मात्रा बहुत बढ़ गई थी. सोलेनिन हरे रंग का होता है.
अक्सर लोग कहते हैं कि हरा आलू नहीं खाना चाहिए. वो शायद इसकी वजह न बता सकें. मगर असल में ये सोलेनिन ही होता है, जिससे लोग बचने की सलाह देते हैं. ये ज़हरीला होता है और हमारे नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है. इसलिए हरा आलू या हरे रंग के अंकुरण वाला आलू नहीं खाना चाहिए.
चस्क़े के चक्कर में
ऑस्ट्रेलियाई फल एल्डरबेरी की शराब लोग बड़े चाव से पीते हैं. लेकिन ये तभी तक ही सुरक्षित है, जब तक आप खुद उसे तैयार करते हैं. बाज़ार में बनी शराब की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती. अगर इसे पूरी तरह से पकाया नहीं जाता, तो ये भी नुक़सानदेह ही है.
साल 1983 में ऐसा ही एक केस देखने को मिला था. कुछ लोगों ने जंगली एल्डरबेरी को कुचल कर सेब के जूस के साथ मिलाकर उसे पी लिया. 15 मिनट बाद ही इन लोगों ने उल्टियां करनी शुरू कर दी थीं.
प्रकृति ने इंसान के खाने के लिए तरह तरह की चीजें पैदा की हैं. अब ये इंसान की समझ पर निर्भर करता है कि वो कितनी समझदारी से इन्हें संभाल कर रखता है और इनके पकाने में कितनी सावधानी बरतता ह
जिन चीज़ों का ज़िक्र हमने आपसे किया वो सभी सेहत के लिए अच्छी हैं, बस आपको उनका सेवन थोड़ी सावधानी से करना होगा. और हां, कोशिश कीजिए कि जो चीज़ें आपके आस-पास उगती हों, या पाई जाती हों वही इस्तेमाल करें.
मौसमी फल और सब्ज़ियां खाएं. जिनके बारे में एहतियात बरतने को कहा जाए, उन चीज़ों को खाने से परहेज़ करें. खान-पान के ये छोटे-मोटे नुस्खे आपकी सेहत के लिए बहुत कारगर होते हैं.
(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.)