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जानवरों को भी आशिक बनाता है 'लव हॉर्मोन'
- Author, जेसन राइली
- पदनाम, बीबीसी अर्थ
ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन स्तनधारी जीवों में होता है. ये हॉर्मोन ही हमें मोहब्बत या लगाव का एहसास कराता है.
दूसरों से मेल-जोल के लिए ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन की प्रेरित करता है. दो लोगों के बीच भरोसे की बुनियाद इसी की वजह से पड़ती है.
ऑक्सीटोसिन ही मां और बच्चे के बीच के मज़बूत रिश्ते को क़ायम करता है. इसीलिए ऑक्सीटोसिन को 'लव हॉर्मोन' कहा जाता है.
दूसरे जीवों में भी ऑक्सीटोसिन के दिलचस्प असर देखने को मिलते हैं.
1. कुत्तों में ख़ूब होता है ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन
जब कुत्ते किसी इंसान के क़रीब होते हैं तो इनके शरीर में ऑक्सीटोसिन का ख़ूब रिसाव होता है.
जैसे ही उनकी नज़र किसी इंसान से मिलती है, तो शरीर में ऑक्सीटोसिन निकलता है. इसी वजह से कुत्ते और इंसान के बीच मज़बूत रिश्ता बनता है.
रिसर्च से साबित हुआ है कि कुत्तों में बिल्लियों के मुक़ाबले पांच गुना ज़्यादा ऑक्सीटोसिन निकलता है.
2. बंदरों का वज़न बढ़ा देता है ऑक्सीटोसिन
मध्य और दक्षिणी अमरीका में पाये जाने वाले मार्मोसेट और टमारिन बंदरों का वज़न ऑक्सीटोसिन की वजह से बढ़ जाता है.
जब मादाएं गर्भवती होती हैं, तो नर वानर का वज़न उसकी हमदर्दी में बढ़ता जाता है. क्योंकि नर अपनी मादा साथी से नज़दीकी महसूस करता है.
ये ऑक्सीटोसिन का ही कमाल होता है. नर बंदरों के ऑक्सीटोसिन के अलावा ओएस्ट्रोजेन और प्रोलैक्टिन हॉर्मोन भी निकलते हैं.
इनका ताल्लुक़ स्तनपान से होता है. नतीजा ये होता है कि जब मादा बच्चे को जन्म देती है, तो ये नर उसको दूध पिलाते हैं.
3. मीयरकैट को परोपकारी बना देता है ऑक्सीटोसिन
कालाहारी के रेगिस्तान में पाया जाने वाला स्तनधारी जीव मीयरकैट ऑक्सीटोसिन के असर से दूसरों की भलाई की बात ज़्यादा सोचने लगता है.
मीयरकैट समूह में रहते हैं. वो मिलकर बिल खोदते हैं और ख़तरे का सामना करते हैं. वो एक-दूसरे के बच्चों का ख़याल रखते हैं. उनकी परवरिश में मदद करते हैं.
अफ्रीका में कुछ वैज्ञानिकों ने जब ऑक्सीटोसिन की ख़ुराक इन्हें ऊपर से दी, तो मीयरकैट दूसरों के बारे में ज़्यादा फ़िक्रमंद होते देखे गए.
वो बिलों की रखवाली पर ध्यान देने लगे. उनका ग़ुस्सा कम हो गया. बच्चों के साथ वो ज़्यादा वक़्त बिताने लगे.
अपने हिस्से का खाना भी ये मीयरकैट बच्चों को दे देते थे.
वो अपने बजाय दूसरे के खाने का इंतज़ाम करते ज़्यादा देखे गए.
4. कीड़ों पर भी होता है ऑक्सीटोसिन का असर
ब्रिटेन में पाए जाने वाले एक बीटल पर जब ऑक्सीटोसिन के असर का प्रयोग किया गया, तो चौंकाने वाले नतीजे दिखे. वो अपने बच्चों का ज़्यादा ख़याल रखते देखे गए.
जहां वो खाना छुपाते थे, वहां ये कीड़े अपनी गर्भवती मादा साथी को ले गए. ताकि जब बच्चे का जन्म हो तो उसे तुरंत खाना मिल जाए.
कीड़े के लार्वा भूखे होने पर अपने मां-बाप को पैरों से खुजलाते हैं. फिर मां-बाप उन्हें खाने को देते हैं.
5. बढ़ जाती है चूहों की रंगीन मिज़ाजी
अमरीका के मशहूर मैदानी इलाक़े प्रेयरी में पाए जाने वाले चूहे एकनिष्ठ होते हैं. वो एक ही साथी के साथ जीवन बिताते हैं. उससे पैदा हुए बच्चों का ख़याल रखते हैं.
वहीं, चरागाह में पाये जाने वाले चूहे आशिक़मिज़ाज होते हैं. वो कई मादाओं से ताल्लुक़ बनाते हैं. बच्चों का ज़रा भी ख़याल नहीं रखते.
उन्हें अपने साथी की भी परवाह नहीं होती. वैज्ञानिक इसे ऑक्सीटोसिन का असर बताते हैं.
6. चूहों को पुचकारने पर ब्लड प्रेशर घट जाता है
जब चूहों को बंद माहौल में पाला जाता है, तो उन्हें सहलाने पर उनका ब्लड प्रेशर कम हो जाता है. क्योंकि वो अपने मां-बाप की छुअन से दूर होते हैं.
इसे ऑक्सीटोसिन का असर कहा जाता है, जो ब्लड प्रेशर कम करने में मददगार होता है. यानी एक जादू की झप्पी वाक़ई असर करती है.
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.)
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