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शेर न तो राजा हैं, न वो जंगल में रहते हैं
- Author, आल्फी शॉ
- पदनाम, बीबीसी अर्थ
ग्रीक नायक हरक्यूलिस के हाथों मारे गए नीमियन शेर से लेकर शेर जैसे मुंह वाले मिस्र के युद्ध-देवता माहेस तक शेरों की पुरानी छवियों ने दुनिया भर में कई मिथकों को जन्म दिया है.
लगभग सभी संस्कृतियों की किंवदंतियों में शेरों का अहम स्थान है. हाल के वर्षों में भी शेरों ने कई मिथक बनाए हैं.
पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाने वाली शेरों की कहानियां और उनसे जुड़े मिथकों के पीछे की सच्चाई जानिए.
शेर राजा नहीं हैं
डिज़नी की क्लासिक फिल्म 'लायन किंग' भले ही आपको बहुत अच्छी लगती हो और इसकी कहानी को आप सच समझते हों, लेकिन राजा मुफसा या राजकुमार सिम्बा की तरह शेरों (या अफ्रीका के सभी जानवरों) का कोई इन-चार्ज या प्रभारी नहीं होता.
शेरों में राजा और रानी नहीं होते, बल्कि वे बराबरी के समाज में बिना किसी रैंकिंग के रहते हैं.
शेरों में प्रभुत्व का पदक्रम नहीं होता. मतलब वहां कोई राजा शेर नहीं है, कोई रानी शेरनी नहीं है. कोई युवराज नहीं है. कोई रैंक नहीं है.
शेरों के बारे में वास्तव में सबसे अच्छी बात यह है कि शेरों का समाज समतावादी समाज है, जिसमें सभी शेर बराबर हैं.
हो सकता है कि किसी नर शेर के पास सबसे सुंदर शेरनी हो और वह उस मादा की रक्षा करता हो, लेकिन वह शेर राजा शेर कतई नहीं है.
शेरों का समाज वास्तव में बहुत ही दिलचस्प समाज है. लेकिन इंसान यह समझ नहीं पाते कि शेर वास्तव में कितने सहयोगी होते हैं और उनमें कोई रैंकिंग सिस्टम नहीं होता.
बिना पेड़ों वाले जंगल के राजा
शेरों के लिए 'जंगल के राजा' की उपाधि बड़ी मशहूर है. हज़ारों कहानियों में ऐसा ही बताया गया है, लेकिन शेरों के लिए यह उपाधि सच नहीं है.
'जंगल के राजा' की उपाधि भ्रामक है, क्योंकि शेर असल में जंगल में नहीं रहते और जैसा कि हमने ऊपर पढ़ा है कि उनमें कोई राजा नहीं होता.
शेर झाड़ियों में, लंबी घास के विशाल मैदानों में, सवाना में और चट्टानी पहाड़ियों पर रहते हैं, लेकिन वे निश्चित रूप से बड़े पेड़ों वाले जंगल में नहीं रहते.
शेरों के मामले में यह ग़लती अनुवाद में ग़लती की वजह से हुई है.
अंग्रेजी का 'जंगल' (Jungle) शब्द हिंदी के 'जंगल' (Jangle) शब्द से लिया गया है. हिंदी में जंगल का अर्थ होता है- जंगल या ऊसर या बंजर भूमि.
ऊसर या बंजर भूमि की परिभाषा सवाना या घास के विशाल मैदानों पर आसानी से लागू हो सकती है.
शेरों के लिए 'जंगली जानवरों के राजा' की उपाधि यहां विवादित नहीं है. अगर आप इसे चुनौती देना चाहें तो किसी शेर से भिड़कर इसकी जांच कर सकते हैं.
अल्बि-नो
अफ्रीका में सफेद शेरों को पवित्र जानवर माना जाता है. एक आम गलतफ़हमी यह है कि वे अल्बि-नो (रंगहीन) हैं.
वैसे अल्बि-नो शेर भी होते हैं, लेकिन सफेद शेर इस ताक़तवर जानवर की एक अलग प्रजाति के हैं. वे अल्बि-नो नहीं हैं.
सफेद शेरों के विकास-क्रम में एक उल्टी दिशा में हुआ बदलाव देखा गया है. इसे ल्यूसिज़्म कहा जाता है. इसमें शेर के शरीर में मेलेनिन की मात्रा कम हो जाती है.
मेलेनिन एक पिगमेंट है जो शेर के बालों और उनकी आंखों के रंग को नियंत्रित करता है.
मेलेनिन की कमी होने पर शेरों में केसरिया रंग कम होने लगता है और वे सफेद दिखने लगते हैं.
असल में आंखों के रंग से सफेद शेरों और अल्बि-नो शेरों की पहचान होती है. सफेद शेरों की आंखें नीली होती हैं, जबकि अल्बि-नो शेरों की आंखें लाल या गुलाबी होती हैं.
अयाल होना सफलता की निशानी!
शेर की गर्दन पर लहराते बालों (अयाल) को आम तौर पर उनकी यौन अपील को मापने के तरीके के रूप में देखा जाता है.
नर शेर की गर्दन पर जितने ज्यादा और घने अयाल होते हैं, मादा शेरों को आकर्षित करने की उनकी क्षमता उतनी ही ज़्यादा मानी जाती है.
लेकिन नए मिले सबूतों से पता चला है कि ये नियम हर जगह लागू नहीं होते.
त्सावो (कीनिया) में अयाल रहित नर शेरों ने ना सिर्फ़ मादा शेरों को आकर्षित किया, बल्कि वे दूसरे नर शेरों से अपने इलाके की रक्षा करने में भी सफल रहे.
गर्दन पर लंबे अयाल होने का मतलब नर शेर होने की गारंटी भी नहीं है. शेरनियों में भी अयाल पाए गए हैं, खास तौर पर बोत्सवाना के ओकावांगो डेल्टा के शेरों में.
ये शेरनियां आम तौर पर नर शेरों से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होती हैं और उनके बच्चे न पैदा करने की संभावना अधिक रहती है.
खुद शिकार करना
शेरों के बारे में एक आम धारणा यह भी है कि सभी शिकार मादा शेरनियां ही करती हैं. लेकिन नये मिले सबूतों से लगता है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है.
शेरनी की प्राथमिक भूमिका शिकार करने की है, जबकि नर शेर अपने इलाके की हिफ़ाजत करते हैं. लेकिन नर शेर खुद शिकार करने में भी सक्षम होते हैं.
इतना ही नहीं, रिसर्च से ये भी संकेत मिलते हैं कि शिकार के मामले में सफलता की दर दोनों ही लिंगों में लगभग बराबर होती है.
शेर शिकार के लिए भी निकलते हैं और क़ामयाब भी रहते हैं.
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