सेक्स सेल से चलता है कुदरत का कारोबार

शुक्राणु

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क्या आपको पता है कि धरती पर ज़िंदगी की बुनियाद एक कोशिका या सेल पर टिकी है? ये तो पता ही होगा कि क़ुदरत के खेल भी निराले हैं?

आप भी सोच रहे होंगे कि आज हम क्या अजीबो-ग़रीब बातें कर रहे हैं. अजी हम कोई अजीबो-ग़रीब बात नही कर रहे. हमने जो तीन जुमले आपकी नज़र किए, असल में इन तीनों का आपस में गहरा ताल्लुक़ है.

चलिए बात को तरतीब से रखते हैं.

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हम ये बात तो बरसों से सुनते आए हैं कि क़ुदरत के खेल निराले हैं. अब देखिए न, वैज्ञानिक कहते हैं कि इस क़ायनात की बुनियाद एक कोशिका या सेल पर टिकी है. यानी छोटे से छोटा जीव हो या बड़े से बड़ा, सबकी शुरुआत एक कोशिका से होती है.

हम ये भी सुनते आए हैं कि ये कोशिकाएं इतनी छोटी होती हैं कि इन्हें नंगी आंखों से देखना मुमकिन है. मगर, अंडा जो आप देखते हैं. फिर वो चाहे मुर्गी का हो या किसी और जानवर का, वो एक कोशिका ही है.

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भरी-पूरी ज़िंदगी अपने में समाए हुए. उसी से आख़िर में एक जीव निकलता है. बशर्ते, उस अंडे को ठीक से सेया जाए और आप उसे न खाएं. ये अंडा असल में सेक्स सेल या कोशिका होता है, जिसमें आने वाली नस्ल का रंग-रूप ढल रहा होता है.

क़ुदरत का कारोबार सेक्स से चलता है. मतलब ये कि सेक्स सेल्स यानी वो कोशिकाएं, जिनके मेल से नई ज़िंदगी पैदा होती है.

आम तौर पर ज़्यादातर जीवों में नर और मादा सेक्स सेल अलग-अलग होती हैं. इन सेक्स सेल्स का काम आपसी मेल से नई पीढ़ी को जन्म देना होता है.

जहां मादा सेक्स सेल का काम होता है, नई ज़िंदगी को भरपूर खाना-पानी और सुरक्षा देना. वहीं नर सेक्स सेल का काम होता है, ज़्यादा से ज़्यादा तादाद में पैदावार करना.

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हिंदी में मादा सेक्स सेल आम तौर पर अंडाणु या अंडे के तौर पर जानी जाती हैं. वहीं नर सेक्स सेल को शुक्राणु कहते हैं.

क़ुदरत में जितने तरह के जीव होते हैं, उतने तरह की सेक्स सेल देखने को मिलती हैं.

आम तौर पर माना ये जाता है कि जानवर जितना बड़ा होता है, उसकी सेक्स कोशिकाएं उतनी ही बड़ी होंगी. मगर ऐसा होता नहीं. ख़ास तौर से नर सेक्स सेल या शुक्राणु के बारे में तो ये बात बिल्कुल लागू नहीं होती.

आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि दुनिया का सबसे बड़ा शुक्राणु मक्खी की एक नस्ल का होता है. जिसका वैज्ञानिक नाम ड्रॉसोफिला बाइफरका है.

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इसका शुक्राणु रस्सी की लटों की तरह आपस में ही गुंथा हुआ रहता है. जब इसे सीधा करके इसे नापा गया तो ड्रॉसोफिला का शुक्राणु 6 सेंटीमीटर का निकला. जबकि ख़ुद मक्खी की लंबाई इस शुक्राणु के बीसवें हिस्से के ही बराबर होती है.

दुनिया का सबसे छोटा शुक्राणु एक ततैये का होता है, जिसका वैज्ञानिक नाम कोटेसिया कांग्रेगाटा है.

ब्रिटेन की शेफील्ड यूनिवर्सिटी की रोंडा स्नूक ने सेक्स सेल्स के बारे में काफ़ी रिसर्च की है. स्नूक कहती हैं कि शुक्राणु और अंडाणु के आकार में इतने फ़र्क़ की कई वजहें होती हैं.

इसकी पहली और सबसे बड़ी वजह तो ये होती है कि मादा सेक्स सेल या अंडाणु, सबसे अच्छे शुक्राणु से ही मेल करना चाहते हैं.

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इसके लिए ज़रूरी है कि शुक्राणु सेहतमंद हों, ताक़तवर हों, फ़ुर्तीले हों. हर जीव का प्रजनन अंग अलग होता है.

शुक्राणुओं को कई बार लंबा सफ़र तय करना होता है. जैसे इंसान में, तो शुक्राणु छोटे और फ़ुर्तीले होना ज़रूरी है, तभी वो लंबा सफ़र करके अंडाणु तक पहुंच सकेंगे. लंबे सफ़र में कई बार शुक्राणुओं का ख़ात्मा हो सकता है. इसलिए उनका छोटे और फ़ुर्तीले होना क़ुदरती तौर पर कारगर होता है.

स्नूक इसकी तुलना खेल की पिच से करती हैं. वो कहती हैं कि पिच बड़ी हो तो ज़्यादा खिलाड़ियों की ज़रूरत होती है. फिर शुक्राणुओं को आपस में भी मुक़ाबला करना होता है.

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इसमें अपने प्रतिद्वंदी शुक्राणु को रोकने के लिए नर सेक्स सेल कई तरह के नुस्खे आज़माती हैं.

जैसे वो मेटिंग प्लग जैसी चीज़ का इस्तेमाल करते हैं, जिससे वो अंडाणु से जुड़ जाते हैं, तो दूसरा शुक्राणु फिर जुड़ नहीं पाता. कई बार शुक्राणु, ज़हरीला केमिकल छोड़ते हैं, ताकि उनके मुक़ाबले में दौड़ रहे शुक्राणु मर जाएं.

सिर्फ़ नर सेक्स सेल या शुक्राणु ही तरह-तरह के नहीं होते. मादा सेक्स सेल या अंडाणु भी तरह-तरह के होते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक़, दुनिया की सबसे बड़ी मादा सेक्स सेल, शुतुरमुर्ग का अंडा होती है.

शुतुरमुर्ग का अंडा, मुर्गी के अंडे से बीस गुना ज़्यादा भारी होता है. ये पंद्रह सेंटीमीटर लंबा और तेरह सेंटीमीटर चौड़ा होता है. वहीं परिंदों में सबसे छोटा अंडा हमिंगबर्ड का होता है, मटर के दाने के बराबर का.

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शेफील्ड यूनिवर्सिटी के टिम बिर्कहेड कहते हैं कि परिंदों के अंडों के आकार में काफ़ी फ़र्क देखने को मिलता है. बिर्कहेड कहते हैं कि परिंदों के अंडों का आकार इस बात पर निर्भर करता है कि उन अंडों से निकलने वाले चूज़े पूरी तरह विकसित होकर निकलेंगे या उन्हें और देखभाल की ज़रूरत होगी.

इसीलिए कई बार एक ही साइज़ के परिंदों के अंडे अलग-अलग होते हैं.

असल में अंडे की परिभाषा बड़ी व्यापक है. जैसे कि इंसान की मादा सेक्स सेल को भी अंडा ही कहते हैं. अब चूंकि इंसान में बच्चे का विकास मां के गर्भ में होता है, इसलिए उसके विकास की सारी ज़रूरत की चीज़ें गर्भनाल के ज़रिए अंडे को मिलती रहती हैं. मां विकसित बच्चे को जन्म देती है.

मगर बहुत से जानवर हैं जो अंडे देते हैं, जिनके अंदर बच्चे का विकास होता है. उस बच्चे के विकास के लिए अंडे के अंदर खाना, पानी और सुरक्षा का इंतज़ाम होना चाहिए. इसी वजह से अंडे देने वाले जानवरों की मादा सेक्स सेल या अंडे बड़े होते हैं.

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तो, इंसानों के अंडाणु या अंडे जहां 0.12 मिलीमीटर के होते हैं. वहीं मुर्गी का अंडा 55 मिलीमीटर का और शुतुरमुर्ग का अंडा 15 सेंटीमीटर का.

तो, अब समझे आप! हमने क्यों कहा था कि क़ुदरत के खेल निराले होते हैं.

दुनिया के सबसे बड़े मादा सेक्स सेल या अंडे को तो हम नंगी आंखों से देख सकते हैं. मगर दुनिया के सबसे बड़े शुक्राणु को देखने के लिए भी हमें सूक्ष्मदर्शी या माइक्रोस्कोप की ज़रूरत होगी.

शुक्र है, इंसान के दिमाग़ की कोशिकाओं ने इतनी तरक़्क़ी कर ली है, कि हम ज़िंदगी की बुनियादी सेल्स या कोशिकाओं को देखने के लिए माइक्रोस्कोप बना सके.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें , जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.)

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