वो दौर जब मर्दों को मोतियों से थी मोहब्बत

- Author, सिल्विया स्मिथ
- पदनाम, बीबीसी कल्चर
मोतियों की पूरी दुनिया शैदाई है. वो हज़ारों साल से पहने जा रहे हैं.
उस वक़्त भी मोतियों के हार पहने जाते थे, जब इंसान ने सोने या चांदी को नहीं खोजा था.
मानव सभ्यता के इतिहास के कमोबेश बराबर ही पुराना है, मोतियों का तारीख़ी सफ़र.
प्राचीन काल में मोती पहनने वाले समाज के ऊंचे तबक़े के लोग हुआ करते थे. सत्ता की ताक़त का प्रतीक भी मोती हुआ करता था.
प्राचीन काल की यूनान की देवी वीनस को ख़ूबसूरती, पवित्रता और उर्वरता का प्रतीक माना जाता था.
रोमन साम्राज्य में भी वीनस बहुत लोकप्रिय देवी थी, जिन्हें ग्रीक ज़बान में एफ्रोडाइट कहा जाता था.
यानी समुद्र के झाग से पैदा हुई देवी. वीनस का ताल्लुक़ भी मोतियों से रहा है.


क्यों ख़ास थे मोती?

मोती इसलिए ख़ास हैं क्योंकि वो क़ुदरती तौर पर सीपियों से पैदा होते हैं, उन्हें किसी और तराश की ज़रूरत नहीं होती.
प्राचीन काल में खाड़ी देशों के मछुआरों के खोजे हुए मोती सबसे अच्छे माने जाते थे. दुनिया भर को मोतियों की सप्लाई यहीं से होती थी.
ईसा से एक हज़ार साल पहले भी हमें मोतियों का कारोबार होने के सबूत मिले हैं.
अरब व्यापारी चीन और भारत तक जाकर मोतियों को बेचा करते थे.

चीन के बादशाह और भारत के महाराजाओं के बीच मोती बहुत लोकप्रिय थे. कई सदियों तक औरतों और मर्दों, दोनों को बराबरी से मोतियों का शौक़ रहा.
अफ़सोस की बात है कि आज मर्दों का मोती पहनना ग़लत माना जाने लगा है.
सोलहवीं सदी की ब्रिटिश महारानी एलिज़ाबेथ, जिन्हें कुंवारी महारानी कहा जाता था, वो भी पवित्रता के प्रतीक के तौर पर मोतियों के हार पहना करती थीं.
18वीं सदी के यूरोप में मोती पहनने का फ़ैशन ख़ूब ज़ोरों पर था. रईस ख़ानदानों में मोतियों की विरासत पीढ़ी दर पीढ़ी चला करती थी.


मोतियों की खेती
19वीं सदी में मोतियों के कारोबार में बड़ा मोड़ उस वक़्त आया जब किची मिकिमोतो ने मोतियों की खेती का तरीक़ा खोज निकाला.
किची मिकीमोतो चाहते थे कि हर महिला के गले में मोतियों का हार हो.

उनकी सोच ये थी कि मोती इतने सस्ते हों कि हर कोई पहन सके.
पहला गोल मोती जो कल्चर कर के तैयार किया गया, वो 1893 में बना था.
ये बिल्कुल वैसा ही था, जैसा किसी सीप के अंदर विकसित होता है. जापान में महिला गोताख़ोरों को समुद्र में भेजकर सीप जमा कराए जाते थे.

बीसवीं सदी के बीस के दशक में मोती पहनने का मतलब महिला का आज़ाद ख़याल होना माना जाता था.
1920 के दशक तक कल्चर्ड मोती पूरे पश्चिमी यूरोप में आसानी से हासिल किए जा सकने वाली चीज़ बन गए.
1930 के दशक में डिज़ाइनर कोको शनेल ने दिन के वक़्त मोती पहनने का चलन शुरू किया.


हॉलीवुड फ़िल्मों में मोती
हॉलीवुड फ़िल्मों के बड़े-छोटे स्टार अक्सर मोतियों की माला पहने हुए दिख जाते थे. इससे भी मोतियों की लोकप्रियता आम लोगों में बढ़ गई.
फ़िल्म कलाकारों के अलावा लोकप्रिय राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की पत्नी जैकी कैनेडी ने भी मोतियों के हार पहनकर इनकी लोकप्रियता अमरीकी देशों में बढ़ाई.

1980 से 1990 के दशक में मोती एक बार फिर से मज़बूती से फ़ैशनेबल हो गए थे. अब मोती एक ख़ास जूलरी के दायरे से आज़ाद हो गए थे.
आज की तारीख़ में मोतियों की मांग फिर से ज़ोर पकड़ रही है. मोतियों को दूसरे गहनों के साथ मिलाकर नए प्रयोग किए जा रहे हैं.
आज तरह-तरह के रंगों में मोती मिलते हैं. काले मोतियों को दूसरे रंगों के मोतियों से मिलाकर हार तैयार किए जाते हैं.

आज कल तो लोग ख़ुद से अपने मोतियों को डिज़ाइन कर रहे हैं. तरह-तरह के रंग-रूप दे रहे हैं.
मोती, लोगों के व्यक्तित्व को निखार देते हैं. पहनने वाले की शक्ल में एक अलग ही चमक आ जाती है.
(बीबीसी कल्चरपर इस स्टोरी को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. आप बीबीसी कल्चर को फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

















