वो महिला, जिनकी सबसे अधिक पेंटिंग बनायी गई

    • Author, होली विलियम्स
    • पदनाम, बीबीसी कल्चर

आज के दौर में सेलेब्रिटी अपने प्रचार के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं. अमरीका में किम कर्दाशियां और पेरिस हिल्टन ने तो सुर्ख़ियां बटोरने के लिए अपने सेक्स वीडियो तक लीक कर दिए.

वहीं भारत में राखी सावंत और पूनम पांडेय अक्सर सुर्ख़ियों में रहने के लिए अजब-ग़ज़ब तस्वीरें खिंचवाती और लीक करती रहती हैं.

शोहरत के भूखे ऐसे सेलेब्रिटी की फ़ेहरिस्त काफ़ी लंबी है.

सूज़ी सॉलिडॉर

आप सोचेंगे कि ये दौर इंटरनेट और सोशल मीडिया की वजह से आया है. मगर, ये सिलसिला बहुत पुराना है. कमोबेश एक सदी पुराना.

फ्रांस में ऐसी ही एक महिला हुआ करती थी. उस महिला का नाम था सूज़ी सॉलिडॉर. सूज़ी वो महिला थीं, जिनकी सबसे ज़्यादा पेंटिंग बनाई गई थी. क़रीब 225 कलाकारों ने सूज़ी के हुस्न को कैनवास पर उतारा था. इनमें तमारा लेंपिका, ज्यां कॉक्त्याऊ, फ्रांसिस बेकन, मैन रे और फ्रांसिस पिकाबिया जैसे कलाकार शामिल ते.

सूज़ी सॉलिडॉर फ्रांस की कैबरे स्टार थीं. तीस के दशक में पेरिस में उनका जलवा हुआ करता था. वो अपने अश्लील और लेस्बियन गानों के लिए मशहूर थीं. हालांकि आज के दौर में उन्हें शायद ही कोई जानता हो.

आज अगर सूज़ी होतीं, तो अपनी गुमनामी पर बेहद ख़फ़ा होतीं. क्योंकि सूज़ी सॉलिडॉर को हमेशा सुर्ख़ियों में रहना पसंद था. वो शोहरत की भूखी थीं.

शातिर कारोबारी थीं सूज़ी

अपने दौर से आगे की कलाकार सूज़ी बेहद शातिर कारोबारी भी थीं.

कारोबार के लिए ही वो अपनी सेक्सी छवि को चमकाए रखा करती थीं. वो शायद पहली महिला थीं जिनका पेरिस में अपना नाइटक्लब था.

सूज़ी सॉलिडॉर के नाइटक्लब का नाम था ला वी पेरिसियन. यहां वो अपनी आदमकद पेंटिंग्स के बीच डांस किया करती थीं और गाती थीं.

सूज़ी सॉलिडॉर ख़ुद को सेक्स सिम्बल मानती थीं. जैसे आज की स्टार किम कर्दाशियां.

सूज़ी ने अपने यौन संबंधों की नुमाइश कारोबार बढ़ाने के लिए की. वो अपने बारे में तमाम क़िस्से मशहूर कराया करती थीं, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग उनके नाइटक्लब में आएं.

सूज़ी सॉलिडॉर की ज़िंदगी पर आधारित एक नाटक हाल ही में इंग्लैंड के मैनचेस्टर शहर में पेश किया गया. इसमें सूज़ी का किरदार जेसिका वाकर नाम की अभिनेत्री ने निभाया.

अगले साल ये नाटक न्यूयॉर्क के मशहूर ब्रॉडवे थिएटर में पेश किया जाएगा.

फ़्रांस में जन्मी थीं सूज़ी

सूज़ी सॉलिडॉर का जन्म फ्रांस के ब्रिटनी सूबे के सेंट मालो नाम के क़स्बे में हुआ था. उनके पिता वक़ील थे. मां उनकी मदद किया करती थीं. बाप ने बेटी को पहचानने तक से इनकार कर दिया था. हालांकि सूज़ी सॉलिडॉर को मालूम था कि वो सामंती ख़ानदान से ताल्लुक़ रखती हैं. बाद में सूज़ी ने इसे ख़ूब भुनाया. जब सूज़ी मशहूर हो गईं, तो उनके पिता ने भी उनसे रिश्ता बनाने की कोशिश की थी.

सूज़ी सॉलिडॉर को उत्तेजक गाने पसंद थे. वो अपनी सेक्सी तस्वीरें खिंचवाया करती थीं. पेंटरों से वो अपनी ऐसी ही पेंटिंग भी बनवाया करती थीं.

सूज़ी ने 17 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था. पहले विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने स्वयंसेवक के तौर पर देश की मदद की थी. 1932 में वो एक समलैंगिक एंटीक डीलर के साथ पेरिस आ गईं. यहां उस आदमी की मदद से सूज़ी ने अपना नाइटक्ल खोला.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब फ्रांस पर जर्मनी का क़ब्ज़ा हो गया था, तब भी सूज़ी का नाइटक्लब चलता रहा था. दूसरा विश्व युद्ध ख़त्म होने के बाद उन पर फ्रांस की सरकार ने दुश्मन की मदद का मुक़दमा भी चलाया था.

स्विमसूट में टहलती दिखती थीं

मुक़दमे के बाद सूज़ी ब्रिटेन और अमरीका के लंबे दौरे पर निकल गई थीं. बाद में सूज़ी ने पेरिस लौटकर नया नाइटक्लब खोला. लेस्बियन रिश्तों पर सूज़ी खुलकर अपनी राय रखा करती थी. उनके कई गाने लेस्बियन रिश्तों को खुलकर बयां करने वाले थे.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी का फ्रांस पर कई साल क़ब्ज़ा रहा था. इस दौरान भी जर्मन सैनिक और अधिकारी सूज़ी के नाइटक्लब आया करते थे. उस दौर में बहुत से मशहूर पेंटर उनके नाइटक्लब आते थे. इनमें से कई ने सूज़ी की स्विमसूट में पेंटिंग्स बनाईं.

वो अक्सर बीच पर स्विमसूट में टहलती दिखाई दे जाती थीं. हालांकि वो दौर महिलाओं के इस तरह स्विमसूट में टहलने का नहीं था.

सूज़ी सॉलिडॉर पेरिस की महफ़िलों की शान हुआ करती थी. वो अक्सर खुले-खुले कपड़ों में पार्टियों में जाया करती थीं, जहां कम कपड़ों में अपनी तस्वीर खिंचवाने से उन्हें कोई परहेज़ नहीं होता था.

सूज़ी की भारी आवाज़ को बहुत से कलाकार सेक्सी कहा करते थे. वो उनके दीवाने थे. मर्द भी उनके आशिक थे और औरतें भी. ख़ुद सूज़ी खुले तौर पर लेस्बियन होने का दावा करती थीं.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सूज़ी के नाइटक्लब आने वाले जर्मन अधिकारी भी उनके मुरीद हुआ करते थे. वो सूज़ी की शर्तों पर ही नाइटक्लब में एंट्री पा सकते थे. उन्होंने जर्मन अधिकारियों को ये लिखकर दिया था कि वो आर्य नस्ल से ताल्लुक़ रखती हैं. हालांकि उन्होंने फ्रांस से कई यहूदियों को भी भागने में मदद की थी.

देशद्रोह का मुजरिम ठहराया

लेकिन विश्व युद्ध ख़त्म होने के बाद सूज़ी को मुक़दमा चलाकर देशद्रोह का मुजरिम ठहराया गया. उन्हें अपना देश छोड़ना पड़ा था.

फ्रांस दोबारा लौटने पर सूज़ी को वो कामयाबी नहीं मिली, जिसकी वो आदी हो चुकी थीं. जिसके बाद सूज़ी एक एडमिरल के तौर पर ख़ुद को पेश करने लगी. आख़िरी दौर में एकाकीपन ने सूज़ी को सनकी बना दिया था. वो आदमियों की तरह के कपड़े पहनने लगी थीं. उन्होंने ख़ुद को शराब में डुबो दिया. उनका तराशा हुआ शरीर बेडौल हो गया था.

सूज़ी के आख़िरी कुछ बरस बहुत बुरे बीते. 1983 में गुमनामी में सूज़ी सॉलिडॉर का निधन हो गया. लेकिन उनकी कई पेंटिंग आज भी कैन नाम के शहर के म्यूज़ियम में रखी हुई हैं.

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