You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
उड़ता हुआ सुअर कैसे बना विरोध का प्रतीक?
- Author, जोनाथम ग्लैंसी
- पदनाम, बीबीसी कल्चर
सुअर नाम सुनते ही, ज़हन में गंदे से जानवर का विचार आता है. भारतीय संस्कृति में सुअर को गंदगी और भद्देपन का प्रतीक माना जाता रहा है.
इस जानवर का नाम गाली के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है. दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी सुअर को लेकर यही ख़याल रहे हैं.
मसलन, ब्रितानी लेखक जॉर्ज ऑरवेल ने अपने उपन्यास 'एनिमल फार्म' में ऐसे मुल्क़ का ज़िक्र किया है, जहां सुअरों का राज है. इन्हें सारी बुरी आदतें हैं.
ये सुअर इंसानों से नफ़रत करते हैं. मगर आख़िर में आते-आते दोनों में कोई फ़र्क़ नहीं रह जाता.
उपन्यास के आख़िरी वाक्य में ऑरवेल ने लिखा है, "शराब पीते हुए सुअरों ने साथ ही शराब पी रहे इंसानों की आंखों में देखा. दोनों की आंखें फिर मिलीं और कई बार मिलीं. दोनों को उस वक़्त देखकर फ़र्क़ करना मुश्किल था."
यानी ऑरवेल ने अपने उपन्यास में सुअरों को बुराई का प्रतीक बनाया और इंसानों को अच्छाई का.
आसमान में उड़ता पुतला
यूं तो ऑरवेल ने ये उपन्यास सोवियत संघ के तानाशाह जोसेफ़ स्टालिन पर तंज के तौर पर लिखा था.
मगर, ये सुअरों को लेकर इंसानों के सदियों के ख़यालात की मिसाल भी है.
ये बात बीसवीं सदी के पचास के दशक की थी. ऑरवेल का उपन्यास 1945 में छपा था. अगले पंद्रह बीस सालों में यही सुअर बग़ावत का प्रतीक बन गया.
और बाग़ियों के प्रतीक के तौर पर इन सुअरों का सफ़र कैसा रहा है, इसे आप लंदन के मशहूर विक्टोरिया और अल्बर्ट म्यूज़ियम में देख सकते हैं.
असल में इस म्यूज़ियम में मशहूर ब्रिटिश बैंड पिंक फ्लॉयड पर एक प्रदर्शनी लगाई गई है.
इस प्रदर्शनी के प्रचार के तौर पर सुअर के एक पुतले को आसमान में उड़ता हुआ दिखाया गया है.
ब्रिटिश एयरफोर्स
ब्रिटिश बैंड पिंक फ्लॉयड और सुअरों का गहरा नाता रहा है. दोनों ही व्यवस्था के विरोध के प्रतीक रहे हैं. दोनों का ये सफ़र 1977 में शुरू हुआ था.
जब अपने एनिमल सिरीज़ के एल्बम के प्रचार के लिए पिंक फ्लॉयड ने सुअर के एक पुतले को बैटरसी पावर स्टेशन के ऊपर लगाया था. इसका नाम दिया गया था एलजी.
हुआ कुछ यूं कि लगाए जाने के अगले ही दिन एलजी ने केंट की उड़ान भर ली.
उसको लेकर तमाम चर्चाएं चल पड़ीं कि उसका पता लगाने के लिए ब्रिटिश एयरफ़ोर्स के विमान भेजे गए थे.
पिंक फ्लॉयड ने एल्बम के कवर के लिए इसका फ़ोटोशूट करने की तैयारी की थी, तब तक एलजी बंधन की रस्सियां तोड़कर उड़ चला.
और तभी से सुअर, पिंक फ्लॉयड के साथ जुड़ गए. उनके तमाम एल्बम के कवर में भी ये दिखे.
विशालकाय सुअर
बैटरसी पावर स्टेशन के ऊपर पुतला लगाने से लेकर विक्टोरिया और अल्बर्ट म्यूजियम तक, सुअरों ने लंबा सफ़र तय किया है.
आमतौर पर कलाकार, संगीतकार और रॉक व पॉप बैंड व्यवस्था के विरोध का प्रतीक बन जाते हैं. पिंक फ्लॉयड की शोहरत भी इसी वजह से थी.
इसीलिए उन्होंने जब अपने एल्बम के प्रचार के लिए सुअर का इस्तेमाल किया, तो वो भी बग़ावती तेवर वाला हो गया.
क़रीब चालीस सालों के साथ में पिंक फ्लॉयड और सुअर ने ख़ुद को कई बातों का प्रतीक बनाया.
जैसे कि जून 2007 में जब बैंड ने अमरीका के मिलुवाकी में शो किया, तो इसमें भी एक विशालकाय सुअर का पुतला लगाया गया था.
परफॉर्मेंस के आख़िर में ये सुअर आसमान में उड़ाया गया. इसके पीछे लिखा था- बुश पर महाभियोग चलाओ.
चिली में तानाशाही
ये उस वक्त के अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया गया.
इसी तरह एक साल जब पिंक फ्लॉयड ने लैटिन अमरीकी देश अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनेस आयर्स में शो किया था. तब वहां के पड़ोसी देश चिली में तानाशाही के दौर में मारे गए तीस हज़ार लोगों की याद के तौर पर प्लास्टिक के सुअर को लगाया गया था.
इस सुअर को चिली के तानाशाह ऑगस्तो पिनोशे के राज के प्रतीक के तौर पर दिखाया गया था.
बीसवीं सदी के साठ और सत्तर के दशक में हिप्पी और रॉक बैंड के सदस्य पुलिसवालों को 'पिग्स' कहा करते थे.
बग़ावत का प्रतीक
क्योंकि वो सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वालों पर लाठियां और गोलियां बरसाते थे. उन्हें ज़ुल्म के प्रतीक के तौर पर देखा जाता था.
उस दौर में अकसर रॉक बैंड के लोग ख़ुद को बग़ावत का प्रतीक दिखाने के लिए सुअरों का इस्तेमाल करते थे.
जैसे कि अमरीकी गायक मिक अब्राहम ने अपने अल्बम 'अहेड रिंग्स आउट' के कवर पर सुअर की तस्वीर इस्तेमाल की थी.
ये एक स्टाइलिश पिग था, जो चश्मा और हेडफ़ोन लगाए हुए था और सिगरेट पीते हुए दिखाया गया था.
पिंक फ्लॉयड के रोजर वॉटर्स से लेकर बीटल्स के जॉर्ज हैरिसन तक, तमाम कलाकारों ने अपने-अपने तरीक़े से सुअरों को प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया है.
ये सभी ब्रिटिश उपन्यासकार जॉर्ज ऑरवेल से प्रभावित नज़र आते हैं. ऑरवेल के उपन्यास में सुअरों को भ्रष्ट, घूसखोर, नशेड़ी और हिंसक दिखाया गया था.
आठ लोगों का कत्ल
उनमें इंसानों के सारे ऐब दिखाए गए थे. बीटल्स के जॉर्ज हैरिसन ने पिग्गीज़ नाम का गीत भी अपने व्हाइट एल्बम में शामिल किया था.
अमरीकी गायक-गीत लेखक और अपराधी चार्ल्स मैनसन ने सुअर कहते ही अभिनेत्री शैरन टेट के साथ आठ और लोगों का क़त्ल कर डाला था.
ये वारदात 1969 की थी और आज भी मैन्सन मर्डर्स के नाम से याद की जाती है.
यानी पिंक फ्लॉयड के पिग्स इंसानियत के गहरे काले ऐबों के प्रतीक रहे हैं.
इसकी शुरुआत एलजी से हुई थी. इसका ख़याल रोजर वॉटर्स को आया था, जिन्हें रोज़ाना अपनी खिड़की से बैटरसी पावर स्टेशन की चार चिमनियों के दीदार होते थे.
उन्होंने इसके विरोध के तौर पर पावर स्टेशन के ऊपर सुअऱ का पुतला लगवाया था. ये आइडिया बेहद कामयाब रहा. इसे कई बार दोहराया गया.
2011 में भी बैटरसी पावर स्टेशन के ऊपर सुअर का एक पुतला लगाया गया था. उस साल पिंक फ्लॉयड ने अपने सारे 14 एल्बम फिर से रिलीज़ किए थे.
नेशनल ट्रस्ट
तो एक अभियान चला था. व्हाय पिंक फ्लॉयड. इसी के प्रतीक के तौर पर सुअर को लगाया गया था.
यानी जो सुअर पिंक फ्लॉयड ने बग़ावत के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया था. उसे ही उनके इस क़दम के विरोध के तौर पर लगाया गया.
कई फ़िल्मों में भी सुअरों का बख़ूबी इस्तेमाल हुआ है. मसलन चिल्ड्रेन ऑफ मेन, नैनी मैक्फ़ी रिटर्न्स या फिर टीवी सीरीज़ सिंपसन्स में भी सुअर दिखे हैं.
लंदन ओलंपिक के लिए निर्देशक डैनी बॉयल की बनाई फ़िल्म में भी सुअर का इस्तेमाल हुआ था.
मगर आज, चालीस साल बाद यूं लगता है कि कभी बाग़ियों की पहचान रहे सुअरों को भी व्यवस्था ने हड़प लिया है.
पिंक फ्लॉयड के ड्रमर रहे निक मैसन कहते हैं कि आज सुअर का मालिक नेशनल ट्रस्ट है.
यानी जिस सरकार के ख़िलाफ़ पिग्स ने आवाज़ उठाई, आज वही सरकार उनकी मालिक है.
(बीबीसी कल्चर पर इस स्टोरी को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. आप बीबीसी कल्चर कोफ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)