ऑटिज़्म से ग्रसित लोगों को यह कंपनी रखती है काम पर

    • Author, रॉबी वोजेकॉव्स्की
    • पदनाम, बीबीली वर्कलाइफ़

राजेश आनंदम ने एमआईटी के अपने रूममेट आर्ट शेटमैन के साथ अल्ट्रानॉट्स (पहले अल्ट्रा टेस्टिंग) कंपनी बनाई तो उनका एक मक़सद था.

वह साबित करना चाहते थे कि न्यूरोडायवर्सिटी और ऑटिज़्म से कारोबार में प्रतिस्पर्धी लाभ मिल सकता है.

46 साल के आनंदम कहते हैं, "ऑटिस्टिक स्पेक्ट्रम के वयस्कों में अविश्वसनीय प्रतिभा है, जिसे ग़लत वजहों से अनदेखा किया गया है."

"वह दफ़्तर, काम के ढांचे और कारोबारी दस्तूर के कारण सफल नहीं हो पाते. ये दस्तूर किसी के लिए विशेष रूप से प्रभावी नहीं हैं, लेकिन अलग तरह की तंत्रिका कोशिकाओं वाले लोगों के लिए विशेष रूप से नुक़सानदेह हैं."

न्यूयॉर्क की यह क्वालिटी इंजीनियरिंग स्टार्ट-अप कंपनी अकेली नहीं है. ऑटिस्टिक प्रतिभा की ओर देखने वाली कंपनियों की तादाद बढ़ रही है.

माइक्रोसॉफ्ट और अकाउंटिंग फ़र्म अर्न्स्ट एंड यंग के कार्यक्रम दफ़्तर के न्यूरोडायवर्स कर्मचारियों (जिनके मस्तिष्क अलग तरीक़े से सूचनाओं को संसाधित करते हैं) को समर्थन देने पर केंद्रित हैं.

लेकिन अल्ट्रानॉट्स ने अपना पूरा कारोबार ही न्यूरोडायवर्सिटी के इर्द-गिर्द डिज़ाइन किया है.

भर्ती प्रक्रिया में सुधार

ऑटिज़्म से पीड़ित व्यक्तियों को नौकरी पर रखने के लिए भर्ती प्रक्रियाओं को बदला गया है. दफ़्तर की परिपाटियों को बदला जा रहा है ताकि टीम का प्रभावी प्रबंधन हो सके.

आनंदम कहते हैं, "हम काम के ब्लूप्रिंट को बदलने के लिए तैयार हैं. कोई कंपनी कैसे भर्ती करे, प्रबंधन करे और प्रतिभा का विकास करे."

पिछले कुछ साल में काम में सहभागिता बढ़ाने के एजेंडे में न्यूरोडायवर्सिटी ऊपर पहुंच गई है, फिर भी यह एक सामान्य शब्द नहीं है.

न्यूरोडायवर्सिटी मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणालियों में अंतर की सीमाएं बताती है, जो डिस्लेक्सिया, ऑटिज़्म और एडीएचडी से जुड़ी हो सकती है.

ब्रिटेन की नेशनल ऑटिस्टिक सोसायटी (एनएएस) के रिसर्च से पता चला है कि ब्रिटेन में ऑटिज़्म से पीड़ित लोगों के रोज़गार के आंकड़े अब भी बहुत कम हैं.

2,000 ऑटिस्टिक वयस्कों के सर्वे में पाया गया कि उनमें से सिर्फ़ 16 फ़ीसदी पूर्णकालिक नौकरी में हैं, जबकि 77 फ़ीसदी बेरोज़गार लोग काम करना चाहते हैं.

ऑटिज़्म से पीड़ित लोगों के काम करने में बड़ी-बड़ी बाधाएं हैं. एनएएस की एम्प्लॉयर इंगेजमेंट मैनेजर रिचमल मेबैंक का कहना है कि इसमें कई कारकों का योगदान है.

वह कहती हैं, "नौकरी के विवरण अक्सर काफ़ी सामान्य हो सकते है. आवेदनों में 'टीम प्लेयर' और 'बेहतरीन संचार कौशल वाले स्टाफ़' का ज़िक्र होता है लेकिन विशिष्ट सूचनाओं का अभाव होता है.

इस जैसे शब्द या इंटरव्यू में पूछे जाने वाले सवाल जैसे कि 'आप अगले 5 साल में ख़ुद को कहां देखते हैं' ऑटिज़्म से पीड़ित लोगों के लिए बहुत आम सवाल हैं.

असहज न बनाएं

अस्पष्ट सवालों को समझने में उनको दिक्कतें हो सकती हैं. इसके अलावा वे अपनी अक्षमता के बारे में बताने में असहज महसूस कर सकते हैं.

खुले दफ़्तर उनके लिए चुनौती पेश कर सकते हैं जहां उन्हें सबसे घुलने-मिलने या शोर-शराबे को बर्दाश्त करने की ज़रूरत होती है.

अल्ट्रानॉट्स के 75 फ़ीसदी स्टाफ़ ऑटिस्टिक हैं. इसकी वजह है भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया गया नया नज़रिया.

दूसरी कंपनियों में आवेदकों के मूल्यांकन में सबसे बड़ा ज़ोर संचार दक्षता पर होता है, जो न्यूरोडायवर्स लोगों को बाहर कर देता है.

अल्ट्रानॉट्स में कोई इंटरव्यू नहीं होता और आवेदकों के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि उनके पास किसी विशेष तकनीकी दक्षता का अनुभव हो.

आनंदन कहते हैं, "हमने आवेदकों की स्क्रीनिंग का नया तरीक़ा अपनाया है जो दूसरी जगहों से ज़्यादा निष्पक्ष है."

अल्ट्रानॉट्स की भर्ती प्रक्रिया

सीवी और इंटरव्यू का इस्तेमाल करने की जगह संभावित कर्मचारी एक बुनियादी दक्षता मूल्यांकन से गुज़रते हैं जिसमें सॉफ्टवेयर टेस्टर्स के लिए 25 वांछनीय ख़ूबियां देखी जाती हैं, जैसे- नये सिस्टम को सीखने और फ़ीडबैक लेने की क्षमता.

शुरुआती परीक्षणों के बाद संभावित कर्मचारियों को एक हफ़्ते तक घर से काम करना होता है, जिसका पूरा भुगतान किया जाता है.

वे काम के तय शेड्यूल में बंधे रहने की बजाय लचीले टाइम-टेबल (डीटीई) को चुन सकते हैं. मतलब यह कि वे काम के प्रबंधन के लिए अपनी सहूलियत से चाहे जितने घंटे ले सकते हैं.

आनंदम कहते हैं, "नतीजा यह है कि हमारे पास उस व्यक्ति की प्रतिभा पहचानने की एक प्रक्रिया है, जिसने वह काम पहले कभी नहीं किया हो. प्रक्रिया के ख़त्म होने पर उसका आत्मविश्वास भी 95 फ़ीसदी हो जाता है."

विविधता के फ़ायदे

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और बीआईएमए के अध्ययनों से पता चला है कि अलग तरीक़े से सोचने की प्रतिभा वाले लोगों को ज़्यादा मौक़े देने से व्यापार को बड़ा लाभ हो सकता है.

न्यूरोडायवर्स कर्मचारी नये तरीक़े ईजाद करते हैं और समस्या निदान में सुधार होता है, क्योंकि वे सूचनाओं को विभिन्न तरीक़ों से देखते और समझते हैं.

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया है कि न्यूरोडायवर्स स्टाफ़ के लिए लचीले घंटे या घर से काम करने की सुविधा जैसे उपाय से उन कर्मचारियों को भी फ़ायदा होता है.

एनएएस का कहना है कि ऑटिस्टिक प्रतिभा और न्यूरोडायवर्स कर्मचारियों की भर्ती के बारे में जानने के लिए पहले से अधिक कंपनियां उससे संपर्क कर रही हैं. इनमें से कई कंपनियां आईटी सेक्टर के बाहर की हैं.

एनएएस छोटे बदलावों के सुझाव देती है. मिसाल के तौर पर यह सुनिश्चित करना कि हर मीटिंग का एक एजेंडा हो.

एजेंडा और इसी तरह के टूल न्यूरोडायवर्स कर्मचारियों को प्रासंगिक सूचनाओं पर ध्यान केंद्रित करने और योजना बनाने में मदद करते हैं.

मेबैंक कहती हैं, "हमारे सुझाव सभी कंपनियों के लिए अच्छे हैं, सिर्फ़ ऑटिस्टिक कर्मचारियों वाली कंपनी के लिए नहीं. ये उपाय बहुत महंगे नहीं हैं और इसके अच्छे नतीजे तुरंत ही दिखने लगते हैं."

मेबैंक पिछले एक दशक से ऑटिस्टिक लोगों के साथ काम कर रही हैं. वह प्रबंधकों को न्यूरोडायवर्सिटी के बारे में ट्रेनिंग देने और दफ़्तरों में बेहतर सामाजिक संबंध बनाने में सहायक कार्यक्रम शुरू करने की वकालत करती हैं.

उनको लगता है कि नियोक्ताओं को उन कर्मचारियों की तरक्की के लिए अलग रास्ते बनाने चाहिए जो प्रबंधक नहीं बनना चाहते.

मेबैंक मानती हैं कि न्यूरोडायवर्सिटी के बारे में जागरुकता बढ़ने से दफ़्तरों में समझ बढ़ी है. "लोग ऑटिस्टिक और न्यूरोडायवर्स व्यवहार के विभिन्न रूपों को मान्यता देने लगे हैं."

"लोगों के मन में एक पूर्व-धारणा है कि ऑटिज़्म क्या है, लेकिन उस व्यक्ति से पूछना सबसे अच्छा है. एक जैसी स्थिति में होने पर भी उनके विचार विरोधी हो सकते हैं."

नई टेक्नोलॉजी का निर्माण

बात सिर्फ़ जागरुकता बढ़ाने की नहीं है. दूर रहकर काम करने की सहूलियत और नई तकनीक भी उन लोगों की मदद कर रही है, जिनको पहले नौकरी पाने में मुश्किल होती थी.

इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म जैसे स्लैक और लिस्ट मेकिंग ऐप ट्रेलो जैसे टूल ने दफ़्तर से बाहर काम करने वालों के लिए संचार की सुविधा बढ़ा दी है.

ऑटिस्टिक लोगों को आमने-सामने के संचार में दिक्कत हो सकती है. उनके लिए ये टूल अतिरिक्त फ़ायदेमंद हो सकते हैं.

अल्ट्रानॉट्स ने इन तकनीकों का इस्तेमाल किया है, साथ ही अपने स्टाफ़ की ज़रूरत के मुताबिक़ टूल बनाए हैं.

आनंदम के एक सहयोगी ने कुछ साल पहले सुझाव दिया था कि सभी लोगों का एक यूज़र मैनुअल हो. उन्होंने ठीक ऐसा ही किया.

अल्ट्रानॉट्स ने 'बायोडेक्स' तैयार किया जिसमें सभी कर्मचारियों ने अपने बारे में लिखा.

इससे कंपनी में उनके सहयोगियों को किसी ख़ास व्यक्ति के साथ काम करने के सबसे अच्छे तरीक़ों के बारे में सभी ज़रूरी सूचनाएं मिल जाती हैं.

दफ़्तर के सेट-अप और ऑटिस्टिक ज़रूरतों के लिए कंपनी के व्यवहार में लचीलापन लाने से अल्ट्रानॉट्स को बड़ी कामयाबी मिली है. अब यह कंपनी अपने अनुभवों को दूसरी कंपनियों के साथ साझा कर रही है.

आनंदम का कहना है कि दफ़्तर को समावेशी बनाने से घर्षण या अक्षमता नहीं बढ़ती है, बल्कि इससे समाज में उपेक्षित लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौक़ा मिला है.

"हमने बार-बार साबित किया है. हमने बेहतर नतीजे दिए हैं क्योंकि हमारी टीम में विविधता है."

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