वो गाँव जहाँ बचे हैं बूढ़े और भेड़िए

    • Author, अन्ना पेरेज़
    • पदनाम, बीबीसी वर्कलाइफ़

"मैं यहां लौटी तो मुझे बहुत बुरा लगा, क्योंकि मैं अपने गांव को पहचान नहीं पाई. जब हम यहां बड़े हुए थे उस समय की कोई चीज़ नहीं बची है. इसे मरता हुआ देखना बहुद तकलीफदेह है."

"उन्हें कुछ करना होगा क्योंकि लोग गांव छोड़कर जा रहे हैं. यहां केवल बूढ़े रह गए हैं और युवाओं में कोई नहीं है. लगभग शून्य."

"पहले यहां चारों तरफ फ़सल लगी होती थी. अब सब जगह जंगली घास उगी हुई है. कोई रोज़गार नहीं बचा. पैसे नहीं आ रहे. युवाओं को कुछ नहीं मिलेगा तो उनको जाना ही पड़ेगा."

"यहां भालुओं की तादाद बढ़ गई है और भेड़ियों की भी. उन्होंने मेरे कई बछड़ों को मार दिया है. प्रकृति हम सब को खा रही है."

स्पेन के एस्टुरियस में पहाड़ों के बीच बसे गांव येर्नेस और टमेज़ा में सिर्फ़ 46 लोग स्थायी रूप से रहते हैं.

यहां की गलियों में ज़्यादा हलचल नहीं होती. बच्चों के खेलने से होने वाला शोरगुल तो बिल्कुल नहीं होता.

इस गांव के 135 पंजीकृत निवासी हैं जिनमें वे भी शामिल हैं जो कभी-कभार यहां आते हैं.

यहां रहने वाले निवासियों में दो तिहाई लोग 50 साल से ऊपर के हैं और सिर्फ़ 5 फीसदी लोग 20 साल से कम उम्र के हैं.

वैसे तो पूरे यूरोपीय संघ में जन्मदर घट रही है, लेकिन स्पेन के इन गांवों की तरह आबादी घटने का दंश कम ही जगहों पर महसूस होता है.

घटती जन्मदर और पलायन

स्पेन के पहाड़ी इलाके जहां येर्नेस और टमेज़ा स्थित हैं वहां की जन्मदर देश में सबसे कम है. कम जन्मदर के मामले में ख़ुद स्पेन भी यूरोपीय संघ में दूसरे नंबर पर है.

इन दूरदराज़ के पहाड़ी गांवों में पैदा होने वाले बच्चे यहां नहीं रहते. बेहतर संभावनाओं की तलाश में वे शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं.

गलियों में कुछ मुर्गियां दाने चुग रही हैं. कई घर खाली पड़े हैं. उनको देखकर लगता है कि कई महीनों से वहां कोई नहीं आया.

बुज़ुर्ग महिला चारो गार्सिया उन दिनों को याद करती हैं जब गांव में खूब हलचल रहा करती थी.

"यहां छह बार हुआ करते थे क्योंकि यहां कोयले की खदानें थीं. लॉरियां आती थीं, खदान में काम करने वाले मजदूर आते थे, लेकिन कई साल पहले उन्होंने खदान बंद कर दिया."

गांव के सभी लोग एक-दूसरे से परिचित हैं. गार्सिया कहती हैं, "यहां हम सब दोस्त हैं, मगर हम बहुत कम हैं."

दो बच्चे साइकिल चला रहे हैं. इस गांव में ऐसा कम ही देखने को मिलता है.

चारो गार्सिया कहती हैं, "यह दुनिया की सबसे ठंडी जगह है. जिनको भी कुदरत से मुहब्बत है उनको यहां आना चाहिए."

शहरों में भविष्य है

स्पेन का 84 फ़ीसदी भू-भाग देहाती है लेकिन वहां सिर्फ़ 16.5 फीसदी आबादी रहती है. जितना छोटा कस्बा उतने बूढ़े बाशिंदे.

पूरे स्पेन में 100 से कम आबादी वाले कस्बों में 40 फ़ीसदी लोग 65 साल या उससे अधिक उम्र के हैं.

येर्नेस और टमेज़ा के लोग सदियों से गाय पालते रहे हैं. कुछ लोगों को अब भी गाय चराना पसंद है. लेकिन बच्चों के भविष्य के लिए उनको भी शहर जाना पड़ता है.

गांवों के शहर से कट जाने और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण अभिभावक अपने बच्चों को यहां नहीं रखना चाहते.

येर्नेस और टमेज़ा के एक निवासी अपने चार साल के बेटे को लेकर शहर के स्कूल पहुंचे हैं.

वह कहते हैं, "मैं चाहता हूं कि मेरा बेटा पशुपालक बने. लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा होना मुश्किल होगा क्योंकि पशुपालक बनना कठिन होता जा रहा है."

"गांव में परवरिश से आप कई चीजें सीखते हैं जो शहरों में नहीं सीख सकते. जैसे चीज़ो का सम्मान करना, मवेशियों से प्यार करना और लोगों से घुलना-मिलना."

बुजुर्ग रिटायर टीचर जोस गेरार्डो अलोंसो अपने सोलर पैनल को चेक कर रहे हैं कि वह कितना गर्म हुआ. युवाओं का पलायन उनके लिए भी चिंता की बात है.

अलोंसो कहते हैं, "यहां से शहरों की ओर पलायन हुआ. इसकी कई वजहें रहीं सबको गिनाया नहीं जा सकता."

वह देहाती परिवेश, ताज़ी हवा, शांति और तनाव रहित ज़िंदगी को अहमियत देते हैं. "लेकिन संस्थाएं इस बात पर जोर नहीं देतीं कि ये पर्याप्त हैं."

गांव में जंगली जानवर

इंसान कम होने का मतलब है ज़्यादा जंगली जानवर. गांव में छे भेड़ियों का झुंड और कई भालू घूमते हैं. कभी-कभी उनकी तादाद इससे भी बढ़ जाती है.

अलोंसो कहते हैं, "यदि हम मवेशी रखना चाहते हैं तो हमें इसकी कीमत चुकानी पड़ती है."

नगर पालिका चाहती है कि यहां ज़्यादा से ज़्यादा सैलानी पहुंचें और पहाड़ों के घिरे इस गांव में वक़्त बिताएं.

येर्नेस और टमेज़ा के मेयर मैनेलो डेज़ टमार्गो कहते हैं, "हमें अपने बारे में बताना है. अपनी अलग पहचान दिखानी है. यहां की ख़ूबसूरती के बारे में सबको बताना है."

"हमें अपने संसाधनों को सिर्फ़ मवेशी पालने तक सीमित नहीं रखना चाहिए. हमें इसमें मधुमक्खी पालन, गुफाओं के अध्ययन, पर्यटन और पर्वतारोहण को भी जोड़ना चाहिए."

दोस्तों को डिनर का न्योता

जोनाथन कैसानोवा ने इस गांव में एक घर खरीदा है. वह हर हफ्ते वीकेंड पर यहां आते हैं.

वह कहते हैं, "मैं बहुत कोशिश करता हूं कि मेरे दोस्त यहां मेरे घर डिनर पर आएं. मुझे समझ नहीं आता कि वे दफ्तर जाते समय डेढ़ घंटे ट्रैफिक में फंसे रहने को सामान्य समझते हैं लेकिन पहाड़ी सड़क पर 15 मिनट गाड़ी चलाकर वे यहाँ नहीं आना चाहते."

कैसानोवा को लगता है कि "एक बार यहां पहुंच जाने पर उनके दोस्तों का आना सार्थक हो जाता है."

गांव में सेवाओं की कमी एक बाधा है. डॉक्टर यहां महीने में दो बार आता है. यहां वायरलेस इंटरनेट अभी तक नहीं पहुंचा है.

कैसानोवा कहते हैं, "मेरी गर्लफ्रेंड की एक छोटी कंपनी है. हम यहां से काम कर सकते थे, लेकिन अभी हम नहीं कर सकते."

57 साल पुरानी याद

गार्सिया 57 साल पहले इस गांव से चली गई थीं. अब वह कभी-कभी यहां आती हैं और पुरानी परिचितों से मिलती हैं.

वह बताती हैं, "यह चौराहा पहले पक्का नहीं था. जब नौजवान खेतों में काम करके घर लौटते थे तब वे यहां फ़ुटबॉल खेला करते थे. हम यहां हर रोज डांस करते थे."

गार्सिया की एक दोस्त ने उनको टोका तो वह दूसरी महिलाओं के साथ घेरा बनाकर डांस करने लगीं.

"यहां कोई उद्योग या रोज़गार नहीं था. इसलिए हमें यहां से पलायन करना पड़ा. फिर भी यह गांव सबके लिए स्वर्ग था."

गार्सिया 54 साल एविल्स शहर में रहीं. लेकिन वह उस शहर को अपना नहीं समझतीं.

"मेरी जड़ें यहां हैं. मेरे दोस्त यहां हैं. मैं यहां मरना चाहती हूं. यदि वे यहां बुज़ुर्गों के लिए आवास बना दें तो मैं उसमें सबसे पहले रहूंगी. यदि मैंने कोई लॉटरी जीती तो मैं उसी दिन वापस यहां आ जाऊंगी."

इस कहानी को मूल रूप में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)