टालमटोल करने की आदत हो तो करें ये काम

टाल-मटोल करने की आदत हो तो करें ये काम

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    • Author, ज़ारिया गॉर्वेट
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

मोज़ार्ट एक दिन घर के बाहर दोस्तों के साथ शराब पी रहे थे. तारीख थी 3 नवंबर 1787.

प्राग में अगले दिन उनके नये ओपेरा 'डॉन जिओवानी' का प्रीमियर था. मोज़ार्ट की यह महान कृति इतिहास में सबसे प्रशंसित संगीत कार्यों में से एक बनने वाली थी.

लेकिन समस्या यह थी कि मोज़ार्ट ने उस रात तक इसका मुखड़ा नहीं बनाया था.

संयोग से यह महान संगीतकार टालमटोल करने का भी उस्ताद था. वह उस दिन भी काम तो कर रहे थे लेकिन कुछ और.

मोज़ार्ट के साथियों ने उन्हें समझाया कि अब और देरी ठीक नहीं है. आधी रात को वह काम पूरा करने के लिए घर लौटे.

वह पूरी रात लगे रहे. उनको जगाए रखने के लिए उनकी पत्नी उनको मुक्के मारती रही.

अंत में उन्होंने काम पूरा कर लिया, लेकिन अगली शाम प्रदर्शन में देरी हुई क्योंकि मुखड़े की कॉपी बनाने या उसके रिहर्सल के लिए समय नहीं था.

यदि आप भी उसी तरह के व्यक्ति हैं जो पूरी रात जगकर दिलचस्प चीज़ों, जैसे मुर्गियों को चश्मा पहनाने वाले किसानों के बारे में रिसर्च करते हैं या मोज़ार्ट की तरह हैं जो डेडलाइन करीब आने पर भी दूसरी चीज़ों में लगे रहते हैं तो आपको मदद की ज़रूरत हो सकती है.

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देरी की आदत

काम टालने वालों को अक्सर अपनी इस आदत पर गर्व होता है. इसके सम्मान में एक "राष्ट्रीय शिथिलता सप्ताह" भी मनाया जाता है.

वैसे तो यह कार्यक्रम मार्च की शुरुआत में होना चाहिए, लेकिन स्वाभाविक रूप से इसमें देरी होती है.

इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि काम टालना एक बुरा विचार है.

2013 के एक अध्ययन से पता चला था कि कम तनख़्वाह और छोटी अवधि के रोज़गार करने वाले इस आदत के ज़्यादा शिकार होते हैं. बेरोजगार और कम रोजगार वाले भी इसके पीड़ित हो सकते हैं.

टालमटोल करने वाले लोग तनाव से भरे हो सकते हैं. यह आदत उनको बीमार भी बना सकती है.

इस आदत के लिए एक मज़ाकिया परिभाषा गढ़ी गई है- बिना किसी कारण के अपनी ज़िंदगी को बर्बाद करने वाला काम.

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गतिविधियों की सूची

टाल-मटोल करने वाले लोगों की ज़िंदगी को पटरी पर लाने का एक उल्टा तरीका है- काम और कार्यक्रमों की सूची बनाना.

टाइम-टेबल बनाने के सामान्य तरीकों की तरह ही इसमें हफ्ते भर की गतिविधियों की सूची बनाई जाती है.

लेकिन जो काम पूरे करने हैं, उनकी जगह सूची में उन गतिविधियों को शामिल किया जाता है जो आप करेंगे ही, जैसे दोस्त के साथ डिनर करना या रात में अच्छी नींद के लिए सुबह दौड़ लगाना वगैरह.

अंत में इसमें वे काम जोड़े जाते हैं जिसके लिए आप पहले से प्रतिबद्ध हैं, जैसे छुट्टियां और बैठकें.

इस तकनीक की खोज मनोवैज्ञानिक और लेखक नील फ़ियर ने की थी. 1988 में उनकी किताब प्रकाशित हुई थी- "The Now Habit".

फ़ियर की यह तकनीक ब्लॉग्स, ऑनलाइन वीडियो और किताबों के जरिये लोकप्रिय हो गई. मुख्यधारा के मनोचिकित्सक भी इसका इस्तेमाल करते हैं.

बर्कले में यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया में काम करने के दौरान फ़ियर को पहली बार टाल-मटोल करने के ख़तरों का अहसास हुआ था.

तब तक उन्होंने अपनी कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए कुछ तकनीक विकसित कर ली थी और सिर्फ़ एक साल में अपनी डॉक्टरेट थीसिस भी लिख ली थी.

दूसरे छात्रों को इसमें तय वक़्त से करीब 9 से 10 महीने ज़्यादा लगते थे. कुछ मामलों में तो यह कई दशकों तक खिंच जाता था. (रिकॉर्ड 77 साल का है.)

फ़ियर ने शोध प्रबंध लिखने में जूझने वाले छात्रों के लिए एक सहायता समूह शुरू किया. उन्होंने एक आश्चर्यजनक चीज़ नोटिस की.

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व्यस्त और मस्त

वह कहते हैं, "हममें से जिन लोगों ने अपने शोध-प्रबंध तीन से 13 साल में पूरा करने की जगह एक या दो साल में ही पूरे कर लिए, वे अपनी ज़िंदगी में दूसरों से ज़्यादा व्यस्त थे."

"हम रिश्ते में थे, सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे. मैं तो 40-घंटे प्रति सप्ताह की नौकरी भी करता था."

थीसिस लिखने के दौरान वह हर दूसरे वीकेंड पर स्कीईंग के लिए भी जाते थे, क्योंकि "उस साल बहुत बर्फ़ गिरी थी."

दूसरी ओर जो लोग अपनी थीसिस लिखने में जूझ रहे थे, वे बस यही काम कर रहे थे. उनकी ज़िंदगी बस काम ख़त्म करने के लक्ष्य में ही उलझी थी.

फ़ियर कहते हैं, "जो लोग दूसरी गतिविधियों में शामिल थे वे अपना दिन 30 से 60 मिनट पहले शुरू करते थे, कभी-कभी 90 मिनट पहले भी, क्योंकि हमें अपनी ज़िंदगी जीनी थी."

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गतिविधियों पर नियंत्रण

मामला नियंत्रण का है. लंच रद्द कर देने या जिम जाना स्थगित करके किसी एक काम में पूरी तरह लग जाने की जगह आप अपने समय को बांट सकते हैं.

अगर खाली समय और गतिविधियों की पूरी सूची आपके सामने हो तो आपको पता रहेगा कि काम के लिए आपके पास कितना समय है. फिर आपको बस इतना करना है कि शुरुआत करनी है.

बेशक दूसरा हिस्सा पहले से अधिक जटिल है. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि लोग टाल-मटोल क्यों करते हैं.

हम घंटों सोच-विचार में क्यों डूबे रहते हैं, जबकि हम तुरंत शुरुआत कर सकते हैं?

कैलिफोर्निया के ओकलैंड में रहने वाली मनोवैज्ञानिक जेन बुर्का ने साथी मनोवैज्ञानिक लेनोरा युएन के साथ मिलकर एक किताब लिखी है- "Procrastination: why you do it, what to do about it now".

इन दोनों मनोवैज्ञानिकों की मुलाकात बर्कले में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट काउंसिल सेंटर में हुई थी.

फ़ियर की तरह ही शिथिलता के मनोविज्ञान में इनकी रुचि छात्रों की मदद करते हुए जगी.

ये दोनों उन्हीं की तरह थे जिनकी इन्होंने मदद की थी. अपनी डॉक्टरेट थीसिस लिखने में इन्होंने भी संघर्ष किया था.

अपने शोध के दौरान इन मनोवैज्ञानिकों ने देखा कि देरी करने वालों में कई चीजें समान होती हैं.

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ग़लतियों से डरिए मत

समय के साथ उनका रिश्ता बड़ा ही अस्पष्ट और अवास्तविक होता है. साथ ही, वे ऐसा काम करना चाहते हैं जो अपने आप में संपूर्ण हो, कोई मीन-मेख न निकाल पाए.

अहम कार्यों को टाल देने की आदत की गहरी मनोवैज्ञानिक जड़ें हो सकती हैं.

बुर्का कहती हैं, "शिथिलता को समय का खराब प्रबंधन या आलस्य समझ लिया जाता है, जबकि ऐसा नहीं है."

बुर्का ने महसूस किया कि जो टालमटोल करते हैं उनका आत्म-सम्मान कम होता है.

"अगर आपने अपने सर्वोत्तम प्रयास करने में बहुत लंबा इंतज़ार किया है तो आपके सर्वश्रेष्ठ प्रयासों को आंका नहीं जा सकता."

निराशाजनक परिणाम के लिए शिथिलता को दोष देना आसान है, बजाय इसके कि आप मानें कि आपका सबसे बढ़िया प्रयास भी बहुत बढ़िया नहीं था.

अगर आपने आखिरी क्षणों में अच्छा काम कर लिया तो आप चहक उठेंगे कि आपने नामुमकिन को मुमकिन कर दिया है.

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बस 15 मिनट

साप्ताहिक योजना बना लेने के बाद बड़े और डराने वाले काम, जैसे टैक्स रिटर्न भरना, से खुद को दूर रखिए.

इसकी जगह सिर्फ़ 15 मिनट के लिए उस काम पर ध्यान दीजिए जो आपके हाथ में है. इतना समय निकालना आसान है. इससे लक्ष्य के प्रति बेचैनी दूर रखने में मदद मिलती है.

बुर्का कहती हैं, "प्रगति धीरे-धीरे होती है, न ही हरक्यूलियन प्रयास से."

फ़ियर को 15-मिनट के नियम वाला विचार तब आया था जब वह फोबिया से पीड़ित मरीजों का इलाज कर रहे थे.

वह कहते हैं, "शिथिलता का इलाज मैंने फोबिया की तरह किया. यह काम से आपका डर है."

"आप जिसे भी ख़तरनाक समझते हैं उससे बचने की कोशिश करते हैं. इससे उबरने के लिए हम टुकड़ों-टुकड़ों में इसका सामना करते हैं."

फ़ियर का कहना है कि मकड़ियों से डर को दूर करने का सबसे सही तरीका यह सोचना है कि मकड़ी आपसे 10 फीट दूर है. भागना इसका तरीका नहीं है.

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काम से मत भागिए

अब यह माना जाने लगा है कि शिथिल होकर काम बंद कर देना एक मानसिक स्वास्थ्य मुद्दा है.

रिसर्च ने दिखाया है कि काम रोक देने वाले लोगों में अवसाद और बेचैनी की समस्या होने की आशंका अधिक रहती है.

2014 के एक अध्ययन से पता चला था कि ADHD डिसऑर्डर के शिकार छात्र ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते और उनमें शिथिलता होने की आशंका अधिक रहती है.

यह भी कहा जाता है कि अगर मोज़ार्ट आज पैदा हुए होते तो उनके ADHD या टॉरेट सिंड्रोम से पीड़ित होने का पता चलता.

मोज़ार्ट के जीवनी लेखक ने लिखा है कि उनका ध्यान आसानी से भटक जाता था, जबकि उनकी बहन ने एक बार कहा था कि वह किसी "बच्चे की तरह" हैं.

स्पष्ट है कि इस महान संगीतकार को कई समस्याएं रही होंगी जिसके कारण वे आखिरी क्षणों तक काम लटकाकर रखते थे.

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सही शब्दों का चयन

अंत में फ़ियर उन शब्दों को बदलने की सलाह देते हैं, जिनसे आप अपने काम को जोड़ते हैं. जैसे "मुझे अवश्य करना चाहिए" या "मुझे करना है" की जगह "मैंने चुना है" का प्रयोग करें.

ऐसा करने से आपकी आंतरिक दुविधा ख़त्म हो जाती है कि आपको सोफे पर पड़े रहना है या काम पूरा करना है.

चुनने का काम सिर्फ़ इंसान कर सकते हैं. केवल मनुष्य ही सर्जरी कराने का विकल्प चुन सकते हैं या ग्रैजुएट कहां से करना है यह चुन सकते हैं.

तो अगली बार जब आप ख़ुद को बिना किसी मतलब के सोशल मीडिया चेक करते हुए पाएं या बड़े काम के डर से कोई छोटा और महत्वहीन काम करते हुए पाएं तो यह न सोचें कि मुझे काम के लिए ज़्यादा समय रखना चाहिए था या इसे मैं अभी ख़त्म कर लेता हूं.

इसकी जगह काम पर 15 मिनट लगाएं और फिर बाहर घूमने-फिरने निकल जाएं.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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