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घर में ज़्यादा रहते हैं तो ये कई परेशानियों की है जड़
- Author, फिलिप्पा फोगार्टी
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
19वीं सदी के स्कॉटिश-अमरीकी जॉन मुइर ने कभी लिखा था, "वनों में आइए क्योंकि आराम यहीं है." वे अमरीकी राष्ट्रीय उद्यानों के एक शुरुआती हिमायती थे.
मुइर ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा योसेमाइट और सिएरा नेवादा के राष्ट्रीय उद्यानों की खाक छानते हुए बिताया था. जीवन में स्वास्थ्य लाभ में प्रकृति के योगदान पर अपने विश्वास के बारे में उन्होंने काफी कुछ लिखा था : "हर व्यक्ति को रोटी के साथ-साथ सुंदरता भी चाहिए, खेलने और इबादत के ऐसे स्थान भी चाहिए जहां प्रकृति आपको स्वस्थ रख सके और आपके शरीर के साथ मन को भी ताक़त दे सके."
ऐसा लगता है कि मुइर को इसकी असलियत का भान हो गया था : इस बात के प्रमाण बढ़ते जा रहे हैं कि प्रकृति में समय बिताने से हम और अधिक स्वस्थ और सुखी बनते हैं.
यह एक कुछ ऐसी बात है जिसे लोग सहज रूप से अनुभव कर लेते हैं. लेकिन हम प्रौद्योगिकी से भटके हुए अपने काम में व्यस्त हैं और प्राकृतिक वातावरणों से दूर अक्सर शहरी माहौल में रहते हैं.
हम बहुत ज़्यादा घर से बाहर भी नहीं निकलते हैं : उदाहरण के लिए एक औसत अमरीकी अपने जीवन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा बंद दरवाजों के पीछे बिताता है.
लेकिन यदि हम प्रतिदिन एक घंटे का समय बाहर बितायें तो क्या बदलाव आएगा? क्या इससे कोई फ़र्क़ पड़ता है कि हम कहां जाते हैं और हमारी व्यस्त दिनचर्या से निकालकर कुछ समय बाहर बिताना जीवन में क्या महत्व रखता है.
प्रकृति आपके लिए क्या करती है?
बाहर घूमने-फिरने के कुछ फ़ायदे तो बड़े साफ़ हैं. आपको खड़े होकर चलना-फिरना पड़ेगा, ये विशेष रूप से तब लाभकारी है जब आपके दिन का अधिकांश हिस्सा किसी स्क्रीन के सामने बीतता है.
शोध से पता चलता है कि काम से कुछ समय अलग रहने पर काम में आपका मन अधिक लगता है और प्राकृतिक रोशनी में की गई कुछ चहल-कदमी आपको विटामिन डी दे जाती है.
आप जिस तरह के खुले वातावरण में बाहर निकलते हैं वो भी महत्व रखता है : शहर की व्यस्त सड़कों से कहीं अधिक फ़ायदेमंद हरियाली भरे रास्ते या समंदर का किनारा होगा.
अब तक तो सब कुछ अच्छा ही लग रहा है. लेकिन शहरी और प्राकृतिक वातावरण में होने वाली हमारी प्रतिक्रियाओं के बढ़ते हुए तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि आप जिस तरह के खुले वातावरण में बाहर निकलते हैं वो भी महत्व रखता है: शहर की व्यस्त सड़कों से कहीं अधिक फ़ायदेमंद हरियाली भरे रास्ते या समंदर का किनारा होगा.
कनाडा की ट्रेंट यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग की असोसिएट प्रोफ़ेसर लीजा निस्बत बताती हैं, "शोध आमतौर पर ये बताते हैं कि जब लोग प्राकृतिक वातावरण और प्राकृतिक भू-दृश्यों के सम्पर्क में रहते हैं तो उन्हें तनाव भी कम होता है. जब आप कुदरत की गोद में खेलते हैं तो आपका रक्तचाप भी कम होता है और हृदयगति और मूड यानी मनोदशा बेहतर होती है."
वे आगे बताती हैं कि कुदरत के नजदीक रहने के मनोवैज्ञानिक फ़ायदों पर भी काफ़ी काम किया गया है. आमतौर पर लोग प्रकृति की गोद में प्रसन्न रहते हैं. ख़ुशी एक बहुत व्यापक अवधारणा है और हम सकारात्मक और नकारात्मक भावनाओं से इसके बारे में जानते हैं- लोग कितने जीवंत और ऊर्जा भरे हैं और अपने जीवन में वे कितने संतुष्ट हैं.
वे कहती हैं, "जब लोग प्राकृतिक स्थानों, भले ही वे शहरों में क्यों न हों, में रहते हैं तो सकारात्मक भावनाएं और जीवंतता बंद कमरों की अपेक्षा अधिक होती है."
1980 के दशक से ही यह विचार जोर पकड़ने लगा था कि प्रकृति हम सबके लिए अच्छी होती है. सबसे पहले यह प्रमेय सामने आया कि इंसानों में प्रकृति से जुड़ाव की एक अंदरूनी इच्छा होती है जिसे बायोफीलिया हाइपोथीसिस कहा गया.
इसके बाद जापानी अवधारणा शिनरिन-योकू प्रचलन में आई जिसका अर्थ है वनों के वातावरण को आत्मसात करने से आपको स्वास्थ्य लाभ होता है.
शिनरिन-योकू के शोधकर्ताओं ने बहुत सारे मनोवैज्ञानिक और शरीर क्रिया वैज्ञानिक लाभों की बात कही है जबकि दुनियाभर के अध्ययन ये बताते हैं कि प्रकृति में बिताए गए समय से हमें ध्यान करने की क्षमता में बढ़ोतरी, रचनात्मकता में बढ़ोतरी, अवसाद में कमी और लंबी उम्र का भी फ़ायदा मिलता है.
ये बात सत्य है कि हममें से बहुत सारे लोग शहरों में रहते हैं और जंगलों या प्राकृतिक स्थानों में हमारा आवागमन नहीं होता है. लेकिन निस्बत बताती हैं कि ज़रूरी नहीं कि जंगल में ही जाया जाए- बहुत सारे अध्ययनों में यह प्रमाणित किया गया है कि शहरों में बनाए गए हरे-भरे वातावरण से भी काफ़ी लाभ मिलता है.
पांच मिनट ही काफ़ी है
यूके की एसेक्स यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑप स्पोर्ट, रीहैबिलिटेशन एंड एक्सर्साइज़ साइंसेस के जो बार्टन "ग्रीन एक्सर्साइज़" पर शोध कर रही हैं. इसमें प्रकृति के साथ तालमेल रखते हुए कामकाज करने से स्वास्थ्य पर होने वाले फ़ायदों की जांच की जा रही है. एक अध्ययन में उन्होंने इस बात पर शोध किया कि मानसिक स्वास्थ्य में वृद्धि के लिए प्रकृति में "कितना समय" बिताना ठीक रहेगा.
यदि स्वाभिमान और मनोदशा की बात की जाए तो प्रकृति में बिताए गए पहले पांच मिनट में ही सबसे अधिक सुधार पाया गया.
आपको ऐसा लगेगा कि बाहर जितना समय बिताया जाए उतना बेहतर है. लेकिन 1252 प्रतिभागियों के एक अध्ययन में बार्टन ने पाया कि यदि स्वाभिमान और मनोदशा की बात की जाए तो प्रकृति में बिताए गए पहले पांच मिनट में ही सबसे अधिक सुधार पाया गया.
वे मानती हैं कि यह परिवर्तन हरे-भरे वातावरण में जाने के कारण आया होगा. वे कहती हैं, "प्रकृति में बिताए गए समय से निश्चित रूप से ध्यान केन्द्रित करने और ऊर्जा समेटने की स्वाभाविक क्षमता बढ़ जाती है."
बार्टन ने यह भी पाया कि इसमें मिले नतीजे लगभग हर जगह एक जैसे थे चाहे वो शहर का हरा-भरा माहौल हो, गांव हो या फिर जंगल में बिताया समय हो लेकिन यह भी पाया गया कि जल की मौजूदगी से और भी अधिक सुधार मिला. कुल मिलाकर किसी शहरवासी के लिए बात इतनी सी है कि घर से बाहर निकलें.
फ़िनलैंड के एक अध्ययन में खाने के वक़्त की गई कुछ गतिविधियों के आधार पर ऐसा ही पाया गया. इन अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने कुछ लोगों को पार्क में 15 मिनट तक टहलने के लिए कहा जबकि बाकियों को बंद कमरों में ही तनाव मुक्ति व्यायाम करने के लिए कहा गया.
यह काम वसंत और शिशिर ऋतु में दो हफ़्तों के लिए कराया गया. एक अन्य समूह को सामान्य भोजन समय जारी रखने के लिए कहा गया.
फ़िनलैंड के टैम्पियर यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर कलेवी कोर्पेला बताते हैं कि तनावमुक्ति कसरत जितना ही लाभकारी पार्क में टहलना भी था. पार्क में टहलने वाला प्रतिभागियों का समूह ज़्यादा तनाव मुक्त था.''
भोजनावकाश के बाद दोनों समूहों में ध्यान की क्षमता अधिक और तनाव कम पाया गया. अध्ययन में यह नतीजा निकाला गया कि दोनों ही गतिविधियों के बाद बाक़ी बचे दिन में काम बेहतर ढंग से किया जा सकता है.
प्रकृति को कम आंकना
लेकिन ऐसा लगता है कि यह बात सबके गले से नहीं उतर रही है. अमरीका में हाल में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि कार्यालय/ऑफिस में काम करने वाले 35 प्रतिशत कर्मचारी प्रतिदिन केवल 15 मिनट कार्यालय से बाहर बिताते हैं.
लीजर निस्बत बताती हैं कि इसके पीछे कुछ हद तक हमारी प्रकृति को समझने की समझ ज़िम्मेदार है. उन्होंने ओटावा की कार्लटन यूनिवर्सिटी में एक अध्ययन किया जिसमें विद्यार्थियों को शीत ऋतु में विश्वविद्यालय प्रांगण से बाहर जाने के लिए भूमिगत रास्ते का प्रयोग करना होता है.
प्रतिभागियों को भूमिगत रास्ते का प्रयोग करने या फिर एक नहर के किनारे बने रास्ते का इस्तेमाल करने का विकल्प दिया गया. निस्बत बताती हैं कि केवल 15 मिनट भी बाहर टहलने वाले लोग काफ़ी ख़ुश पाए गए.
लेकिन इससे यह सवाल उठा कि जब लोगों को अधिक फ़ायदा नहीं है तब भी लोग भूमिगत रास्ता ही क्यों प्रयोग करते हैं.
उन्होंने पाया कि लोगों ने जितना सोचा था उससे कहीं अधिक ख़ुशी उन्हें बाहर टहलने के बाद मिली. उनका मानना है कि यदि हम इसी को अपनी आदत बना लें तो यह हमारे जीवन का अहम अंग बन जाएगा.
टहलना और गप्प मारना
अब ऐसे नए-नए तरीक़े खोजे जा रहे हैं जिससे आप अपनी रोज़मर्रा की व्यस्त ज़िन्दगी भी कुदरत की गोद में बिता सकें. प्रौद्योगिकी कंपनियां तो रोज़ नए तरीके निकाल रही हैं : माइक्रोसॉफ्ट ने अपने कर्मचारियों को ट्रीहाउस मीटिंग एरिया बनाए हैं, एमेजॉन ने 800 कर्मचारियों की क्षमता वाले पौधों से भरे तीन गुंबद बनाये हैं जहां वे मनन-चिंतन कर सकते हैं. इन्हें द स्फेयर्स कहा गया है. अडोबे ने अपने लंदन कार्यालय की छत पर एक रनिंग ट्रैक बनाया है.
लेकिन विकल्प सस्ते भी हो सकते हैं. बार्टन कहती हैं कि खिड़कियों से बाहर यदि प्राकृतिक नजारा ख़ूबसूरत हो तो इससे उत्पादक और स्वास्थ्य दोनों में सुधार हो सकता है. कुछ कंपनियां यहीं करने की कोशिश कर रही हैं.
बार्टन यह भी कहती हैं कि बाहर निकलने की आदत हमें अपनानी ही होगी. चाहे इसके लिए अपने काम के स्थान से कुछ दूरी पर अपनी गाड़ी पार्क करना, हरे-भरे वातावरण से गुजरते हुए काम पर जाना या फिर पार्क में दोपहर का भोजन करना ही क्यों न शामिल हो.
यदि आपको इकट्ठा लंबा समय नहीं मिलता तो टुकड़ों में ही समय को बांटकर तनावमुक्त हुआ जा सकता है.
लंबी अवधि तक स्वास्थ्य लाभ के मामले में प्राकृतिक माहौल में व्यायाम करना आपके कामकाज़ के स्थान पर उपलब्ध हरियाली या प्राकृतिक परिदृश्य से कहीं ज़्यादा लाभकारी है.
इस संबंध में कोर्पेला ने पाया कि दो हफ़्ते तक किसी पार्क में टहलने जैसी गतिविधियां अल्पावधि के लिए फ़ायदेमंद होती हैं; दीर्घावधि के लिए यदि लाभ प्राप्त करना है तो इन गतिविधियों को आदत बनाना होगा.
लंबी अवधि तक स्वास्थ्य लाभ के मामले में प्राकृतिक माहौल में व्यायाम करना आपके कामकाज के स्थान पर उपलब्ध हरियाली या प्राकृतिक परिदृश्य से कहीं ज़्यादा लाभकारी है. लेकिन उनका यह भी मानना है कि लंबी अवधि या दीर्घावधि में तनाव एकत्र न हो इसके लिए अल्पावधि की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं.
जैसे भी देखें, यह बात तो स्पष्ट है कि प्रकृति की सोहबत आज के कंक्रीट युक्त आधुनिक जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है. जैसा कि जॉन मुइर ने कहा था : "प्रकृति से दोस्ती, ..........कभी-कभार उसकी गोद में खेलना........आत्मा को स्वच्छ बनाना."
(यह लेख बीबीसी कैपिटल की कहानी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. मूल लेख आप यहां पढ़ सकते हैं. बीबीसी कैपिटल के दूसरे लेख आप यहां पढ़ सकते हैं.)
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