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पासपोर्ट के बिना इस स्कूल में पढ़ना मुश्किल
- Author, सेबेस्टियन डियाज़
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
अमरीका के पिछले राष्ट्रपति चुनाव में डोनल्ड ट्रंप ने मेक्सिको सीमा पर दीवार बनाने का वादा किया था.
ट्रंप मेक्सिको से आने वाले मजदूरों को रोकना चाहते हैं. वह अब अमरीका के राष्ट्रपति हैं, लेकिन अभी तक उनकी योजना कामयाब नहीं हो पाई है.
सवाल है कि क्या मेक्सिको से सिर्फ़ मजदूर ही अमरीका आते हैं? जवाब है नहीं.
सरहद पार स्कूल
मेक्सिको के प्योर्तो पालोमस शहर की मेलानी फिगरोआ दूसरे बच्चों की तरह ही सुबह 7 बजे उठती है.
मेलानी स्कूल के लिए तैयार होती है. मम्मी को किस करने और छोटी बहन को गुडबाय बोलने के बाद वह अपने पिता के साथ स्कूल के लिए निकल पड़ती है.
मेक्सिको के लाखों बच्चे रोजाना यही रूटीन फॉलो करते हैं. लेकिन मेलानी उनसे अलग है.
स्कूल बैग, बॉटल और टिफिन के साथ-साथ मेलानी अपना पासपोर्ट भी साथ ले जाती है. क्लासरूम तक पहुंचने के लिए उसे पासपोर्ट की जरूरत होती है.
मेलानी कोलंबस एलीमेंट्री स्कूल जाती है, जो उसके घर से उत्तर दिशा में कुछ मील की दूरी पर है. घर और स्कूल के बीच मेक्सिको-अमरीका का बॉर्डर पड़ता है.
मेलानी पालोमस के उन सैकड़ों बच्चों में शामिल है जो रोजना सीमा पार करते हैं. वह कहती है, "हमारा परिवार हमेशा से पालोमस में ही रहा है. लेकिन मेरा और मेरी बहन का जन्म अमरीका में हुआ है. मुझे अमरीका के स्कूल जाना बहुत पसंद है."
'शिक्षा के हक़दार'
अमरीका के न्यू मेक्सिको स्टेट का कोलंबस एलीमेंट्री स्कूल अमरीका के दूसरे स्कूलों की तरह ही है. लेकिन इसमें और दूसरे स्कूलों में एक बड़ा अंतर भी है.
कोलंबस एलीमेंट्री में पढ़ने वाले 600 बच्चों में से 420 बच्चे अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके आते हैं. वे रोजाना बॉर्डर करते हैं ताकि अपने क्लासरूम तक पहुंच सकें.
मेलानी के पिता ब्रायन फिगरोआ कहते हैं, "पालोमस में बहुत से बच्चे हैं, जिनका जन्म अमरीका में हुआ है. यहां यह सामान्य बात है."
ब्रायन रोज सुबह अपनी बेटी को स्कूल छोड़ने बॉर्डर तक आते हैं. वे कहते हैं, "मेरी बेटियों का जन्म अमरीका में हुआ है. वहां के कानून के हिसाब से वे वहां मुफ्त शिक्षा पाने की हकदार हैं."
हर रोज़ कस्टम क्लियरेंस
मेलानी के पिता ब्रायन हर सुबह अपनी बेटी के साथ घर से निकलते हैं. वह अपनी कार मेक्सिको की सीमा में ही खड़ी करते हैं. वहां से वे दोनों पैदल चेक पोस्ट तक जाते हैं.
मेलानी कस्टम क्लियरेंस के लिए अपना पासपोर्ट गार्ड को देती है. क्लियरेंस मिलने के बाद दोनों चेकपोस्ट के दूसरी तरफ अमरीकी सीमा में दाखिल हो जाते हैं.
मेलानी की स्कूल बस पास के बस स्टॉप तक आती है. स्कूल बस आते ही मेलानी अपना पासपोर्ट पिता को दे देती है ताकि वह खो ना जाए.
बस से लगते हैं 15 मिनट
दूसरे कई बच्चे अपना पासपोर्ट साथ ले जाते हैं, क्योंकि उनके माता-पिता हर दिन उनके साथ चेकपोस्ट पार करके नहीं आ सकते.
स्कूल बस में बैठ जाने के बाद बच्चे की सारी जिम्मेदारी स्कूल की होती है. कई स्कूलों ने तो छात्रों का बीमा भी करा रखा है.
पहली बस सुबह 7.30 बजे खुलती है. आखिरी बस सुबह 8 बजे के करीब है. स्कूल बस 15 मिनट में ही बच्चों को स्कूल तक पहुंचा देती है.
मेलानी कहती है, "यह बहुत थकाने वाला होता है. हमें बहुत पैदल चलना पड़ता है. " लेकिन स्कूल पहुंचकर मेलानी अपनी थकान भूल जाती है, क्योंकि यह स्कूल उसे बहुत पसंद है.
ब्रायन को लगता है कि बेटी की यह मेहनत उसे कामयाबी के रास्ते पर ले जाएगी और उसका भविष्य सुनहरा होगा.
वह कहते हैं, "हम ऐसा इसलिए करते हैं, ताकि उसकी पढ़ाई अच्छी हो सके. वह अच्छी अंग्रेजी सीख सके."
मेक्सिको के स्कूलों में स्पेनिश में पढ़ाई होती है, जबकि अमरीकी स्कूलों में अंग्रेजी में पढ़ाई होती है. मेक्सिको में यह आम धारणा है कि अंग्रेजी की पढ़ाई में ही भविष्य है.
ब्रायन फिगरोआ कहते हैं, "हम सब मेक्सिको से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से पढ़ाई के बाद यहां संभावनाएं बहुत कम हैं. आपका बच्चा अगर जन्म से अमरीकी नागरिक है तो सम्मानजनक ज़िंदगी पर उसका हक है."
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)
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