खूबियां जिनसे आप टीम और खुद के लिए बेहतर साबित होते हैं

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- Author, एंडिस सोफियांसो, यूजेनियो पोर्टो और एल्डो रुस्तिचिनी
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
टीम में काम करने वाले ज़्यादातर लोग आपस में सहयोग करते हैं. एक-दूसरे की मदद करते हैं. इससे टीम का माहौल भी बेहतर होता है और काम भी अच्छा होता है.
आख़िर टीम के भीतर सहयोग की वजह क्या होती है? किस बिनाह पर लोग एक-दूसरे का हाथ बंटाते हैं? वो कौन सी ख़ूबियां होती हैं, जिनकी वजह से लोग अपने लिए भी बेहतर साबित होते हैं और टीम के लिए भी.
इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए कुछ नई रिसर्च हुई हैं. नतीजे बताते हैं कि अक़्लमंदी वो वजह है जो आपसी सहयोग को बढ़ाती है. टीम का भला करती है.
इससे पहले हुए कुछ तजुर्बे कहते थे कि इंसान में सहयोग की भावना और सामाजिकता की वजह से लोग ऐसा करते हैं. लोग एक-दूसरे से हमदर्दी रखते हैं. मदद करते हैं.
लेकिन, अब नई रिसर्च कहती हैं कि स्मार्ट लोग अक्सर टीम को बेहतर काम और सहयोग के लिए प्रेरित करते हैं. अक़्लमंद लोग अपने बर्ताव के नतीजों और नफ़ा-नुक़सान का अंदाज़ा लगा लेते हैं. इस आधार पर वो सहयोग की भावना को बढ़ावा देते हैं. अपनी बुद्धिमानी से वो ये काम बड़ी आसानी से करा लेते हैं.

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क़ैदियों वाला खेल
हाल ही में ब्रिटेन और अमरीका में एक तजुर्बा किया गया. इसमें 792 लोग शामिल हुए. इस रिसर्च में लोगों के बर्ताव से इस बात का जवाब तलाशना था कि वो आपस में सहयोग क्यों करते हैं.
इन लोगों को एक प्रिज़नर्स गेम खेलने को कहा गया. ये खेल ठीक वैसा ही है जैसे एक जुर्म के सिलसिले में दो लोग गिरफ़्तार किए जाएं. फिर दोनों से अलग-अलग पूछताछ की जाए. अगर उनमें से एक पूरे जुर्म का कच्चा-चिट्ठा खोल दे, तो उसे माफ़ी मिल जाएगी. और दूसरे को लंबी सज़ा होगी.
वहीं, अगर दोनों आरोपी मुंह बंद रखते हैं, तो सज़ा तो दोनों को होगी. मगर कम होगी. साथी का पर्दाफ़ाश करने वाले को तो छोड़ दिया जाएगा. मगर उसके साथी को तीन साल की क़ैद होगी. वहीं अगर दोनों मुंह बंद रखेंगे, तो दोनों को एक-एक साल की क़ैद होगी.
रिसर्च में शामिल लोगों को क़ैद की सज़ा के बजाय आपसी सहयोग पर इनाम में पैसे मिलने थे. यानी वो अगर ख़ुदग़र्ज़ी से खेलते, तो एक को ज़्यादा फ़ायदा और दूसरे को ज़्यादा नुक़सान होता. वहीं आपसी सहयोग से खेलते तो दोनों को फ़ायदा होता. हालांकि कम होता.

देखा गया कि जिन लोगों की अक़्लमंदी ज़्यादा थी, उन्होंने आपस में सहयोग को तरजीह दी. वहीं कम अक़्ल वालों ने ख़ुदग़र्ज़ी को प्राथमिकता दी.
हालांकि रिसर्च ने ये भी बताया कि जो लोग अक़्लमंद हैं, वो हमेशा ही आपसी सहयोग में यक़ीन नहीं रखते. वो ऐसा तभी करते हैं, जब उन्हें इसके फ़ायदे साफ़ तौर पर आगे दिख रहे हों.
टीम में अगर अक़्लमंद और स्मार्ट लोग होते हैं, तो वो अच्छे काम के गुण दूसरों को भी सिखाते हैं. इससे पूरी टीम का काम बेहतर होता है.
रिसर्च से साफ़ है कि अगर किसी टीम में कुछ स्मार्ट लोग होते हैं, तो न सिर्फ़ वो ख़ुद अच्छा काम करते हैं. बल्कि, दूसरों को भी बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करते हैं.
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