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दुनिया भर में कैसे बेचा जा रहा है सेहत का फॉर्मूला?
- Author, एलिज़ाबेथ होटसन
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
तंदरुस्ती हज़ार नेमत है. अगर सेहत ठीक है तो सब ठीक है. अच्छी सेहत के लिए अच्छा खान-पान बहुत ज़रूरी है.
यूं भी आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर सजग हो गए हैं. हर कोई पतला-दुबला और फिट नज़र आना चाहता है.
शोध बताते हैं कि आपको स्वस्थ रखने का दावा करने वाले प्रोडक्ट के बारे में लोग इंटरनेट से सबसे ज़्यादा जानकारी हासिल करते हैं. पूरी दुनिया में आज जाने कितनी कंपनियां हैं, जो सेहतमंद रहने का फॉर्मूला बेचकर करोड़ों कमा रही हैं.
आख़िर फिट रहने के इस फ़ॉर्मूले के पीछे कौन सा विज्ञान काम करता है?
'मेहनत से हर कोई बचना चाहता है'
इतिहासकार और खान-पान पर रिसर्च करने वाले स्कॉलर लुइस फ़ॉक्सक्रॉफ़्ट कहते हैं कि सेहतमंदी का फ़ॉर्मूला बताने वाले उन्हीं चीज़ों के इस्तेमाल की सलाह देते हैं जो हमारे रोज़ के खान-पान का हिस्सा होती हैं.
लेकिन फॉर्मूले के मुताबिक़ इनके खाने का समय और इस्तेमाल करने का तरीक़ा बदल जाता है. कसरत, जिसे हम अक्सर फ़रामोश करते हैं, वो दिनचर्या का ज़रूरी हिस्सा बन जाती है.
दिलचस्प बात ये है कि पतला-दुबला फिट तो हर कोई नज़र आना चहता है लेकिन इसके पीछे की मेहनत से हर कोई बचना चाहता है. इसके लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, अपने खाने पर नियंत्रण रखना, जो कि किसी के लिए भी सबसे ज़्यादा मुश्किल काम है.
एशियाई लोगों के लिए तो ख़ास तौर से ये कड़ी मेहनत वाला काम है.
भारत में ही देख लीजिए हर राज्य में तरह-तरह के लज़ीज़ पकवान बनाए जाते हैं. जो कि ज़्यादातर मैदे से बने होते हैं और तले-भुने होते हैं. इन खानों की ख़ुशबू ही भूख और लालच को बढ़ा देती है. इन्हें खाने में कोई बुराई नहीं अगर कम मात्रा में खाया जाए.
ज़ायक़े पर काबू पाना मुश्किल
लेकिन, जब ज़ुबान पर ज़ायक़ा चढ़ जाता है तो क़ाबू करना मुश्किल हो जाता है. लोगों की इसी कमज़ोरी को सेहत का फ़ॉर्मूला बेचने वाली कंपनियों ने पकड़ लिया है.
ये कंपनियां देसी चीज़ों से कई तरह के टॉनिक तैयार कर रही हैं. इनमें शरीर के लिए ज़रूरी सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं. इन्हें इस्तेमाल करना भी आसान होता है. इससे भूख भी काबू में रहती है. अक्सर खिलाड़ी भी इन उत्पादों का भरपूर इस्तेमाल करते हैं.
हर कोई लंबी और सेहतमंद ज़िंदगी जीना चाहता है. इस ख़्वाहिश का होना कोई बुराई भी नहीं है. लोगों की ये ख़्वाहिश बाज़ार भी दबाव बना रही है. बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए तरह-तरह की रिसर्च की जा रही हैं. हर हफ़्ते बाज़ार में एक नया प्रोडक्ट उतारा जा रहा है.
हाल ही में लंदन में एक लाइफ़स्टाइल शो आयोजित हुआ. इसमें क़रीब बीस हज़ार लोगों ने शिरकत की. वेलनेस प्रोडक्ट पर रिसर्च करने वाले बहुत से लोग इसमें शामिल हुए.
बाज़ार रखता है पूरा ख़्याल
यहां 'कम्बोचा' नाम की एक हेल्थ-ड्रिंक काफ़ी चर्चित हुई. मूल रूप से ये चीन का पेय-पदार्थ है, जो क़रीब दो हज़ार साल पुराना है. ये सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद माना जाता है. लेकिन नई कंपनियों ने इस पर रिसर्च और कुछ बदलाव करके नई शक्ल में बाज़ार में उतार दिया है.
बाज़ार अपने ख़रीदारों की हर पसंद और नापसंद का पूरा ख़्याल रखता है. मांसाहार में मोटापा लाने वाले तत्व ज़्यादा पाए जाते हैं. लेकिन जो लोग मांसाहार के शौक़ीन है उनके लिए इसे छोड़ना आसान नहीं होता.
लिहाज़ा कुछ कंपनियां ऐसे सॉसेज तैयार कर रही हैं जिनमें ग्लूटेन नहीं है. आम-तौर पर माना जाता है कि ग्लूटेन सेहत के लिए अच्छा नहीं है. इसीलिए लोग इससे बचना चाहते हैं. लोगों के इसी डर को कंपनियों ने समझ लिया है और वो लोगों को इस डर से आज़ाद कराने वाली चीज़ें बनाकर बेच रही हैं.
अच्छी सेहत पाना इतना मुश्किल काम भी नहीं है. अलबत्ता थोड़ी मेहनत की दरकार है. सेहतमंद रहने की पहली शर्त है आप जो भी खाएं वो साफ़ हो, ताज़ा हो.
किसी भी चीज़ की अति हर लिहाज़ से नुक़सानदेह है. लिहाज़ा ज़रूरत के मुताबिक़ ही खाएं. ज़ायक़े के लालच में ज़्यादा ना खाएं. कसरत सेहत का मूल मंत्र है, उसका ख़ास तौर पर ख़्याल रखें.
(मूल लेख अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)
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