किन देशों में हो रही है नागरिकता की नीलामी?

किसी देश की नागरिकता, या तो वहां पैदा होने पर मिलती है, या फिर वहां बस जाने पर. बसने वाले को कई शर्तें पूरी करने पर नागरिकता मिलती है.

मगर इन दिनों दुनिया भर में नागरिकता नीलाम हो रही है. इसकी बोलियां लगाई जा रही है. कई ऐसे देश हैं जो अपनी नागरिकता को ऊंची क़ीमत पर बेचते हैं.

ये जानकर आप यक़ीनन हैरान होंगे. कहां तो आपको अपने ही देश में अपना पासपोर्ट यानी नागरिकता का सबूत बनवाने के लिए धक्के खाने पड़ते हैं. और कहां, कई देशों में नागरिकता नीलाम हो रही है.

इसकी शुरुआत पिछली सदी के अस्सी के दशक में ही हो गई थी. 1984 में ब्रिटेन से आज़ाद होने के बाद कैरेबियन देश सेंट किट्स ऐंड नेविस ने इसकी शुरुआत की थी. एक ख़ास रक़म चुकाने पर आपको सेंट किट्स ऐंड नेविस का पासपोर्ट हासिल हो जाता था. इसके बाद कनाडा ने भी अपना पासपोर्ट एक कुछ शर्तो के साथ नीलाम करना शुरू किया.

नज़र विदेशी निवेश पर

नागरिकता की बोलियां लगाने का मक़सद अपने देश में विदेशी निवेश बढ़ाकर तरक़्क़ी करना था. जैसे सेंट किट्स ऐंड नेविस के ख़ूबसूरत सफ़ेद रेत वाले बीच किसको नहीं लुभाएंगे. वहां कौन नहीं बसना चाहेगा.

इसी क़ुदरती ख़ूबसूरती की बिनाह पर सेंट किट्स ऐंड नेविस ने लोगों को न्यौता दिया कि वो एक ख़ास रक़म उस देश में निवेश करें, तो उन्हें वहां की नागरिकता मिल जाएगी.

नब्बे के दशक में ब्रिटेन और अमरीका जैसे देशों ने भी एक ख़ास क़ीमत पर नागरिकता देनी शुरू की. मसलन अमरीका मोटे असामियों को EB-5 यानी इन्वेस्टर वीज़ा देता है. इसके तहत लोगों को अमरीका में कुछ ख़ास ठिकानों पर निवेश करना होता है, ताकि वहां रोज़गार को बढ़ावा मिल सके.

हर देश की नागरिकता हासिल करने की कुछ ख़ास शर्तें होती हैं. जैसे, अमरीका में आपको इसके लिए कम से कम पांच लाख डॉलर ख़र्च करने होते हैं. वहीं ब्रिटेन में निवेश के लिए नागरिकता हासिल करने की क़ीमत क़रीब 25 लाख डॉलर है.

न्यूज़ीलैंड इसी के लिए 15 लाख डॉलर रक़म वसूलता है. तो सेंट किट्स ऐंड नेविस और डोमिनिका जैसे कैरेबियाई देश पचास हज़ार से एक लाख डॉलर तक के निवेश पर आपको अपने यहां का नागरिक बनने का प्रमाणपत्र दे देते हैं.

ग्रीन कार्ड की चाहत

दुनिया में मची सियासी उथल-पुथल की वजह से दूसरे देशो की नागरिकता हासिल करने की होड़ सी लग गई है. ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन छोड़ने के बाद ब्रिटिश नागरिक पहली बार दूसरे देश की नागरिकता के बारे में पड़ताल करते देखे गए. वहीं, अमरीका की नागरिकता या ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए पूरी दुनिया में वैसे भी होड़ लगी रहती है.

नागरिकता आम तौर पर बड़े निवेशक ख़रीदते हैं. वो कई देशों निवेश करना चाहते हैं. सेंट किट्स ऐंड नेविस जैसे देशों में टैक्स की रियायतों का फ़ायदा उठाना चाहते हैं. या फिर, अमरीका जैसे अमीर देश में निवेश कर अपनी पूंजी को तेज़ी से बढ़ाना चाहते हैं.

अमरीका का EB-5 वीज़ा प्रोग्राम तो इतना लोकप्रिय है कि अक्सर इसके लिए भारी तादाद में अर्ज़ियां लगती हैं. अमरीका साल में दस हज़ार EB-5 वीज़ा जारी करता है. लेकिन हर एक वीज़ा के लिए कम से कम 23 हज़ार अर्ज़ियां लगती हैं.

तुर्की ने चीन को पछाड़ा

आज से दस-पंद्रह साल पहले तो चीन के नागरिक निवेश के ज़रिए नागरिकता ख़रीदने में सबसे आगे थे. मगर इस सेक्टर में काम कर ही यूरोपीय कंपनियां बताती हैं कि इन दिनों तुर्की से बड़ी तादाद में लोग दूसरे देशों की नागरिकता हासिल करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.

इसी तरह भारत, वियतनाम जैसे देशों के नागरिक भी दूसरे देशों में निवेश के ज़रिए नागरिकता हासिल करने की होड़ में आगे बढ़ रहे हैं.

आज की तारीख़ में साइप्रस से लेकर सिंगापुर तक क़रीब 23 ऐसे देश हैं जो निवेश के बदले में नागरिकता देते हैं. यूरोपीय यूनियन के आधे सदस्य ऐसा कोई न कोई कार्यक्रम चलाकर निवेशकों को अपने यहां पैसे लगाने के लिए लुभाते हैं.

नागरिकता की नीलामी कई देशों के लिए बेहद फ़ायदेमंद साबित हुई है. मसलन, सेंट किट्स ऐंड नेविस ने इसकी मदद से क़र्ज़ का बोझ उतारा और तेज़ी से तरक़्क़ी की है. इसी तरह अमरीका को हर साल EB-5 वीज़ा से क़रीब 4 अरब डॉलर का मुनाफ़ा होता है.

क़ारोबारियों के विकल्प

इसी वजह से यूरोप में लैटविया जैसे देश तो पचास हज़ार डॉलर में नागरिकता दे रहे हैं. वहीं फ्रांस में बसने के लिए आपको एक करोड़ डॉलर ख़र्च करने पड़ेंगे. हर देश के लिहाज़ से नागरिकता की शर्तें भी बदलती हैं.

मसलन, कैरेबियाई देशों में तो आप कम पैसे लगाकर नागरिकता हासिल कर सकते हैं. इससे आपको टैक्स में भी रियायत मिलेगी. साथ ही, आपको उस देश में वक़्त गुज़ारने की शर्त भी नहीं पूरी करनी होगी.

वहीं अमरीका में आपको कारोबार, रियल्टी सेक्टर या दूसरे धंधे में निवेश का मौक़ा मिलता है. फ्रांस में आप एक करोड़ डॉलर की रक़म ख़र्च करके रहने और काम करने की सुविधा हासिल कर सकते हैं.

आज की तारीख़ में जब तमाम देश अपने दरवाज़े बंद करते जा रहे हैं, तो नागरिकता को ख़रीदकर बड़े कारोबारी अपने विकल्प खुले रखना चाहते हैं. ताकि उनके पास कारोबार के नए मौक़े मौजूद रहें. या किसी एक देश में उथल-पुथल बढ़ने पर वो दूसरे देश में जाकर धंधा कर सकें.

ब्रिटेन में ब्रेग्ज़िट के बाद से ज़बरदस्त हड़कंप मचा हुआ है. बहुत से लोग न्यूज़ीलैंड, कनाडा या जर्मनी जाकर बसने के विकल्प तलाश रहे है. अमरीका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद कई कारोबारी दूसरे देशों के पासपोर्ट हासिल करने की फिराक़ में हैं.

ऐसे ही कारोबारी हैं, एंड्र्यू हेंडरसन. उनके पास आज की तारीख़ में चार देशों के पासपोर्ट हैं. वो अब पांचवां पासपोर्ट हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.

हेंडरसन कहते हैं कि कई देशो के नागरिक होने से उनके पास निवेश के ज़्यादा मौक़े होते हैं. वो कम टैक्स वाले देशों में कारोबार करके मुनाफ़ा बढ़ा सकते हैं. हेंडरसन मानते हैं कि आज दुनिया घुमंतू होती जा रही है. लोग किसी एक जगह टिककर नहीं रहना चाहते.

बोली लगाने का विरोध

ऐसे में नागरिकता को नीलाम करने वाले देश उनके लिए अच्छे मौक़े मुहैया करा रहे हैं. वैसे बहुत से लोग नागरिकता की बोली लगाने का विरोध करते हैं. अमरीका में इसी साल दो सीनेटरों ने EB-5 वीज़ा कार्यक्रम रद्द करने के लिए बिल पेश किया था.

विरोधी ये भी कहते हैं कि ऐसी योजनाएं अमीरों के लिए ही फ़ायदेमंद हैं. आम नागरिकों को तो इसका फ़ायदा होने से रहा. इसकी आड़ में कई लोग मनी लॉन्डरिंग या हवाला कारोबार जैसे अपराध भी करते हैं, कई लोग इसकी आड़ में उन देशों में पनाह हासिल कर लेते हैं, जहां बसने की उन्हें आम तौर पर इजाज़त नहीं मिलती.

इन आरोपों में काफ़ी हद तक सच्चाई भी है. इसी महीने अमरीकी जांच एजेंसी एफबीआई ने EB-5 वीज़ा कार्यक्रम के तहत 5 करोड़ डॉलर के घोटाले का पता लगाया था इसमें चीन के निवेशक शामिल थे. इसी तरह अप्रैल में अमरीका के एक आदमी पर चीन के निवेशक के पैसे को अपने ऊपर उड़ाने का मुक़दमा दर्ज हुआ था.

सेंट् किट्स ऐंड नेविस के कार्यक्रम के ज़रिए ईरानी नागरिकों के हवाला के कारोबार करने का भी पता चला था.

हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद के नाम पर चीन के निवेशकों को झांसा देकर फंसाने का भी एक मामला सामने आया था. ये मामला भी EB-5 वीज़ा से जुड़ा था.

लेकिन, उम्मीद यही है कि जैसे-जैसे कुछ देश अपने दरवाज़े बाक़ी दुनिया के लिए बंद करेंगे, दूसरे देश इस चुनौती को नागरिकता नीलाम करने अपने लिए मौक़ों में तब्दील करेंगे.

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