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बीमार होने पर छुट्टी लेने से कतराते हैं लोग
- Author, एलिसन बिराने
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
कई बार ऐसा होता कि आप सोकर उठें और सिर भारी लगने लगे, हाथ-पैर में दर्द हो, हल्का बुखार हो और ठंड लग रही हो. बिस्तर छोड़ने की आपकी हिम्मत नहीं हो रही हो. आपके ज़हन में ख़्याल आता है कि दफ़्तर फ़ोन करके कह दूं कि आज तबीयत ठीक नहीं, नहीं आ पाएंगे.
लेकिन, आप करते इसका ठीक उलट हैं. ख़ुद को ज़बरदस्ती घसीटकर बिस्तर से उठाते हैं. तैयार होते हैं. दफ़्तर पहुंच जाते हैं. वहां भी बेमन से काम करते हैं. जबकि अगर आप घर पर रहकर आराम कर लेते तो शायद अगले दिन दफ़्तर में बेहतर ढंग से काम कर पाते.
आख़िर ऐसा क्यों होता है कि आप बीमारी की छुट्टी लेने से कतराते हैं? कहने में संकोच होता है.
'ख़ुद से ज़बरदस्ती'
इसकी कई वजहें होती हैं. बॉस का डर, नौकरी की फिक्र, ज़्यादा काम करने का माहौल या साथियों से मुक़ाबले का दबाव वग़ैरह. इसीलिए लोग अच्छा महसूस नहीं करने पर भी ख़ुद से ज़बरदस्ती करते हैं. बीमार होने पर भी दफ़्तर जाते हैं. कई बार तो लोग बीमारी की हालत में भी ऑफ़िस इसलिए जाते हैं ताकि लोगो को यक़ीन दिला सके कि वो वाक़ई बीमार हैं. अगर आप ऐसा लगातार करते रहे हैं, तो आप ऐसा करने वाले अकेले नहीं हैं.
पूरी दुनिया में लोग बीमार होने पर छुट्टी लेने में संकोच करते हैं. बीमारी की हालत में भी ऑफ़िस जाते हैं. आज जबकि बहुत से लोगों के पास घर से काम करने का विकल्प मौजूद है. फिर भी तबीयत ख़राब होने के बावजूद ऐसे लोग दफ़्तर चले जाते हैं. जब इस बारे में लोगों से सवाल किया गया, तो कमोबेश वही जवाब आए, जो शायद हम-आप देते रहे हैं.
जैसे कि ब्रिटेन के रहने वाले जॉन स्टोक्स कहते हैं कि वो जब भी बीमार होने पर छुट्टी लेते हैं तो उनके दफ़्तर से एचआर का मेल आता है कि आप बार-बार काम से ग़ायब हो रहे हैं. ये आपको नुक़सान पहुंचाता है. एचआर के नियमों की वजह से लोग बीमार होने पर छुट्टी लेने में संकोच करते हैं. जॉन स्टोक्स बताते हैं कि अगर तबीयत ख़राब होने पर उन्हें छुट्टी लेनी होती है तो कई बार वो अपनी दूसरी छुट्टियों को इस्तेमाल करते हैं. ताकि ये न लगे कि वो बार-बार बीमार पड़ते हैं.
वहीं एक स्कूल में पढ़ाने वाली एबिगेल ब्राउनवेल कहती हैं कि उन्हें बीमारी पर छुट्टी लेना अच्छा नहीं लगता. क्योंकि फिर उनका काम उनके किसी साथी को करना पड़ेगा. वो अपने काम का बोझ अपने किसी साथी पर नहीं डालना चाहतीं. क्योंकि स्कूल में पढ़ाने का काम काफ़ी मेहनत वाला है.
वहीं, भारत के सौम्य प्रतीक झा ने कहा कि अगर वो बीमारी की वजह से छुट्टी ले लेते हैं, तो, उसके बाद के दिन उनके लिए बेहद मुसीबत भरे हो जाते हैं.
यहां तक कि ख़ुद डॉक्टर भी बीमार होने पर छुट्टी लेने में सकुचाते हैं. ब्रिटेन के इम्पीरियल अहमद एक डॉक्टर हैं. वो बताते हैं कि कई बार तो उन्होंने न्यूमोनिया होने पर भी ड्यूटी की. क्योंकि अगर वो छुट्टी लेते तो उनका काम किसी और को करना पड़ता. इसीलिए तबीयत ख़राब होने पर भी वो अपना काम करने गए.
आईटी सेक्टर समेत कई कंपनियों में अब घर से काम करने की आज़ादी है. इससे इन कंपनियों में काम करने वालो को सहूलत होती है. वो बीमार पड़ने पर घर से काम कर सकते हैं. वो इतने बीमार होते हैं कि दफ़्तर नहीं जा सकते. मगर, इतने भी बीमार नहीं होते कि घर से काम न कर सकें. जैसे कैरोलिना इब्रानिमट्कोवित्स. वो बीमारी में कई बार घर पर रहकर काम करती हैं. वो कहती हैं कि आज सबको तय वक़्त पर काम पूरा करना होता है. ऐसे में तबीयत ख़राब होने से काम पर असर पड़ता है. लोग डेडलाइन मिस नहीं करना चाहते. इसलिए घर से काम करने की सहूलत का फ़ायदा उठाते हैं.
लेकिन सभी को यह सुविधा नहीं...
लोरेना मरियान बताती हैं कि हर बार तबीयत ख़राब होने पर उन्हें दफ़्तर जाना पड़ता था. कई बार तो छुट्टी लेने के बाद उनके वीकली ऑफ रद्द कर दिए गए. इसीलिए लोरेना ने नौकरी ही छोड़ दी. वो बताती हैं कि एक बार उन्होंने बीमारी की छुट्टी ले ली. इसके बाद उनसे एक महीने तक बिना वीकली ऑफ के काम कराया गया. ये बात उनकी बर्दाश्त से बाहर की थी. आख़िर में लोरेना ने नौकरी छोड़ने का फ़ैसला किया.
कई बार होता यही है कि आप वाक़ई काम करने की हालत में नहीं हैं, मगर साथियों का दबाव आपको दफ़्तर आने को मजबूर करता है. ये हालात, आपकी सेहत और आपके करियर, दोनों के लिए ठीक नहीं.
(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी पर उपलब्ध है.)