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डट कर नाश्ता करेंगे तो दिन अच्छा रहेगा
- Author, अलीना डिज़िक
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
हम पैसा क्यों कमाते हैं? इसलिए कि दो वक़्त की रोटी खा सकें, ज़िंदगी की ज़रूरतों को पूरा कर सकें.
पैसे कमाने के लिए हम दिन-रात एक कर देते हैं. यहां तक कि वह मक़सद ही भूल जाते हैं जिसके लिए हम इतनी भाग दौड़ करते हैं. पेट की जिस आग को बुझाने के लिए सारे जतन किए जाते हैं, अपनी मसरूफ़ियत में हम उस पेट पर ही ज़ुल्म करते हैं. उसे दिन का पहला खाना यानी नाश्ता नहीं देते हैं.
हम किसी तरह दौड़ते-भागते ऑफ़िस पहुंच जाते हैं और बैल की तरह ख़ुद को काम में जोत देते हैं. लेकिन यह ग़लत है. बुज़ुर्गों का कहना है कि नाश्ता राजा की तरह करना चाहिए, यानी भर पेट पौष्टिक नाश्ता करना चाहिए.
दफ़्तर में अक्सर काम के दिन की शुरूआत मीटिंग से होती है, दिन भर का एजेंडा तय किया जाता है. इस मीटिंग में समय से पहुंचने के लिए ही लोग अक्सर सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं. नया चलन शुरू हुआ है.
अब समय बचाने के लिए ऑफिस में मीटिंग के दौरान ही नाश्ता परोसा जाने लगा है. यहां लोग काम की बातें भी करते हैं, नाश्ता भी करते हैं और अपना वक़्त भी बचाते हैं.
ऑफिस में काम करने वाले हरेक मुलाज़िम पर काम का दबाव बहुत ज़्यादा है, क्योंकि मुक़ाबला कड़ा है. हरेक कर्मचारी को वक़्त पर काम पूरा करके देना ही होता है. ऐसे में लंच या डिनर के लिए वक़्त निकालना भी मुश्किल हो जाता है.
प्रोडक्टिविटी एक्सपर्ट कहते हैं कि एक वक़्त में एक काम पर ही ध्यान दीजिए. जो लोग सुबह के नाश्ते की अहमियत जानते हैं, उनका मानना है कि अगर सुबह नाश्ता अच्छा किया जाए तो बिज़नेस के फ़ैसले करने में आसानी होती है.
सुबह के नाश्ते पर होने वाली मीटिंग का कितना फ़ायदा हो सकता है, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्रिटिश ऑनलाइन कंपनी 'फ्लूबिट' के संस्थापक बर्टी स्टीफ़न ने महज़ एक घंटे की ब्रेकफास्ट मीटिंग में एक दस लाख पाउंड की एक डील कर डाली.
स्टीफ़न मानते हैं कि दिन भर काम करने के बाद इंसान बहुत सी उलझनों में उलझ जाता है. इसका असर उसके फ़ैसले लेने की क़ुव्वत पर भी पड़ता है.
जो फ़ैसले दिन के आग़ाज पर नाश्ते की टेबल पर लिए जाते हैं, वे ज़्यादा असरदार होते हैं. उन फ़ैसलों तक लोग जल्दी पहुंच जाते हैं. सुबह लोगों का ज़हन ताज़ा दम होता है. लिहाज़ा, बेहतर फ़ैसला लेने की सलाहियत भी बढ़ जाती है.
नाश्ते की टेबल पर मीटिंग करने का एक और फ़ायदा होता है. सुबह मीटिंग के लिए वक़्त निकालना दिन के किसी और हिस्से में समय निकालने के मुक़ाबले आसान होता है. कई बार आप व्यस्त होते हैं तो मीटिंग रद्द होने की संभावना बढ़ जाती है. दिन चढ़ने के साथ ही इंसान दीगर कामों में उलझ जाता है.
बहुत सी बिज़नेस डील करने में सुबह की मीटिंग काफ़ी मुफ़ीद साबित होती हैं. लेकिन बहुत सी मीटिंग ऐसी भी होती हैं जो दिन के किसी और हिस्से में की जाएं तो बेहतर होंगी. दरअसल मीटिंग किसी भी तरह के पेशेवर रिश्ते को मज़बूत करने में मज़बूत जोड़ का काम करती हैं. इसलिए इनका वक़्त बहुत सोच समझकर रखना चाहिए.
न्यूयॉर्क स्थित एक कंपनी की संस्थापक जोआना लाऊ कहती हैं कि सुबह की मीटिंग जल्द ख़त्म करने के लिए अच्छी तैयारी ज़रूरी है. मीटिंग में जाने से पहले हरेक छोटी से छोटी चीज़ को नोट कर लीजिए. हरेक तरह के सवाल के जवाब के लिए ख़ुद को तैयार कर लीजिए.
जिसके साथ आप मीटिंग करने वाले हैं, अगर उन्हें भी इस बात का इल्म रहे कि मीटिंग कितनी देर में ख़त्म होगी तो उसके लिए भी फ़ैसले करने में आसानी होगी.
अगर आप आने-जाने में लगने वाले टाइम को भी बचाना चाहते हैं, तो, बेहतर है कि आप किसी ऐसे रेस्टोरेंट को चुनें, जहां आप दोनों के लिए मिलना आसान हो. साथ ही यहां बैठने के लिए बेहतर इंतज़ाम हो और आपके कहने के साथ ही आपका ऑडर आपकी टेबल पर आ जाए. आपको इंतज़ार ना करना पड़े.
एक और अहम बात ये है कि वहां वाई-फ़ाई का माक़ूल इंतज़ाम हो ताकि ज़रूरत पड़ने पर आप उसका इस्तेमाल कर सकें.
कुछ मीटिंग रात के खाने पर भी की जाती हैं. यह वह वक़्त होता है जब इंसान अपने आस पास सुकून चाहता है. इसलिए जो लोग होटल में ठहरते हैं और वहीं पर मीटिंग करना चाहते है तो वे होटल की लॉबी को सुबह की मीटिंग के लिए माक़ूल समझते हैं.
होटल मालिकों का कहना है कि ऐसे ग्राहकों की तादाद बढ़ती जा रही है जो उनके होटल की लॉबी में बिज़नेस मीटिंग करना चाहते हैं.
बहरहाल, जिस तरह से काम करने के तरीक़े और बिज़नेस का मिज़ाज बदल रहा है, उसी तरह मीटिंग करने के तरीक़े भी बदल रहे हैं.
हालांकि अभी भी मीटिंग के पुराने तरीक़े ही ज्यादा चलन में हैं, लेकिन नाश्ते पर मीटिंग का चलन भी अब अपनी जगह बनाता जा रहा है. इससे एक तो समय बचता है, आपका पेट भी खाली नहीं रहता और फ़ैसले भी मुनासिब होते हैं.