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तंबाकू का विरोध, लेकिन चमक रहा है सिगार
- Author, विक्रम बारहाट
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
पूरी दुनिया में इस वक़्त स्मोकिंग या धूम्रपान के ख़िलाफ़ मुहिम तेज़ है. सार्वजनिक जगहों पर स्मोकिंग पर पाबंदी लगती जा रही है.
दफ़्तरों में स्मोकिंग ज़ोन बनाए जा रहे हैं. तंबाकू विरोधी लॉबी, पूरी दुनिया की सोच पर हावी होती जा रही है.
फिर भी स्मोकिंग के कुछ शौक़ीन ऐसे हैं जिनका शौक़ ख़ूब फल-फूल रहा है. ये शौक़ है सिगार का. हाथ से बने क्यूबा के सिगार पूरी दुनिया के रईसों के बीच मशहूर हैं.
लोग क्यूबा के सिगार को रखना और पीना शानो-शौक़त की निशानी मानते हैं. तंबाकू की पूरी दुनिया में मुख़ालफ़त के बावजूद सिगार का धंधा बड़ी तेज़ी से चमक रहा है.
सिगार की ऐसी ही शौक़ीन हैं बेल्जियम की डोमिनिक गाइज़ेलिंक. डोमिनिक ने पहला सिगार साल 2001 में अपने पति के साथ पिया था. उसके बाद ये उसकी फ़ैन बन गईं.
2011 में जब उन्होंने ख़ुद से ख़रीदा हुआ हवाना के सिगार का डिब्बा खोला तो डोमिनिक को ये सिगार इकट्ठा करने और उसके कारोबार का शौक़ हो गया.
अब डोमिनिक एक ख़ास सीरीज़ के सिगार ही ख़रीदती है. जो हाथ से बने होते हैं. आज डोमिनिक के पास डेढ़ लाख बढ़िया क्वालिटी के सिगार हैं. इनमें से कुछ तो बहुत पुराने हैं.
डोमिनिक ने बेल्जियम के अलग-अलग शहरों में पांच सिगार स्टोर खोल रखे हैं. वो इस कारोबार में अब तक क़रीब चौंतीस लाख डॉलर का निवेश कर चुकी हैं.
उनके पास क्यूबा में बने उस दौर के सिगार भी हैं जो, क्यूबा पर अमरीकी पाबंदी लगने से पहले बने थे. डोमिनिक के पास सिगार का जो ख़ज़ाना है उसकी क़ीमत क़रीब 56 लाख अमरीकी डॉलकर आंकी जाती है.
आज पूरी दुनिया में सिगार के शौक़ीनों की तादाद बढ़ रही है. फ्लोरिडा में सिगार कंपनी चलाने वाले रॉकी पटेल कहते हैं कि पहले सिर्फ़ गिने-चुने लोग ही इसका शौक़ रखते थे.
मगर, आज बहुत से लोग हैं जो हाथ से बने सिगार पीना पसंद करते हैं. उसके लिए मोटी रक़म ख़र्च करने को राज़ी हैं.
पहले, अमरीका ही क्यूबा के सिगार का सबसे बड़ा बाज़ार था. मगर आज चीन, जापान, हांगकां, सिंगापुर, मकाऊ और ऑस्ट्रेलिया में इसके तमाम शौक़ीन हैं.
हालांकि लंदन में सिगार कंपनी चलाने वाले मिशेल ओर्चैंट कहते हैं कि अभी भी सिगार का सबसे बड़ा बाज़ार यूरोप ही है. इसके बाद पूर्वी एशियाई देशों का नंबर आता है.
मिशेल ओर्चैंट कहते हैं कि बहुत से लोग सिगार को निवेश का ज़रिया मानते हैं. महंगे दाम पर सिगार ख़रीदकर रखते हैं. वक़्त आने पर उन्हें ऊंची क़ीमत पर बेचकर मुनाफ़ा कमाते हैं.
क्यूबा में सिगार बनाने की एक सीमा है. जबकि मांग उससे ज़्यादा. इस वजह से इसकी क़ीमत बढ़नी तय है. ओर्चैंट मानते हैं कि जैसे ही अमरीका, क्यूबा पर से आर्थिक पाबंदियां हटाएगा, क्यूबा के सिगार के दाम और तेज़ी से बढ़ेंगे.
हालांकि कुछ लोग ये भी कहते हैं कि आज क्यूबा के सिगार से बेहतर सिगार दूसरे देशों में बनने लगे हैं.
मुंबई में सिगार के कारोबारी और शौक़ीन, डैनी कैरोल कहते हैं कि निकारागुआ, होंडुरास, डोमिनिकन रिपब्लिक और पेरू में भी ऊंचे दर्जे के सिगार बन रहे हैं. डेविडॉफ, फुएंट और पैड्रॉन जैसे बड़े ब्रांड के सिगार अब इन्हीं देशों में बनते हैं.
ऊंचे दर्जे के सिगार की क़ीमत बढ़ने की दो वजह होती हैं. वो कम तादाद में बनते हैं. साथ ही वक़्त बीतने के साथ ही उनका स्वाद बेहतर होता जाता है. ये सिगार बेहद महंगे होते हैं.
हाल ही में 100 गुरखा सिगारों का एक डिब्बा 6 लाख 58 हज़ार डॉलर में बिका था. इसे गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह मिली थी.
गुरखा सिगार, मध्य अमरीकी देश निकारागुआ में बनाए जाते हैं. इन्हें सिगार की दुनिया का रॉल्स रॉयस कहा जाता है. हॉलीवुड सितारे ब्रैड पिट, मैथ्यू मैक्कोने और पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन इसके मशहूर शौक़ीनों में शुमार हैं.
वैसे डोमिनिकन रिपब्लिक और अमरीका में बनने वाले सिगारों की आज बाज़ार में अच्छी ख़ासी तादाद मौजूद है. मगर लोग अभी भी क्यूबा में बने सिगार को ही ज़्यादा पसंद करते हैं.
डनहिल, डेविडॉफ, कोहिबा, पार्टागास, मोंटेक्रिस्टो ब्रांड के क्यूबन सिगार की ज़्यादा मांग है. डनहिल और डेविडॉफ ब्रांड के सिगार तो पिछले 25 सालों से क्यूबा में नहीं बने हैं. इसलिए वो बाज़ार में बहुत कम उपलब्ध हैं.
मिशेल ओर्चैंट ने दस डनहिल रोमियो-जूलिएटा सिगार को 1703 डॉलर या क़रीब सवा लाख प्रति सिगार की दर से नीलाम किया था.
ऐसे बहुत पुराने सिगार को लोग नमूने के तौर पर भी रखते हैं. जैसे पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल की एक अधजली चुरुट हाल ही में क़रीब छह हज़ार डॉलर या चार लाख रुपए में नीलाम हुई.
बहुत पुराने, बमुश्किल मिलने वाले सिगार, हर जगह मिलते भी नहीं. उनके लिए आपको मिशेल ओर्चैंट या डैनी कैरोल जैसे लोगों की कंपनी को तलाशना होगा या फिर सोदबी जैसी नीलाम कंपनी के दुर्लभ सिगार की नीलामी करने का इंतज़ार करना होगा.
बहुत सी कंपनियां, शौक़ीन लोगों को अपनी फैक्ट्रियों में ले जाती हैं. ताकि उनकी ख़ास पसंद के सिगार वो ख़ुद बना सकें. गुरखा सिगार बनाने वाली कंपनी अक्सर ऐसा करती है.
पुराने सिगार को सहेजकर रखने की ज़रूरत होती है. इसके डिब्बे भी ख़ास तरह के होते हैं. जिनमें 23 डिग्री सेल्सियस तापमान में 67 से 72 फ़ीसद नमी के माहौल में सिगार को सुरक्षित रखा जाता है, ताकि ये ख़राब न हों. वरना पूरा निवेश बेकार जाएगा.
जो लोग ये रिस्क नहीं लेना चाहते, उनके लिए बहुत सी कंपनियां सिगार लॉकर मुहैया कराती हैं. जहां महंगे सिगार सुरक्षित रखे जाते हैं. वक़्त आने पर सिगार के मालिक निकालकर उनका लुत्फ़ उठा सकते हैं. या बेचकर मुनाफ़ा कमा सकते हैं.
वैसे डोमिनिक सलाह देती हैं कि महंगे सिगार को सहेजकर रखने से अच्छा है कि उसे पीकर लुत्फ़ उठाया जाए.
एक बीच का रास्ता भी हो सकता है. आपके पास ज़्यादा सिगार हैं तो आधे आप पी लीजिए. बाक़ी के आधे दाम बढ़ने के इंतज़ार में सहेजकर रखिए. दाम बढ़ेंगे तो आधे सिगार बेचकर ही पूरी क़ीमत निकल आएगी.
(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)
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