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मंगलवार, 12 अगस्त, 2008 को 10:38 GMT तक के समाचार
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ओलंपिक स्टेडियम में दर्शकों का टोटा

बीजिंग ओलंपिक स्टेडियम
शुक्रवार को हुए शुरुआती समारोह में भी कई सीटें खाली पड़ी थी
बीजिंग ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा के स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारत में ओलंपिक के प्रति एक नई उत्सुकता दिखाई दे रही है. लेकिन चीन के अधिकारियों की चिंता कुछ और है. वे चिंतित हैं कि कुछ ओलंपिक खेलों के लिए दर्शक कहाँ से लाएँ.

ओलंपिक खेल की संयोजक समिति के अधिकारियों ने माना है कि खेल के मैदान में लोगों की भीड़ नहीं पा कर वे स्वयंसेवकों की सहायता ले रहे हैं ताकि मैदान में माहौल को सुधारा जा सके.

ओलंपिक खेल की संयोजक समिति के वरिष्ठ अधिकारी वांग वे ने कहा कि अन्य ओलंपिक खेलों में भी इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा है.

यह बयान तब आया है जब दर्शकों और पत्रकारों ने पाया कि हालांकि खेल के लिए सभी टिकट बिक चुके हैं फिर भी खेल के कुछ मैदानों में दर्शकों की भीड़ बहुत कम दिखती है.

संवादताओं से बातचीत करते हुए वांग ने कहा, "हमें भी इस बात की फ़िक्र है कि क्यों स्टेडियम में दर्शकों की भीड़ नहीं है."

उन्होनें कहा कि बारिश, गर्म मौसम के साथ साथ कई कारण है जिसकी वजह से ऐसा हुआ है.

वांग ने कहा कि कुछ दर्शक सिर्फ़ कुछ विशेष खेल के लिए ही स्टेडियम आते हैं जबकि उनके पास पूरे सेशन का टिकट है.

दुखद अनुभव

उन्होंने कहा, "बीच वॉलीबॉल और बास्केट बॉल के लिए दर्शकों के पास सुबह, दोपहर और शाम के लिए एक ही टिकट होता है. वे किसी एक खेल को देखने स्टेडियम जाते हैं, सभी के लिए नहीं."

 हमें भी इस बात की फ़िक्र है कि क्यों स्टेडियम में दर्शकों की भीड़ नहीं है
ओलंपिक खेल के संयोजक समिति के वरिष्ठ अधिकारी, वांग वे

उन्होनें कहा कि जब उन्हें लगता है कि दर्शकों की संख्या काफ़ी कम है वे चीयरलीडर्स को 'एक अच्छा माहौल बनाने के लिए' बुला लेते हैं.

रविवार को चीन और अमरीका के बीच हुए पुरुष बास्केट बॉल मैच में दर्शकों की उपस्थिति काफ़ी कम थी. यही हाल जूडो, बैडमिंटन और वाटर पोलो जैसे खेलों के लिए भी रहा.

जूडो देखने पहुँचे एक दर्शक का कहना था, "पूरा स्टेडियम खाली पड़ा था. काफ़ी दुखद है यह."

शुक्रवार को हुए ओलंपिक के शुरुआती समारोह में भी कई सीटें खाली पड़ी थी.

स्टेडियम में खाली पड़ी सीटों की एक वजह यह हो सकती है कि प्रायोजकों के लिए जो सीट सुरक्षित होती है वहाँ कोई नहीं पहुँचे.

ऐसे टिकट पाने वाले एक व्यक्ति का कहना था कि ज़्यादातर टिकट इतनी देर से दिए जाते हैं कि इन मैचों के लिए समय से स्टेडियम पहुँचना काफ़ी मुश्किल हो जाता है.

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