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अंतरराष्ट्रीय अख़बारों में आईपीएल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई में आईपीएल प्रतियोगिता के फ़ाइनल मुकाबले की चर्चा भारतीय मीडिया में ज़ोर-शोर से हुई ही है, विदेशी मीडिया ने भी आईपीएल फ़ाइनल से जुड़ी ख़बरों को अपने-अपने तरीके से पेश किया है. ब्रिटेन के अख़बारों ने आईपीएल के दिन-प्रतिदिन के मैचों के कवरेज में ज़्यादा उत्साह नहीं दिखाया था, लेकिन फ़ाइनल मैच की यहाँ ख़ूब चर्चा की गई है. गार्डियन आईपीएल को सबसे ज़्यादा जगह ‘गार्डियन’ में मिली है. इस अख़बार ने अंतिम गेंद तक चले फ़ाइनल मैच के रोमाँच का विस्तार से विवरण दिया है. अख़बार का कहना है आईपीएल टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले ऐसा कहा जा सकता था कि भारत में क्रिकेट को नज़रअंदाज़ करने वाले लोग भी बड़ी संख्या में हैं. लेकिन अब ऐसा नहीं कहा जा सकता. क्योंकि आईपीएल मैचों ने टेलीविज़न के बड़े-बड़े सीरियल, गेम-शो, रीयलिटी-शो...सब की रेटिंग को बुरी तरह बिगाड़ के दिखा दिया.
लेकिन ‘गार्डियन’ के क्रिकेट संवाददाता ने आईपीएल के भविष्य के बारे में लिखते वक़्त थोड़ी सतर्कता से काम लिया है. उन्होंने कहा है कि आगे भी आईपीएल की लोकप्रियता इसी तरह जारी रहेगी या किसी अन्य आयोजन या कार्यक्रम से इस पर असर पड़ेगा,इसका अंदाज़ा अभी नहीं लगाया जा सकता. ‘गार्डियन’ में ही एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार छह सप्ताह से चल रहा तामझाम समेटे जाने के बाद अब भारत में ये सवाल उठाया जा रहा है कि क्या आईपीएल की सफलता औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति का प्रतीक है, या ये सिर्फ़ पैसों का संवेदनाहीन खेल मात्र था? हालाँकि संवाददाता का ये भी कहना है कि आईपीएल से भारत में उभर रही उस मानसिकता का भी अंदाज़ा मिलता है, जिसके तहत लोग देशभक्ति और राजनीति से आगे जाकर सिर्फ़ योग्यता को महत्व देते हैं. बाहरी खिलाड़ियों से भरे शहर-केंद्रित टीमों के साथ उसके कट्टर समर्थक के रूप में जुड़ना, इसी मानसिकता का परिचायक है. टाइम्स अख़बार ‘टाइम्स’ ने आईपीएल के और पहलू को छूते हुए सवाल किया है कि टूर्नामेंट से पहले बोली लगाए जाते समय जिन बड़े नामों पर भरोसा किया जा रहा था, उनसे ज़्यादा भरोसेमंद वो निकले जिन्हें कोई छूना नहीं चाह रहा था.
अख़बार ने उदाहरण दिया है शॉन मार्श का. जब खिलाड़ियों की फ़रवरी में पहली बार बोली लगाई गई तो शॉन मार्श को किसी टीम ने नहीं लिया. यहाँ तक कि मार्च में लगाई गई दूसरी बोली के दौरान में वे किसी टीम के लायक़ नहीं समझे गए. अंतत: टूर्नामेंट शुरू होने से मात्र नौ दिन पहले किंग्स पंजाब इलेवन ने मार्श को मात्र 30 हज़ार डॉलर में अपनी टीम में शामिल किया. मार्श ने मानो इस रकम की एक-एक पाई चुकता कर दिया. 68 के औसत से कुल 616 रन बना कर. इसी तरह गेंदबाज़ों में अव्वल रहे सोहेल तनवीर भी टूर्नामेंट से पहले कोई बड़ा नाम नहीं थे. ‘इंडेपेन्डेन्ट’ अख़बार की मानें तो आईपीएल का पहला संस्करण भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसने क्रिकेट की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया है. अख़बार का कहना है कि आप इस तरह के टूर्नामेंट को चाहें या नहीं चाहें, ये न सिर्फ़ आगे भी खेला जाएगा, बल्कि इसका दायरा बढ़ता ही जाएगा. ब्रिटेन में केबल चैनल सेटान्टा पर आईपीएल को दिखाया गया, और केबल कंपनी को बहुत ही ख़ुशी है कि उसे हज़ारों नए ग्राहक सिर्फ़ आईपीएल के ज़रिए मिले हैं. सेटान्टा के पास प्रतियोगिता का अधिकार पाँच वर्षों के लिए है, और उसे उम्मीद है कि आगे चल कर वो आईपीएल मैच दिखा कर मुनाफ़ा भी कमाएगी.
एक अन्य अख़बार ‘टेलीग्राफ़’ ने आईपीएल की सफलता का सकारात्मक असर भारत में फ़ुटबॉल के खेल पर पड़ने की संभावना व्यक्त की है. आईपीएल सबसे नीचे रही डेक्कन चार्जर्स की टीम के एक अधिकारी ने अख़बार को बताया कि वे हाल ही में रिटायर हुए दुनिया के मशहूर फ़ुटबॉल ख़िलाड़ियों को लेकर एक टीम बनाने और उससे इंग्लैंड के मैनचेस्टर युनाइटेट और चेल्सी जैसी टीमों को भिड़ाने की संभावनाओं से इनकार नहीं करते. डेक्कन चार्जर्स के इस अधिकारी ने आईपीएल टीमों को भारत से बाहर दौरे पर ले जाने की संभावनाओं की भी बात की. लेकिन ‘टेलीग्राफ़’ की रिपोर्ट इस सवाल के साथ ख़त्म होती है कि क्या जितनी जल्दी भारत को ट्वेन्टी20 क्रिकेट का नशा चढ़ा, उतनी ही तेज़ी से ये नशा उतर नहीं सकता है? |
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