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ऑस्ट्रेलियाई अख़बारों में भी छाया मुद्दा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की तरह ऑस्ट्रेलियाई अख़बारों में भी भारत और ऑस्ट्रेलियाई टीम के बीच खेले जा रहे मैच के दौरान उपजे विवादों से भरे पड़े हैं. सोमवार के अंक में सभी अख़बारों ने क्रिकेट की ख़बरों को पहले पेज पर जगह दी है और इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया है. कुछ अख़बारों ने भारतीय टीम की हार के पीछे अंपायरिंग के मामले को लिया है तो कुछ ने हरभजन सिंह के ख़िलाफ़ दिए गए फ़ैसले को उठाया है. सिडनी से स्थानीय पत्रकार राजेश ठाकुर ने बताया कि अख़बारों का रुख़ मिला जुला सा है. उनका कहना है कि सिडनी के 'डेली टेलीग्राफ़', 'मॉर्निंग हेरल्ड' और मेलबर्न के 'ए एज' में छपी ख़बरों का रुख़ मिला जुला सा ही है. एक अख़बार की टिप्पणी है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम तो ज़बरदस्त है लेकिन जीत जिस तरह से हुई है वह ठीक नहीं है. अख़बार में इसका विवरण प्रकाशित किया गया है कि जब भारतीय टीम के कप्तान अनिल कुंबले ने यह कहा कि सिर्फ़ एक ही टीम खेल भावना से खेल रही थी, तो ऑस्ट्रेलियाई टीम के जीत का जश्न एकाएक फीका पड़ गया और वहाँ माहौल ही बदल गया. हरभजन का मामला भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह को एंड्र्यू साइमंड्स के ख़िलाफ़ कथित नस्लभेदी टिप्पणी किए जाने के मामले को लेकर भी अख़बारों का रुख़ मिलाजुला सा है. डेली टेलीग्राफ़ में पाठकों के ईमेल प्रकाशित किए गए हैं. इसमें कई पाठकों का कहना है कि यदि हरभजन सिंह ने साइमंड्स को मंकी (यानी बंदर) कहा भी होगा तो यह नस्लभेदी कहाँ से हो गया. उन पाठकों ने तर्क दिए हैं कि जब कंगारु कहा जा सकता है तो बंदर क्यों नहीं. जबकि हरभजन पर कार्रवाई को ठीक बताने वालों का कहना है कि जब हरभजन सिंह ने मुंबई में ऐसी टिप्पणी न करने का वादा किया था तो उन्हें फिर से ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी. अख़बार ने मुंबई में हुए मैच के दौरान की एक तस्वीर भी प्रकाशित की गई है जो एक ऑस्ट्रेलियाई दर्शक की खींची हुई है. | इससे जुड़ी ख़बरें भज्जी पर लगी तीन मैचों की पाबंदी06 जनवरी, 2008 | खेल की दुनिया अंपायरों पर कार्रवाई की मांग06 जनवरी, 2008 | खेल की दुनिया 'एक ही टीम में थी खेल भावना'06 जनवरी, 2008 | खेल की दुनिया ख़राब अंपायरिंग की शिकायत होगी06 जनवरी, 2008 | खेल की दुनिया ऑस्ट्रेलिया 122 रन से जीता06 जनवरी, 2008 | खेल की दुनिया इस बार नहीं चूका शतकों का शहंशाह04 जनवरी, 2008 | खेल की दुनिया टीम निराश, लेकिन शिकायत नहीं होगी03 जनवरी, 2008 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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