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कठिन है 2010 में दिल्ली की डगर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रमंडल खेलों के प्रमुख न्यूज़ीलैंड के माइक हूपर दिल्ली में हैं और उनकी योजना अब हर महीने लगभग बीस दिन दिल्ली में बिताने की है. राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वे भारतीय आयोजकों को 2010 की तैयारी में मदद देने के लिए दिल्ली जा रहे हैं. भारत में पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन हो रहा है और अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन (सीजीएफ़) दिल्ली में हो रही तैयारियों को लेकर ख़ासा चिंतित है. इसी वर्ष मई महीने में 2010 के आयोजन की समन्वय समिति के अधिकारियों ने दिल्ली का दौरा किया था, इस समिति के प्रमुख ऑस्टिन सेली ने कहा था कि "कई खामियाँ हैं जिन्हें तत्काल दुरुस्त करना ज़रूरी है." उनकी मुख्य चिंता खेलों के आयोजन को लेकर है. सेली लंदन ओलंपिक की समन्वय समिति से भी जुड़े हैं, उन्होंने ज़ोर देकर कहा था, "जल्द से जल्द प्रशिक्षित और अनुभवी मैनेजरों को तैनात करने की ज़रूरत है, यह आयोजन समिति की शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए." उन्होंने इस बात पर भी चिंता दिखाई कि भारतीय आयोजक अपनी टीमों को चुस्त-दुरुस्त और जीत के लायक़ बनाने पर भी पूरा ध्यान नहीं दे रहे हैं. उनका कहना है कि मेज़बान देश की टीम का अच्छा प्रदर्शन करना खेलों के लिए बहुत ज़रूरी होता है, सेली का कहना है कि इस काम के लिए प्रशिक्षण के लिए संसाधनों और सुविधाओं को बढ़ाने की गंभीर ज़रूरत है. मई में सेली की यात्रा के बाद से तस्वीर बेहतर होने के बदले और ख़राब हुई है. सेली नवंबर में एक बार फिर प्रगति का जायज़ा लेने के लिए दिल्ली जाएँगे. सेली नवंबर में कोलंबो में होने वाली सीजीएफ़ की बैठक से पहले भारत का दौरा पूरा कर लेना चाहते हैं, कोलंबो की बैठक में तय किया जाएगा कि 2014 के राष्ट्रमंडल खेल कहाँ आयोजित होंगे. लेकिन भारतीय आयोजकों का कहना है कि वे नवंबर में वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स की वजह से व्यस्त हैं इसलिए सेली बाद में आएँ, अब सेली की भारत यात्रा जनवरी 2008 में होगी. इससे पता चलता है कि 2010 के काम में लगे अधिकारी अन्य आयोजनों में भी फँसे हुए हैं जो सीजीएफ़ के लिए चिंता की बात हो सकती है. भारत में चल रही राजनीति भी दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी में बाधक साबित हो सकती है क्योंकि खेल मंत्री मणिशंकर अय्यर सार्वजनिक तौर पर राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन पर करोड़ों रूपए खर्च करने के ख़िलाफ़ बोल चुके हैं, उनका कहना है कि यह रक़म खेलों के ग्रामीण स्तर पर विकास में ख़र्च की जानी चाहिए. राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट को शामिल नहीं किया गया है लेकिन उसके कुछ सप्ताह बाद चीन में होने वाले एशियाई खेलों में क्रिकेट को जगह दी गई है. बताया जा रहा है कि राष्ट्रमंडल खेलों में क्रिकेट को शामिल न किए जाने की एक वजह इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी और शरद पवार का मनमुटाव है, कलमाडी कॉमनवेल्थ खेलों की आयोजन समिति के अध्यक्ष हैं जबकि पवार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के. माइक हूपर को इसीलिए दिल्ली भेजा जा रहा है ताकि वे वहाँ रहकर खेलों के आयोजन पर नज़दीक से नज़र रखेंगे और राजनीतिक टकराव टालने की कोशिश करते रहेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय झाँकीखेल की दुनिया महिला हॉकी टीम नहीं जीत पाई स्वर्ण25 मार्च, 2006 | खेल की दुनिया राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय सितारेखेल की दुनिया प्रतिबंधित दवा टेस्ट में भारतीय फँसे24 मार्च, 2006 | खेल की दुनिया निशानेबाज़ी में भारत को तीन स्वर्ण और23 मार्च, 2006 | खेल की दुनिया सातवें दिन भारत को मिले दो स्वर्ण22 मार्च, 2006 | खेल की दुनिया नारंग ने भारत के लिए 14वां स्वर्ण जीता21 मार्च, 2006 | खेल की दुनिया पाँचवें दिन भारत की झोली में चार स्वर्ण20 मार्च, 2006 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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