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फ़ाइनल में भ्रम के लिए रेफ़री की माफ़ी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क्रिकेट विश्व कप के फ़ाइनल मैच के अंत में पैदा हुई भ्रम की स्थिति पर मैच रेफ़री जेफ़ क्रो ने स्वीकार किया है कि उनसे और अंपायरों से बहुत बड़ी ग़लती हुई है. मैच में जब आख़िरी तीन ओवर फेकें जाने बाक़ी थे, तो श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी ख़राब रोशनी के कारण मैदान से बाहर आ गए. और उन्हें बताया गया कि खेल अगले दिन ख़त्म किया जाएगा. लेकिन दोनों टीमों के कप्तानों का कहना था कि खेल खराब रोशनी में ही पूरा किया जाए. मैच के बाद अब जेफ़ क्रो ने कहा है, "तकनीकी रुप से खेल ख़त्म हो गया था क्योंकि 20 ओवर पूरे हो चुके थे. ये हमारी ग़लती थी." बाद में श्रीलंका के कप्तान महेला जयवर्धने के कहा कि वे नियम जानते थे लेकिन अंपायरों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि उनकी टीम को रविवार को खेलना पड़ेगा. इस बारे में क्रो का कहना था, "हम सभी पशोपेश में थे कि सही क्या है, लेकिन अब मुझे लगता है कि खेल के नियमों के बारे में मुझे जानकारी होनी चाहिए थी और खेल को उसी समय ख़त्म कर देना चाहिए था." लेकिन साथ ही जेफ़ क्रो ने कहा कि वे इस्तीफ़ा नहीं देंगे. खेल रविवार को ख़त्म करने की तीसरे अंपायर रूडी कोएरटज़न की धारणा के लिए उन्हें दोषी ठहराने से भी जेफ़ क्रो ने इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि ये रूडी ही नहीं बल्कि सामूहिक ग़लती थी. जेफ़ क्रो ने कहा कि इस प्रतियोगिता के लिए चुना जाना एक बड़ी बात थी और जो कुछ भी हुआ उसके लिए वे ज़िम्मेदार हैं. |
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