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प्रशंसकों की भी है नाक की लड़ाई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और श्रीलंका के बीच होने वाला मैच दोनों देशों के खिलाड़ियों के साथ-साथ क्रिकेट प्रेमियों के लिए भी आन-बान-शान की लड़ाई है. दूर-दूर से भारत और श्रीलंका का मैच देखने आए दोनों देशों के समर्थकों की अपनी सोच है. जहाँ श्रीलंका के समर्थक अपनी टीम के सुपर-8 में जाने को लेकर आश्वस्त हैं, वहीं भारतीय समर्थकों के लिए स्थिति बिल्कुल अलग है. क्योंकि वे जानते हैं कि अगर भारत इस मैच में चूका तो इस विश्व कप से बाहर का रास्ता देखना पड़ेगा. अमरीका के फिलाडेल्फिया से मैच देखने आए अजय शुक्रवार के मैच को लेकर चिंतित दिखे लेकिन उम्मीद जताई कि उनका यहाँ आना बेकार नहीं जाएगा. उन्होंने कहा, “भारत के लिए यह मैच काफ़ी अहम है और मुझे उम्मीद है कि भारतीय टीम हमें निराश नहीं करेगी औऱ मैच जीतेगी.” दूसरी ओर लंदन से आए शुभो मानते हैं कि मैच काफ़ी रोमांचक और संघर्षपूर्ण होगा लेकिन उन्हें चिंता भी है कि कहीं भारतीय टीम बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैच जैसा ना खेल दिखाए. वे कहते हैं, “सबसे पहले तो मैं यह चाहता हूँ कि भारतीय टीम कम स्कोर पर आउट ना हो. भारत जीते और सुपर-8 में जाए दो अंक लेकर.” अपनी-अपनी पीठ वहीं अपनी टीम के सुपर-8 में जाने को लेकर आश्वस्त श्रीलंका के समर्थकों को भारतीय टीम से कोई सहानुभूति नहीं और वे चाहते हैं कि भारतीय टीम हार कर प्रतियोगिता से बाहर हो जाए.
अमरीका से आए उपुल कहते हैं- “मैं व्यक्तिगत रूप से यह मानता हूँ कि भारतीय टीम हार जाए क्योंकि मैं नहीं चाहता कि आगे श्रीलंका को कोई मुश्किल आए.” उपुल का कहना है कि वेस्टइंडीज़ की विकेट भारत और श्रीलंका दोनों का साथ देती है और वे नहीं चाहते कि आगे कभी दोनों टीमों का मुक़ाबला हो तो भारत उन पर भारी पड़े. श्रीलंका के एक और समर्थक मंजुल का कहना है कि विश्व क्रिकेट के लिए यह दुखद दिन होगा कि भारतीय टीम प्रतियोगिता से बाहर होगी लेकिन श्रीलंका समर्थक होने के नाते मैं चाहूँगा कि भारत बाहर हो जाए. गुरुवार को भारत के अभ्यास सत्र को देखने बड़ी संख्या में भारतीय पहुँचे. स्टैंड में बैठकर वे भारतीय टीम का उत्साह बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे. क्या होगा, अगर भारत श्रीलंका से हार जाएगा, शुभो कहते हैं- निराशा तो होगी. ग़ुस्सा भी आएगा. लेकिन क्या करेंगे थोड़ा चीखेंगे-चिल्लाएँगे और मैच को भूलने की कोशिश करेंगे. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उन समर्थकों के व्यवहार को उचित नहीं मानते, जो टीम के हारने पर उनके पोस्टर जलाती है या विरोध के लिए सड़कों पर उतर आती है. अजय भी इससे सहमत हैं. उनका कहना है कि जीत-हार तो मैच का हिस्सा है और इसे इसी रूप में लेना चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत के लिए जीवन-मरण का प्रश्न22 मार्च, 2007 | खेल हम किसी मामले में कम नहीं: द्रविड़22 मार्च, 2007 | खेल प्रशंसकों से परेशान भारतीय खिलाड़ी21 मार्च, 2007 | खेल भारत की बरमूडा पर रिकॉर्ड जीत 19 मार्च, 2007 | खेल 'अब डर के मारे खेलेंगे भारतीय खिलाड़ी'18 मार्च, 2007 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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