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भारत की बरमूडा पर रिकॉर्ड जीत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व कप के एक महत्वपूर्ण मुक़ाबले में भारत के रिकॉर्ड 413 रनों के जवाब में बरमूडा की पूरी टीम 44वें ओवर में केवल 156 रनों पर सिमट गई. इस तरह भारत ने यह मैच 257 रनों के रिकॉर्ड अंतर से जीत लिया. रिकॉर्ड के लिहाज़ से इस मैच में सर्वाधिक स्कोर और रनों के अंतर के साथ ही छक्कों का भी रिकॉर्ड बना. टीम इंडिया की तरफ से कुल 18 छक्के लगे. इनमें सर्वाधिक सात छक्के युवराज सिंह के बल्ले से निकले. चौकों की बात करें तो भारतीय टीम की तरफ से कुल तीस चौके जड़े गए. 'मैन ऑफ़ दि मैच' रहे वीरेंदर सहवाग जिन्होंने जमकर खेलते हुए सिर्फ़ 87 गेंदों पर 114 रन बनाए.
सहवाग ने तेज़ी से रन बनाए और सिर्फ़ 81 गेंद खेलकर अपना शतक पूरा किया जिसमें 14 चौके और तीन छक्के शामिल थे. वे हर्डल की गेंद पर जोंस के हाथों कैच आउट हुए. वीरेंदर सहवाग पर काफ़ी दबाव था कि वे इस मैच में स्कोर करें और उन्होंने शतक बनाकर इस समय को काफ़ी हद तक कम कर दिया है. भारतीय पारी बरमूडा ने टॉस जीतकर पहले भारतीय टीम को बल्लेबाज़ी करने का न्योता दिया था. भारत ने वर्ल्ड कप के सबसे बड़े स्कोर का रिकॉर्ड तोड़ते हुए बरमूडा के सामने मैच जीतने के लिए 414 रन का लक्ष्य रखा. यह रिकॉर्ड श्रीलंका के नाम था, उसने कीनिया के ख़िलाफ़ 1996 के वर्ल्ड कप में पाँच विकेट खोकर 398 रन बनाए थे.
भारत ने 413 रन पूरे पचास ओवर खेलकर पाँच विकेट के नुक़सान पर बनाए. कप्तान राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर नाबाद रहे. भारत की ओर से सबसे अधिक रन वीरेंदर सहवाग ने बनाए जबकि सबसे तेज़ गति से रन युवराज सिंह ने बनाए, उन्होंने सिर्फ़ 46 गेंदों पर 83 रन पीट दिए. सौरभ गांगुली स्पिनर बोर्डन की गेंद पर स्टंप आउट हो गए, उन्होंने काफ़ी धीमी गति से खेलते हुए 114 गेंदों पर 89 रन बनाए. पारी की शुरूआत करने वाले रॉबिन उथप्पा दूसरे ही ओवर में स्लिप में लपक लिए गए, उस सम. टीम का कुल स्कोर था तीन रन. दूसरे विकेट की साझीदारी में गांगुली और सहवाग ने 202 रन जोड़े. महेंद्र सिंह धोनी 29 रन बनाकर आउट हुए. बरमूड़ा की पारी बरमूडा के दोनों सलामी बल्लेबाज ज़हीर ख़ान के आक्रमण के सामने लाचार दिखे और क्लीन बोल्ड हो गए.
पिचर ने छह गेंदों का सामना किया लेकिन बिना कोई स्कोर किए ही पवैलियन लौट गए. इसके बाद मैच को बारिश की वजह से थोड़ी देर के लिए रोकना पड़ा. दोबारा मैच शुरु होते ही आउटरब्रिज भी 16 गेंदों में नौ रन बनाकर ज़हीर की गेंद पर ही क्लीन बोल्ड हो गए. बोर्डन 38 गेंदों में 13 रन बनाकर मुनाफ़ पटेल की गेंद पर एलबीडब्ल्यू हो गए. कुंबले ने रोमेन को अपने पहले ही ओवर में एलबीडब्ल्यू कर दिया. इसके बाद टकर भी शून्य के स्कोर पर कुंबले की गेंद पर ही बोल्ड हो गए. इसके बाद अगरकर ने अपने एक ही ओवर में बरमूडा के तीन विकेट झटक लिए. पहले तो माइनर्स 21 के अपने स्कोर पर कार्त्तिक के हाथों लपक लिए गए. इसके बाद इसी ओवर में अगरकर की गेंद को खेलने के प्रयास में कैन उत्थप्पा को कैच दे बैठे. कैन के आउट होने के बाद बल्लेबाजी करने आए हर्डल अगरकर की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए. इसके बाद परिवर्त्तन के तौर पर लाए गए सचिन लंबे समय से जम गई लेवरोक और हैंप की जोड़ी को तोड़ने में कामयाब रहे. 31 गेंदों में नौ रन बनाकर लेवरोक धोनी के हाथों विकेट के पीछे कैच कर लिए गए. बरमूडा के आख़िरी आउट होने वाले बल्लेबाज थे जोंस जो कुंबले की गेंद पर एलबीडब्ल्यू हो गए. बरमूडा की ओर से सार्वाधिक स्कोर करने वाले बल्लेबाज रहे हेंप जिन्होंने 105 गेंदों में 76 रन बनाए और अंत तक आउट नहीं हुए. अपनी पारी में उन्होंने नौ चौके और एक छक्का भी लगाया. | इससे जुड़ी ख़बरें खेल को खेल ही रहने दो....19 मार्च, 2007 | खेल कई किंतु-परंतु हैं अगले दौर के रास्ते में19 मार्च, 2007 | खेल 'अब डर के मारे खेलेंगे भारतीय खिलाड़ी'18 मार्च, 2007 | खेल बांग्लादेश के हाथों भारत की शर्मनाक हार17 मार्च, 2007 | खेल संघर्ष से क्या घबराना: श्रीसंत15 मार्च, 2007 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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