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रविवार, 18 मार्च, 2007 को 19:36 GMT तक के समाचार
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'बहुत दबाव में थे वूल्मर'
बॉब वूल्मर पाकिस्तानी कप्तान इंज़माम उल हक़ के साथ
शनिवार को विश्व कप के अपने दूसरे मैच में आयरलैंड से हारकर बाहर होने वाली पाकिस्तानी टीम के कोच बॉब वूल्मर ने हार के बाद कहा था कि यह उनके जीवन का सबसे बुरा दिन है.

तब शायद किसी को अंदाज़ा नहीं था कि रविवार उनके जीवन का आख़िरी दिन होगा.

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता वसीम बारी मानते हैं कि वूल्मर के ऊपर काफ़ी दबाव रहा होगा जो उनकी मौत का कारण बना होगा.

उन्होंने कहा, "वे ब्लड शुगर के मरीज़ थे, तनाव तो था ही, उनको दिल का दौरा पड़ा और दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि वे तब कमरे में अकेले थे इसलिए उन्हें मदद नहीं मिल सकी."

 वे एक बेहतरीन इंसान थे, मैं उन्हें कोच बनने से पहले से जानता था, यह पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा नुक़सान है
वसीम बारी

बीबीसी हिंदी से एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा हार-जीत के लिए किसी एक व्यक्ति को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, वे इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि वूल्मर को दोषी ठहराया जा रहा था जिसकी वजह से वे गहरे दबाव में थे.

बारी ने कहा, "हार-जीत होती रहती है, खिलाड़ियों, चयनकर्ताओं, बोर्ड और कोच सबकी ज़िम्मेदारी होती है. किसी एक शख़्स की ज़िम्मेदारी नहीं होती."

वसीम बारी ने वूल्मर को याद करते हुए कहा, "वे एक बेहतरीन इंसान थे, मैं उन्हें कोच बनने से पहले से जानता था, यह पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा नुक़सान है. वे एक पक्के प्रोफ़ेशनल थे और मुझसे उनके बहुत अच्छे रिश्ते थे, उनकी कमी हमेशा खलेगी."

भारी दबाव

भारतीय टीम के कोच रह चुके अंशुमन गायकवाड़ ने वूल्मर के निधन को बहुत दुखद घटना बताया है और गहरा अफ़सोस प्रकट किया है.

 मैं समझ सकता हूँ कि उनके ऊपर कितना दबाव रहा होगा, पाकिस्तान आकर उन्हें काफ़ी विवादों का सामना करना पड़ा था. मैं पक्के तौर पर कह सकता हूँ कि वे बहुत दबाव में थे
अंशुमन गायकवाड़

गायकवाड़ कहते हैं, "मैं समझ सकता हूँ कि उनके ऊपर कितना दबाव रहा होगा, पाकिस्तान आकर उन्हें काफ़ी विवादों का सामना करना पड़ा था. मैं पक्के तौर पर कह सकता हूँ कि वे बहुत दबाव में थे."

गायकवाड़ कहते हैं कि इस हादसे से ही पता चलता है कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम से उनका कितना लगाव था और उसकी हार से वे कितने आहत हुए थे.

गायकवाड़ मानते हैं कि कोच के ऊपर बहुत अधिक दबाव होता है, वे कहते हैं, "बोर्ड, सेलेक्टर, पॉलिटिशियन, मीडिया सभी कोच से ही सवाल पूछते हैं, गड़बड़ होने पर सब उसी से उम्मीद करते हैं लेकिन वह सिर्फ़ मार्गदर्शन कर सकता है खेलना तो खिलाड़ियों को होता है."

बॉब वूल्मर के निधन से एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि क्रिकेट में, खा़स तौर पर दक्षिण एशियाई में खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों पर कितना अधिक दबाव है.

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