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रानादेब बने क्रिकेटर ऑफ़ द इयर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में घरेलू क्रिकेट के लिए सिएट 'क्रिकेटर ऑफ़ द इयर' का पुरस्कार बंगाल के रानादेब बोस को दिया गया है. जबकि सर्वश्रेष्ट बल्लेबाज़ का पुरस्कार बंगाल के ही मनोज तिवारी को मिला है. सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ का ख़िताब तमिलनाडु के युवा खिलाड़ी रविचंद्रन अश्विन की झोली में गया. 1970 के दशक में घरेलू क्रिकेट में सनसनी फैलाने वाले स्पिनर रजिंदर गोयल को क्रिकेट के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाज़ा गया. हरियाणा की ओर से खेलने वाले गोयल लगभग उसी समय क्रिकेट के क्षेत्र में उभरे थे जब भारत की स्पिन तिकड़ी--बेदी, चंद्रशेखर और प्रसन्ना--की तूती बोलती थी. यही वजह थी कि गोयल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमाल दिखाने का मौक़ा नहीं मिल सका लेकिन घरेलू क्रिकेट में वे काफी सफल रहे थे. 27 वर्षीय क्रिकेटर ऑफ़ द इयर रानादेब बोस ने घरेलू क्रिकेट में आठ मैचों में 57 विकटें ली हैं और उनकी औसत 14.22 है. उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है- 25 रन देकर सात विकेट. उन्हें कुल 67 अंक मिले जबकि रविचंद्रन अश्विन उनसे 20 अंक पीछे रहे. वहीं सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ का ख़िताब पाने वाले मनोज तिवारी ने घरेलू क्रिकेट में सात मैचों में सर्वाधिक 796 रन बनाए. उनकी औसत 110 की रही. हाल ही में बंगाल और मुंबई की टीमों के बीच हुए रणजी ट्रॉफ़ी फ़ाइनल में भी उन्होंने शानदार 94 रन बनाए. मनोज तिवारी को कुल 40 अंक मिले थे और उन्होंने केवल एक अंक से बंगलोर के बल्लेबाज़ रॉबिन उथप्पा को पछाड़ा. | इससे जुड़ी ख़बरें हेयर पीसीबी को अदालत में घसीटेंगे07 फ़रवरी, 2007 | खेल कोलकाता में चैपल के लिए कड़ी सुरक्षा06 फ़रवरी, 2007 | खेल भारतीय क्रिकेट टीम में वीरू की वापसी03 फ़रवरी, 2007 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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