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घरेलू विकेट का फ़ायदा है:सहवाग | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चैम्पियंस ट्रॉफ़ी के मौक़े पर वीरेन्दर सहवाग से बातचीत हुई तो उनका कहना था कि घरेलू विकेट पर खेलने के कुछ फ़ायदे ज़रूर मिलते हैं. पिच के मिज़ाज का पता रहता है और दर्शकों का समर्थन भी मिलता है. वीरेन्दर सहवाग से बातचीत-- दो मैचों में मेरी गेंद भी नीची रही उसकी वजह से भी कह सकते हैं कि मेरा मैच ख़राब रहा. लेकिन वह कोई बहाना नहीं हैं. और बल्लेबाज़ों ने भी रन बनाए हैं. ज़रूर इस बात पर ध्यान दे रहा हूँ कि मैं लगातार अच्छा प्रदर्शन करूं. मैं सचिन और राहुल से काफ़ी बात कर रहा हूँ. उनसे मैं क्या आइडिया ले सकता हूँ कि वे उतने कंसिस्टेंट हैं क्रिकेट में तो मैं भी उतना कंसिस्टेंट हूँ. मुझे उन लोगों ने बताया कि वे विकेट पर ज़्यादा समय बिताने करने को तरजीह देते हैं बजाय रन बनाने के. एक दिवसीय क्रिकेट में बहुत ज़्यादा पोज़िटिव जाते हैं और बहुत ज़्यादा स्ट्रोक खेलते हैं और जिस कारण आउट हो जाते हैं. किस तरह से अलग है ओपनिंग करना और मिडल आर्डर में बैटिंग करना. ओपनिंग करने वाले को नई गेंद का सामना करना पड़ता है जबकि मिडिल आर्डर में खेलने वाले को पुरानी गेंद से खेलना पड़ता है. ओपनिंग में खेलते हैं तो कुछ बल्लेबाजी में जोखिम ले सकते हैं लेकिन जब मिडिल आर्डर में खेलते हैं और दो या तीन आउट हो जाते हैं तो आपको जिम्मेदारी से खेलना पड़ता है. आप ज़्यादा किस में खेलना पसंद करते हैं? दोनों पसंद करते हैं लेकिन चुनौती ज़्यादा महत्वपूर्ण है. जब मिडिल आर्डर में आते हैं तो दो या तीन आउट हो चुके होते हैं. जवाबदेही से खेलना पड़ता है, रन भी बनाना है और आउट भी नहीं होना है. तो मिडल आर्डर ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. लेकिन जब ओपिनंग में आते हैं तो नई गेंद होती है, क्वालिटी बॉलिंग होती है. कप्तान भी सोचता है कि उसका क्या कंबिनेशन रहे टीम को जिताने में कामयाब रहे तो वह बल्लेबाज़ों को एडजस्ट करता है कि किसे मिडिल ऑडर में कराएँ, किससे ओपनिंग कराएँ. कभी क्लिक करता है, कभी नहीं करता तो काफ़ी आलोचना भी सहनी पड़ती है. चैलेंजर ट्रॉफी को देखें तो आपको लगता है कि आप फार्म में वापस आ गए है? मेरे हिसाब से फार्म खिलाड़ी के दिमाग़ में होता है. आप सोचेंगे तो फार्म में हैं, नहीं सोचेंगे तो फार्म में नहीं है. क्रिकेट में खिलाड़ी हर मैच में कोई भी रन नहीं बना सकता. हर खिलाड़ी की यही कोशिश होती है कि वह अच्छा प्रदर्शन करे और हर दूसरे मैच में रन बनाए. मेरी भी यही कोशिश होती है. घर में खेलने में कितना फायदा होता है? काफ़ी फायदा होता है. हम लोग आदी होते हैं उस विकेट के. हमें सब मालूम होता है कि विकेट कितना स्पिन होगा, कितना बैट बॉल पर आएगा. काफ़ी महत्वपूर्ण है. घरलू मैदान पर खेल रहे हैं तो हर चीज़ की जानकारी रहती है और दर्शकों का भी सहयोग मिलता है. पिछली वार हमलोग अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे. इस बार टीम के लिहाज से उतना उच्छा प्रदर्शन नहीं हो रहा है. लेकिन किसी सीरिज़ में जाने से पहले वाले सीरिज में अच्छा प्रदर्शन रहता है तो काफी विश्वास रहता है. चैलेंजर ट्रॉफी से हमारा हौसला काफ़ी बढ़ा है. अगर बारिश नहीं आती तो एक विनिंग कॉबिनेशन होता. पिछला मैच भी जीते हैं और फाइनल भी जीत जाते तो टीम में विश्वास आता. मेरे ख़याल से सभी लोग अच्छे फार्म और आत्मविश्वास में हैं. जिन्होंने चैलेंजर ट्रॉफी में रन बनाए हैं तो आशा यही है कि इसी साथ हम चैंपियन ट्रॉफी में जाए. | इससे जुड़ी ख़बरें 'मेरे वज़न से खेल पर फ़र्क़ नहीं पड़ता'13 अक्तूबर, 2006 | खेल चैम्पियंस ट्रॉफ़ी में खिलाड़ियों से बातचीत12 अक्तूबर, 2006 | खेल हमारी तैयारी बहुत अच्छी हैः अगरकर11 अक्तूबर, 2006 | खेल 'इंज़माम की तारीफ़ सूरज को दिया दिखाना'10 अक्तूबर, 2006 | खेल 'ओवल टेस्ट का फ़ैसला इंज़माम का था'09 अक्तूबर, 2006 | खेल सचिन ने प्रयोग की नीति का बचाव किया08 अक्तूबर, 2006 | खेल कैफ़ को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद08 अक्तूबर, 2006 | खेल यूनिस ही रहें कप्तान:ज़हीर अब्बास07 अक्तूबर, 2006 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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