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एशियाई देश चाहते हैं विश्वकप क्रिकेट | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत, पाकिस्तान,बांग्लादेश और श्रीलंका के बीच 2011 में होनेवाले विश्व कप क्रिकेट का दावा साथ मिलकर पेश करने पर सहमति हो गई है. चारों देशों के अधिकारियों ने शुक्रवार को दिल्ली में बैठक के बाद ये तय किया कि वे 28 फ़रवरी की समयसीमा से पहले एक अंतरिम दावा पेश कर देंगे. मगर ये देश एक विस्तृत प्रस्ताव अभी तक तैयार नहीं कर सके हैं क्योंकि अभी कई ऐसे वित्तीय मुद्दे हैं जिनको सुलझाना बाक़ी है. लेकिन इन देशों के क्रिकेट बोर्डों को आशा है कि अंतररराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद उन्हें और समय देने पर सहमत हो जाएगा. दक्षिण एशिया में क्रिकेट विश्व कप इससे पहले 1996 में आयोजित किया गया था जब भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने मिलकर प्रतियोगिता करवाई थी. उस समय बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद का पूर्ण सदस्य नहीं बन सका था और ये सदस्यता उसे वर्ष 2000 में मिली. वैसे 2011 के विश्व कप के लिए ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड भी साझा रूप से दावा पेश कर सकते हैं और सामान्य चक्र के हिसाब से बारी उन्हीं की आती है. फ़िलहाल भारत-पाकिस्तान-श्रीलंका-बांग्लादेश के अधिकारियों के बीच 12 मार्च को फिर बैठक होगी जिसमें अन्य बातों के साथ मैचों के स्थानों के बारे में भी चर्चा होगी. जिस वित्तीय विषय को सुलझाना बाक़ी है वो है हर देश को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद से मिलनेवाली राशि का मुद्दा. परिषद हर आयोजक राष्ट्र के बोर्ड को एक करोड़ डॉलर देना चाहता है लेकिन एशियाई देशों का मानना है कि पूरी राशि को अलग-अलग देशों में होनेवाले मैचों की संख्या के आधार पर बाँटा जाना चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें विश्वकप के लिए दावेदारी की जाएगी14 जनवरी, 2006 | खेल विश्व कप क्रिकेट के कार्यक्रमों की घोषणा20 जुलाई, 2005 | खेल 'विश्व कप की मेजबानी का दावा करेंगे'03 जून, 2005 | खेल इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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