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'ग़लत बटन दबने से मेज़बानी मिली' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी के एक सदस्य एलेक्स जिलेडी ने बीबीसी को बताया है कि लंदन को ओलंपिक खेलों की मेज़बानी करने का अधिकार एक ग़लती के चलते मिला है. कमेटी के सदस्य जिलेडी का दावा है कि तीसरे चरण के मतदान में एक प्रतिनिधि मेड्रिड के पक्ष में मत डालना चाहते थे, लेकिन ग़लती से उन्होंने पेरिस का बटन दबा दिया. एलेक्स जिलेडी ने पूरी स्थिति समझाते हुए बताया, “ मतदान में लंदन जिलेडी के मुताबिक़ वोट बराबर होने की सूरत में फिर मतदान होता जिलेडी ने बताया कि आख़िरी चरण के मतदान में पेरिस के पक्ष वाले सब वोट मेड्रिड को मिल जाते और मेड्रिड जीत जाता. जिलेडी का कहना है कि शायद यही किस्मत है. 'अफ़सोसजनक' मेड्रिड की दावेदारी कर रहे दल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फ़ेलीसियानो मारॉयल ने इस दावे के बारे में कहा, “ ये कभी पता नहीं चलेगा कि यूनानी वोट से मतदान पर क्या असर पड़ता लेकिन ये अफ़सोस की बात है कि एक ग़लती से पूरी मेहनत पर पानी जाए.” उन्होंने बीबीसी रेडियो फ़ोर को बताया कि मतदान गुप्त बैलेट के ज़रिए हुआ था और सभी मत ठीक तरीके से रिकॉर्ड हुए थे. 2012 ओलंपिक खेलों का मेज़बान तय करने के लिए जब सिंगापुर में तीसरे चरण का मतदान हुआ था, तो नतीजे की घोषणा काफ़ी देर बाद हुई थी. आईओसी के एक यूनानी सदस्य ने अपने मत को लेकर कुछ शिकायत की थी और इसी के चलते ये देर हुई. उस समय माना जा रहा था कि कोई सदस्य तय समय के अंदर वोट नहीं डाल पाया था. पर अब ये स्पष्ट हो चुका है कि सब सदस्यों ने मत डाला था. | इससे जुड़ी ख़बरें देखिए लंदन में ख़ुशी का माहौल06 जुलाई, 2005 | खेल लंदन होगा 2012 ओलंपिक का मेज़बान06 जुलाई, 2005 | खेल ओलंपिक में 'क्वालिटी' पर ज़ोर: रॉग09 जुलाई, 2005 | खेल पेरिस की दावेदारी का विरोध30 मई, 2005 | खेल बीजिंग में जलेगी ओलंपिक की मशाल29 अगस्त, 2004 | खेल इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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