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पेरिस की दावेदारी का विरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के सिख फ़ेडरेशन ने 2012 ओलंपिक की मेजबानी के लिए पेरिस की दावेदारी का विरोध किया है. सिख फ़ेडरेशन ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सभी सदस्यों को पत्र लिखकर कहा है कि फ़्रांस में धार्मिक भेदभाव हो रहा है और इस कारण पेरिस को ओलंपिक की मेजबानी नहीं मिलनी चाहिए. फ़्रांस में हिजाब, पगड़ी या अन्य धार्मिक प्रतीक चिन्ह पहनकर स्कूल जाने पर पाबंदी और सिख संगठन इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं. 2012 के ओलंपिक की मेजबानी की दौड़ में फ़्रांस की राजधानी पेरिस के साथ-साथ लंदन, न्यूयॉर्क और मॉस्को भी शामिल हैं लेकिन जानकार पेरिस को सबसे आगे मान रहे हैं. छह जुलाई को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की बैठक में मेजबान शहर की घोषणा होने वाली है. समर्थन बीबीसी से विशेष बातचीत में ब्रिटेन के सिख फ़ेडरेशन के अध्यक्ष अमरीक सिंह ने कहा कि जो देश धर्मों पर पाबंदी लगाते हैं ऐसे देश में विश्व स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन नहीं होना चाहिए.
अमरीक सिंह ने कहा, "हमने सभी 148 सदस्यों को ये पत्र लिखा है. हालाँकि अभी उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया है लेकिन हमें अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है. सदस्यों में 28 कैथलिक देशों के है जो धार्मिक हैं. इनके अलावा 18 सदस्य मुस्लिम देशों के हैं." उन्होंने उम्मीद जताई कि सदस्य इस मामले को गंभीरता से लेंगे. अमरीक सिंह ने कहा कि भारत के सदस्य रंधीर सिंह तो सिख हैं ही और वे इसे तो समर्थन देंगे ही. उन्होंने कहा, "हमने सिर्फ़ ओलंपिक को ही इसके लिए नहीं चुना है. हमने तो कोई मौक़ा हाथ से जाने नहीं दिया है. इस मुद्दे पर हमें पूरी दुनिया के सिख समुदाय का समर्थन मिला है." अमरीक सिंह ने कहा कि सिख के साथ-साथ दूसरे धर्मों के लोग भी इस बात का समर्थन कर रहे हैं. भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी से भी हमारा प्रतिनिधिमंडल मिला है और उनकी प्रतिक्रिया भी अच्छी रही है. |
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