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पूर्व क्रिकेटर एकनाथ सोलकर नहीं रहे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अपनी फ़ील्डिंग के कारण चर्चित पूर्व भारतीय क्रिकेटर एकनाथ सोलकर का रविवार को हृदय गति रूक जाने के कारण निधन हो गया है. सोलकर 57 वर्ष के थे. 1969-70 में अपना पहला टेस्ट खेलने वाले एकनाथ सोलकर ने 27 टेस्ट खेले. उन्होंने 1068 रन बनाए और 18 विकेट लिए. लेकिन सबसे ज़्यादा लोकप्रियता मिली क्षेत्ररक्षण के कारण. उस दौर में भारत की स्पिन चौकड़ी की सफलता के पीछे सोलकर का बड़ा हाथ था. क़रीबी क्षेत्ररक्षण में सोलकर को महारत हासिल थी और इस कारण बिशन सिंह बेदी, चंद्रशेखर, प्रसन्ना और वेंकटराघवन की स्पिन चौकड़ी को विकेट हासिल करने में काफ़ी मदद मिली. एकनाथ सोलकर ने कुल 53 कैच लपके. सोलकर ने सात एक दिवसीय मैच भी खेले. योग्यता सोलकर का जन्म 18 मार्च 1948 को हुआ था. सोलकर के पिता मुंबई में क्रिकेट नर्सरी माने जाने वाले पीजे हिंदू जिमखाना में ग्राउंड्समैन थे.
सोलकर ने अपनी योग्यता के आधार पर भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाई. 1970 के दशक में वे भारतीय क्रिकेट टीम का अभिन्न अंग थे. सोलकर ने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ 1969-70 की घरेलू सिरीज़ में अपना पहला टेस्ट खेला. उस समय भारतीय चयन समिति के अध्यक्ष विजय मर्चेंट थे जो युवा खिलाड़ियों को टीम में मौक़ा देना चाहते थे. विजय मर्चेंट के इस फ़ैसले का लाभ जिन खिलाड़ियों को मिला उनमें एकनाथ सोलकर भी थे. अन्य खिलाड़ी थे- गुंडप्पा विश्वनाथ, अशोक मांकड, मोहिंदर अमरनाथ, अंबर रॉय और अशोक गंडोत्रा. सोलकर को हमेशा टीम में निचले क्रम पर ही बल्लेबाज़ी करते थे. लेकिन 27 टेस्ट में उन्होंने 25.52 की औसत से 1068 रन बनाए. उन्होंने वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ 1974-75 में एक शतक भी लगाया था, जो उनके करियर का एकमात्र टेस्ट शतक था. उन्होंने अपने टेस्ट जीवन में छह अर्धशतक भी लगाए. |
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