|
चैंपियंस ट्रॉफ़ी में भी होगा ड्रग टेस्ट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी के मैचों के दौरान नशीली दवाओं के इस्तेमाल के दोषी पाए गए खिलाड़ियों पर दो साल की पाबंदी लगाई जा सकती है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने स्पष्ट किया है कि पाबंदी के साथ-साथ खिलाड़ियों पर ज़ुर्माना भी लगाया जाएगा. आईसीसी का कहना है कि सभी टीमों में से किसी भी दो खिलाड़ियों को ड्रग टेस्ट के लिए चुना जा सकता है. आईसीसी के प्रमुख मैल्कम स्पीड ने कहा, " दोषी पाए जाने पर कम से कम दो साल का प्रतिबंध लगाया जा सकता है और शायद इससे उसका क्रिकेट करियर ही ख़त्म हो जाए." पिछले साल विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के स्पिनर शेन वॉर्न दोषी पाए गए थे और उन पर एक साल की पाबंदी लगा दी गई थी. यूके स्पोर्ट्स के साथ बनाई गई योजना के अनुसार ड्रग टेस्ट मान्यता प्राप्त मशहूर लेबोरेट्री में कराई जाएगी. आईसीसी का कहना है कि ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने पर खिलाड़ी को तुरंत निलंबित कर दिया जाएगा. इसके बाद मामला टूर्नामेंट के ड्रग ट्राईब्यूनल के पास भेजा जाएगा. इसमें वरिष्ठ क़ानूनी जानकार, एक मेडिकल स्पेशलिस्ट, एक पूर्व वरिष्ठ क्रिकेटर या प्रशासक होगा. इसी प्रकार का एक और तीन सदस्यीय पैनल होगा जिसमें खिलाड़ियों की अपील पर सुनवाई होगी. पिछले साल विश्व कप में ड्रग टेस्ट बड़े पैमाने पर किए गए थे. हालाँकि कई देशों में अलग से भी ड्रग टेस्ट की व्यवस्था है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||