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थार के रेगिस्तान के सपूत हैं राठौर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मंगलवार, 17 अगस्त 2004..राजस्थान.. जयपुर में मेजर राज्यवर्धन सिंह राठौर की सैन्य इकाई 9 ग्रेनेडियर्स में सैनिक बैंड की धुनों पर नाच रहे थे.. उधर बीकानेर ज़िले में राठौर के पैतृक गाँव गारबदेसर में दीपावली-सा उत्सव लग रहा था. एथेंस में चाँदी का तमगा जीतने वाले सेना के मेजर राज्यवर्धन सिंह राठौर 9 ग्रेनेडियर के सैनिकों के बीच ऐसे नायक के रूप में देखे जा रहे हैं जिसने कोई युद्ध जीत लिया हो. एथेंस में भारत की विजयपताका लहराने वाले राज्यवर्धन की कीर्तिगाथा के कई आयाम हैं जो यूनान से लेकर थार के बियाबान रेगिस्तान तक फैले हुए हैं. राठौर का जन्म सीमावर्ती जैसलमेर में हुआ तो गारबदेसर उनका पुश्तैनी गाँव है. जयपुर अब उनका घर है तो दिल्ली उनकी कर्मभूमि. 9 ग्रेनेडियर्स में तैयारी
जयपुर में सैनिकों ने 9 ग्रेनेडियर्स को राठौर की तस्वीरों से सजाया है और जगह-जगह शाबास राठौर के बैनर लगाए हैं. राठौर इसी इकाई से संबंधित हैं और उनके पिता कर्नल लक्ष्मण सिंह राठौर इस इकाई का नेतृत्व कर चुके हैं. इसी यूनिट के सूबेदार अजमेर सिंह ने राज्यवर्धन को घुटनों के बल चलते देखा है. कश्मीर घाटी में उनके साथ काम कर चुके अजमेर सिंह बताते हैं कि राठौर सदा गाइड के रूप में आगे चलते थे. सैनिक रिछपाल शेखावत कहते हैं,"राठौर का ध्येय वाक्य रहा है कि सैनिक की गोली हमेशा निशाने पर लगनी चाहिए". 9 ग्रेनेडियर्स के कमांडिंग अधिकारी जयसिंह बताते हैं कि यूनिट ने राज्यवर्धन और उनके परिवार को सम्मान के लिए बुलाया है क्योंकि ये उनकी अपनी यूनिट है. सैनिक पृष्ठभूमि
राज्यवर्धन सिंह के परिवार की तीन पीढ़ियाँ सेना से जुड़ी रही हैं. रेगिस्तान के एक जागीरदार परिवार से जुड़े हुए राज्यवर्धन के परदादा शार्दूल सिंह और दादा मेजर उदय सिंह सेना में रहे हैं. उनके ताऊ जगमाल सिंह ब्रिगेडियर रहे हैं तो पिता कर्नल. राज्यवर्धन की पत्नी गायत्री डॉक्टर हैं और वे भी सेना में मेजर हैं. चिली घर परिवार में 'चिली' के नाम से लोकप्रिय राज्यवर्धन ने निशानेबाज़ी में रूचि देर से लेना शुरू किया मगर देखते-देखते ही अपनी योग्यता के झंडे गाड़ दिए. उनके पारिवारिक मित्रों का कहना है कि उन्हें ये नाम उनके मामा ने दिया था. चिली चूँकि अकेले पुत्र थे इसलिए माँ मंजू राठौर ने हमेशा उनका ध्यान रखा. पुरस्कार राजस्थान सरकार ने राज्यवर्धन को उनके सम्मान में 11 लाख रूपए और साढ़े आठ लाख रूपए का मकान देने का एलान किया है. मगर राज्य कांग्रेस के प्रवक्ता रघु शर्मा कहते हैं कि राज्यवर्धन की उपलब्धि के मुक़ाबले ये राशि बहुत कम है.
चिली के परिजन भी इस सम्मान की घोषणा पर मायूस दिखाई दिए. मगर राज्यवर्धन के पिता लक्ष्मण सिंह राठौर कहते हैं,"एक खिलाड़ी का सम्मान कैसे हो ये सरकार और समाज का अपना विषय है और वे कुछ नहीं कहेंगे". मगर राज्य के खेल मंत्री युनूस ख़ान का कहना था कि सरकार इस होनहार खिलाड़ी के सम्मान में कोई कमी नहीं रखेगी. मरूस्थल की माटी में सने इस निशानेबाज़ ने रजत पदक से भारत को जो यश दिलवाया है उसकी गूँज बहुत दूर और देर तक सुनाई देती रहेगी. आख़िर थार के अनजाने गाँव से उठकर सिकंदर महान की धरती पर भारत की महत्ता का परचम लहराना कोई मामूली बात तो नहीं ही है. |
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