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मंगलवार, 17 अगस्त, 2004 को 12:51 GMT तक के समाचार
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राठौर के निशाने से खुला भारत का खाता
राज्यवर्धन सिंह राठौर
राठौर निशानेबाज़ी में ओलंपिक में कोई पदक जीतनेवाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं
भारत के निशानेबाज़ राज्यवर्धन सिंह राठौर ने एथेंस ओलंपिक में भारत के लिए पहला पदक जीता है.

उन्होंने डबल ट्रैप वर्ग में रजत पदक जीता.

एथेंस से बीबीसी संवाददाता रिफ़त जावेद ने बताया है कि इस उपलब्धि के बाद राठौर भावुक हो उठे और उनकी आँखें नम हो गईं.

राठौर ने कहा,"देखिए ये तो एक मौक़ा है जो बड़ा है..मैं तो एक छोटा इंसान हूँ..मुझे लगता है कि मेरे लिए भावुक होना स्वाभाविक है".

उन्होंने का कि वे पदक जीतने पर खुश हैं मगर अच्छा होता अगर उनसे पहले मुक़ाबलों में उतरे निशानेबाज़ भी देश के लिए पदक जीत पाते.

 देखिए ये तो एक मौक़ा है जो बड़ा है..मैं तो एक छोटा इंसान हूँ..मुझे लगता है कि मेरे लिए भावुक होना स्वाभाविक है
राज्यवर्धन सिंह राठौर

उन्होंने कहा,"मुझे पदक जीतने पर खुशी ज़रूर मिली मगर अच्छा होता अगर मैं भारत के लिए पदक जीतने वाला पहला निशानेबाज़ नहीं होता..औरों को भी जीतना चाहिए था".

राठौर ने उम्मीद जताई कि उनके पदक जीतने से भारतीय दल का हौसला बढ़ेगा और वे देश के लिए पदक ला सकेंगे.

उन्होंने कहा,"मैं अगर भारत में होता और लिएंडर पेस या कर्नम मल्लेश्वरी को पदक मिलता तो मुझे बड़ी खुशी होती..मुझे लगता है कि अब मेरी सफलता के बाद और भारतीय खिलाड़ी भी पदक ला सकेंगे".

 मुझे पदक जीतने पर खुशी ज़रूर मिली मगर अच्छा होता अगर मैं भारत के लिए पदक जीतने वाला पहला निशानेबाज़ नहीं होता..औरों को भी जीतना चाहिए था
राज्यवर्धन सिंह राठौर

राठौर ने कहा कि उनपर क्वालीफ़ाइंग दौर में थोड़ा दबाव था और उन्हें लग रहा था कि फ़ाइनल में जगह बनाने में मुश्किल आएगी.

उन्होंने कहा,"मेरे लिए ये बेहद अपमानजनक बात होती क्योंकि पिछले डेढ़ साल में दुनिया का ऐसा कोई बड़ा मुक़ाबला नहीं है जिसके फ़ाइनल में मैं ना पहुँच सका".

राठौर ने डबल ट्रैप स्पर्धा के क्वालीफ़ाइंग और अंतिम दौर में कुल 179 अंक हासिल किए.

इस स्पर्धा में संयुक्त अरब अमीरात के अलमक्तुम को स्वर्ण पदक मिला जिन्हें दोनों दौरों में कुल 189 अंक मिले.

चीन के वांग ज़ेंग ने 178 अंक लेकर कांस्य हासिल किया.

शानदार उपलब्धि

ओलंपिक खेलों के इतिहास में स्वतंत्र भारत में पहली बार किसी भारतीय ने रजत पदक जीता है.

इससे पहले 1900 में पेरिस ओलंपिक में कोलकाता के एक एंग्लो-इंडियन नॉर्मन प्रीचार्ड ने बाधा दौड़ में दो रजत पदक जीते थे.

भारत के लिए ओलंपिक में कोई व्यक्तिगत पदक जीतनेवाले वे चौथे भारतीय खिलाड़ी हैं.

राठौर इसके पहले भारत के लिए निशानेबाज़ी में कई पदक जीते हैं मगर एथेंस में वे पहली बार ओलंपिक के अखाड़े में उतरे.

उनसे पहले 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में ख़ाशाभा जाधव ने कुश्ती में, लिएंडर पेस ने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में टेनिस में और कर्नम मल्लेश्वरी ने 2000 के सिडनी ओलंपिक में भारोत्तोलन में पदक जीते थे.

मगर इन तीनों खिलाड़ियों को कांस्य पदक ही मिल पाया था.

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