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'इस सिरीज़ से ज़रूर दिल जीते जाएँगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट सिरीज़ शुरु होने से पहले पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इमरान ख़ान ने विश्वास जताया है कि इस सिरीज़ से ज़रूर दिल जीते जाएँगे. इससे पहले भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने टीम को एक बल्ला पेश किया जिस पर संदेश था, "सिर्फ़ मैच ही नहीं, वहाँ लोगों का दिल भी जीतने की कोशिश कीजिएगा." उनका ये भी कहना था कि जब दोनो देशों का मुकाबला होता तो वही टीम जीतती है जो ज़्यादा दबाव झेल सकती है. 'शांति प्रक्रिया को लाभ' इमरान ख़ान का कहना था कि सब पाकिस्तानी बहुत देर से इस सिरीज़ का इंतज़ार कर रहे थे और दर्शकों में इससे पहले कभी इतना उत्साह नज़र नहीं आया. उनका कहना था कि ये इसी बात से पता चलता है कि सब मैचों की टिकटें बिक चुकी हैं और सबको मैच शुरु होने का इंतज़ार है.
इमरान ख़ान का कहना था जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच मैच हुए, जब सरकारों के बीच तनाव था तो वह तनाव क्रिकेट के मैदान पर भी नज़र आया. उन्होंने कहा कि जब दोनो सरकारें शांति की ओर बढ़ रही होती हैं तो क्रिकेट भी इस प्रक्रिया में लाभ पहुँचाता है और दोनो देशों की जनता को करीब लाता है. 'दिल जीते जाएँगे' उनका कहना था, "जब भारत से पत्रकार और भारतीय समाज में प्रभाव रखने वाले लोग पाकिस्तान आएँगे और लोगों से मिलेंगे तो अच्छी यादें लेकर जाँएगे. यकीनन इस सिरीज़ से दिल जीते जाएँगे.'' जब पूछा गया कि किसका पलड़ा भारी है, तो इमरान ने कहा, "पहले भी दोनो देशों के बीच सिरीज़ हुई तो सामने आया कि ज़रूरी नहीं कि कागज़ पर जो टीम बेहतर लगी या 'फ़ेवरिट' टीम थी, उसी ने सिरीज़ जीती.'' उनका कहना था कि 1979 में पाकिस्तान 'फ़ेवरिट' टीम थी लेकिन सिरीज़ भारत ने जीती और इसी तरह 1987 भारत के पास ज़बरदस्त बल्लेबाज़ थे लेकिन जीत पाकिस्तान की हुई. उनका कहना था, "कागज़ पर हिंदुस्तान की टीम कैसी भी लगे लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच मैचों में वही टीम जीतती है जो दबाव बेहतर झेल सकती है." |
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