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वीज़ा नहीं मिलने से मायूसी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट सिरीज़ देखने का उतावलापन दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. लेकिन बुधवार को भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को इस बारे में कुछ मायूसी हुई है. बुधवार को दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के सामने वीज़ा लेने वालों की लंबी लाइन लगी रही लेकिन उन्हें मायूस लौटना पड़ा. दूसरी तरफ़ समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ बुधवार को पाकिस्तानी उच्चायोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि वीज़ा देने की प्रक्रिया गुरूवार से शुरू कर दी जाएगी. प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान क़रीब आठ हज़ार लोगों को मैच देखने के लिए वीज़ा देगा. आयोग पहले ही कह चुका है कि जो लोग टिकट ख़रीद लेंगे उन सभी को वीज़ा जारी करने की कोशिश की जाएगी. आयोग ने कहा कि वह अमृतसर में अपना एक वीज़ा दफ़्तर खोलने की योजना बना रहा है लेकिन अगर भारत सरकार ने इसकी इजाज़त नहीं दी तो दिल्ली से ही सारे वीज़ा जारी किए जाएँगे. मायूसी दरअसल बुधवार पहला दिन था जब वीज़ा देने का काम शुरू होना था और हालाँकि कुछ अर्ज़ियाँ ली भी गईं लेकिन किसी को वीज़ा नहीं मिल पाया.
अधेड़ उम्र के एक क्रिकेट प्रशंसक सुरिन्दर मोहन इससे ख़ासे नाराज़ दिखे. सुरिन्दर मोहन ने लाहौर में होने वाले एक दिवसीय मैच के लिए पाँच टिकट ख़रीदे हैं और उनके परिवार के कई सदस्य इस मैच को देखने के ख़्वाहिशमंद हैं और उनमें उनके एक 90 वर्षीय चाचा भी हैं. सुरिन्दर मोहन की शिकायत थी, "मैं यहाँ सुबह छह बजे आकर खड़ा हो गया था लेकिन दिन भर वीज़ा अधिकारियों की तरफ़ से कोई सूचना नहीं मिली." "मैंने इंटरनेट के ज़रिए पाँच टिकट ख़रीदे हैं और मैंने अपने पासपोर्टों का विवरण भी पहले ही भेज दिया है लेकिन मुझे वीज़ा के लिए काफ़ी तकलीफ़ें उठानी पड़ रही हैं." सुरिन्दर मोहन लाहौर जाकर यह मैच देखने के लिए बहुत उत्साहित हैं, "भारत और पाकिस्तान के इतिहास में यह बहुत अनोखा समय होगा क्योंकि क़रीब 14 साल के बाद भारतीय टीम पाकिस्तान का दौरा कर रही है." "हालाँकि ये मैच हम टेलीविज़न पर भी देख सकते हैं लेकिन मैदान पर देखने और अपनी टीम की हौसला अफ़ज़ाई करने का मज़ा कुछ और ही है. और हाँ, पाकिस्तान घूमने का यह एक बेहतरीन मौक़ा तो होगा ही." ग़ौरतलब है कि भारतीय टीम का पाकिस्तान दौरा 11 मार्च से शुरू हो रहा है जब अभ्यास मैच खेला जाएगा. शिकायतें सुरिन्दर मोहन अकेले ऐसे दर्शक नहीं थे जिन्हें वीज़ा नहीं मिलने की शिकायत थी. आफ़ताब बेग एक माइक्रोबॉयोलिजिस्ट हैं और उन्होंने हरिद्वार से वीज़ा लेने के लिए दिल्ली का रुख़ किया.
"मैं पाकिस्तान में यह इतिहास बनते हुए ख़ुद देखना चाहता हूँ जब भारतीय टीम कराची में पाकिस्तानी टीम के साथ मैच खेलेगी." आफ़ताब बेग ने बताया कि पाकिस्तानी वीज़ा अधिकारियों ने उन्हें कुछ जानकारी दी जिससे उन्हें कुछ तसल्ली हुई. कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्हें बुधवार को वीज़ा नहीं मिलने से कोई परेशानी नहीं हुई. दिल्ली के एक निवासी कलीम ख़ान का कहना था कि यह हाय तौबा आख़िर क्यों हो रही है? "मैं लाहौर क्रिकेट देखने नहीं जा रहा हूँ, लाहौर में मेरे रिश्तेदार रहते हैं जिनके पास मैं जा रहा हूँ. और वीज़ा मिलने की अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा हूँ, मुझे तो कोई परेशानी नहीं है." |
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