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मंगलवार, 23 दिसंबर, 2003 को 01:53 GMT तक के समाचार
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सचिन पर भारी पड़ते द्रविड़

द्रविड़ और तेंदुलकर
द्रविड़ ने टेस्ट मैचों में तेंदुलकर से बेहतर प्रदर्शन किया है

भारत में हाल ही में आए एक साप्ताहिक ने राहुल द्रविड़ की हाथ उठाए फ़ोटो छापी है और उस पर सिर्फ़ एक शब्द लिखा है 'गॉड' यानी भगवान.

इससे कम से कम एक चीज़ तो दिखने ही लगी है कि भारतीय क्रिकेट प्रेमी अब ये बात मानने लगे हैं कि सचिन तेंदुलकर ही दुनिया के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी नहीं हैं और ख़ासतौर पर टेस्ट क्रिकेट में.

फिर हाल ही में टेस्ट खिलाड़ियों की जो रैंकिंग आई है उससे भी ये बात पुष्ट होती है.

दस साल पहले जब ये रैंकिंग लाई गई थी उसके बाद से पहली बार तेंदुलकर पहले दस खिलाड़ियों में कहीं दिखते भी नहीं हैं.

दक्षिण अफ़्रीका में ब्रायन लारा ने और ऑस्ट्रेलिया में राहुल द्रविड़ ने दोहरा शतक लगाकर पहले दोनों स्थानों पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

तेंदुलकर को इस बार चौदहवाँ स्थान मिला है.

सचिन ने 109 टेस्ट मैचों में 55.75 का औसत बनाया है और वर्तमान क्रिकेट जगत में शायद यह सबसे बेहतर भी हो मगर नवंबर 2002 के बाद से वह टेस्ट क्रिकेट में एक भी शतक नहीं लगा सके हैं.

वहीं पिछले दो साल में द्रविड़ ने तो ज़बरदस्त प्रदर्शन किया है. उन्होंने 20 टेस्ट मैचों में 69.62 के औसत से 2019 रन बनाए हैं.

इसमें तीन दोहरे शतक सहित कुल सात शतक हैं.

वहीं इसी दौरान तेंदुलकर ने सिर्फ़ 46.91 के औसत से 1501 रन बनाए.

तेंदुलकर की वापसी

वैसे तेंदुलकर भले ही अभी नहीं खेल पा रहे हों मगर पूर्व क्रिकेटर मनिंदर सिंह के अनुसार तेंदुलकर की वापसी ज़रूर होगी.

द्रविड़ और तेंदुलकर
तेंदुलकर के साथ अब द्रविड़ के भी काफ़ी चाहने वाले हो गए हैं

वह कहते हैं, "सचिन कोई भगवान नहीं हैं. ये उनका पहला बुरा दौर नहीं है. मगर वह पहले भी इससे बाहर आए हैं और इस बार भी ऐसा ही होगा."

उधर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ग्रेग चैपल का कहना है कि सचिन से इतनी उम्मीदें रहती हैं कि उन पर दबाव बढ़ जाता है.

वह कहते हैं, "उनकी प्रतिभा ख़त्म नहीं हुई है. मुझे तो ऐसा लगता है जैसे वह ख़ुद अपनी ही शंकाओं से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हों."

वैसे भले ही तेंदुलकर टेस्ट क्रिकेट में नहीं चल रहे हों मगर एकदिवसीय क्रिकेट में उनके फ़ॉर्म का कोई जवाब नहीं है.

उन्होंने 2002 में वेस्टइंडीज़ और इंग्लैंड में और उसके बाद न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के साथ त्रिकोणीय सिरीज़ में बेहतरीन प्रदर्शन किया.

फिर वह इस साल हुए विश्व कप में मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट भी रहे.

वैसे उनकी रनों की भूख का तो कोई अंत नहीं है मगर ऐसा लगता है कि अब आकर्षण में वह अकेले ही नहीं रहेंगे क्योंकि इसमें उनके हिस्सेदार के तौर पर द्रविड़ भी आ रहे हैं.

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