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बुधवार, 12 नवंबर, 2003 को 01:06 GMT तक के समाचार
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बंगलौर में भारत और ऑस्ट्रेलिया की भिड़ंत
सौरभ गांगुली
गांगुली इस सिरीज़ में पहली बार मैदान पर उतरने को तैयार

तीन देशों की टूर्नामेंट के एक महत्वपूर्ण मैच में बुधवार को बंगलौर में भारत का मुक़ाबला विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से होगा.

पिछले दो मैचों में लगातार हार के बाद भारतीय टीम का मनोबल गिरा हुआ है लेकिन टीम के लिए अच्छी बात यह है कि कप्तान सौरभ गांगुली पहली बार इस टूर्नामेंट में पिच पर उतरेंगे.

हालाँकि अगर भारत इस मैच में ऑस्ट्रेलिया से हार भी जाता है तो भी फ़ाइनल में पहुँचने की उसकी उम्मीद ख़त्म नहीं होगी क्योंकि उसका आख़िरी लीग मैच शनिवार को न्यूज़ीलैंड के साथ होना है और इसी के परिणाम पर सब कुछ निर्भर करेगा.

लेकिन अगर भारत की जीत होती है तो उससे भारतीय खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा.

दिन-रात के इस मैच में गांगुली के साथ-साथ आशीष नेहरा और स्पिनर अनिल कुंबले अपने घरेलू मैदान पर उतरेंगे.

न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ कटक में अपने पिता के निधन के कारण कुंबले नहीं खेल पाए थे. भारत के लिए गांगुली और कुंबले की मौजूदगी अच्छा संकेत हैं.

दरअसल ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मुंबई में और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ कटक में भारतीय बल्लेबाज़ी बुरी तरह लड़खड़ा गई थी.

बल्लेबाज़ी मज़बूत

अब कप्तान सौरभ गांगुली की टीम में वापसी के बाद इसमें कोई शक नहीं कि बल्लेबाज़ी क्रम और मज़बूत होगा.

अपने घरेलू मैदान पर कुंबले के प्रदर्शन पर भी नज़र होगी

राहुल द्रविड़ विकेटकीपर के रूप में आज़माए जाएँगे क्योंकि गांगुली टीम में अतिरिक्त विकेटकीपर को मौक़ा देने के पक्ष में नहीं हैं.

इसकी पूरी संभावना है कि गेंदबाज़ी के मोर्चे पर ज़हीर ख़ान का साथ निभाएँगे आशीष नेहरा.

अगर ऐसा हुआ तो अजित अगरकर को टीम में जगह नहीं मिलेगी. हालाँकि उन्होंने सिरीज़ में कुल मिलाकर अच्छा ऑल राउंड प्रदर्शन किया है.

स्पिन आक्रमण की कमान होगी अनिल कुंबले और स्पिनर हरभजन सिंह के हाथों में.

बंगलौर की पिच के बारे में कहा जा रहा है कि यह बल्लेबाज़ों की मदद करेगी इसलिए पहले बल्लेबाज़ी करने वाली टीम को फ़ायदा मिल सकता है.

ऑस्ट्रेलिया की टीम पाँच में से चार मैच जीत चुकी है और उसके हौसले बुलंद हैं.

न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ अपने आख़िरी मैच में तो एडम गिलक्रिस्ट और मैथ्यू हेडन जैसे ख़िलाड़ियों की ग़ैर मौजूदगी में भी उसने जीत हासिल की थी.

ग्लेन मैकग्रा, जेसन गिलेस्पी और ब्रेट ली जैसे गेंदबाज़ों के बिना टूर्नामेंट में हिस्सा लेने आई ऑस्ट्रेलियाई टीम पर शुरू में काफ़ी दबाव था.

लेकिन अपने मौजूदा खिलाड़ियों के दम पर ही टीम ने ज़बरदस्त प्रदर्शन किया है.

नाथन ब्रैकन, ब्रैड विलियम्स, एंडी बिकल, इयन हार्वी और ब्रैड हॉग जैसे गेंदबाज़ों के साथ भी ऑस्ट्रेलिया की टीम ने भारत की पिच पर अपना जादू दिखाया है.

ऑस्ट्रेलिया के लिए बुधवार का मैच कोई मायने नहीं रखता क्योंकि उसे पहले ही फ़ाइनल में जगह मिल चुकी है.

फिर भी फ़ाइनल को देखते हुए वे भारत के ख़िलाफ़ मैच को आसानी से नहीं लेंगे और यहीं भारत को मुश्किल आ सकती है.

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