कश्मीर में रणजी से ज़्यादा लोकप्रिय ये लीग

कश्मीर क्रिकेट लीग

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    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए

हिलाल अहमद बट 40 किलोमीटर दूर कश्मीर घाटी के मागम गांव से श्रीनगर तक क्रिकेट देखने आते हैं.

कश्मीर विश्वविद्यालय के क्रिकेट ग्राउंड में पिछले 20 दिनों से डाउन टाउन क्रिकेट लीग के मैच चल रहे हैं.

उन्होंने कश्मीर में कभी इस तरह का टूर्नामेंट नहीं देखा था और यहाँ उन्हें परवेज़ रसूल जैसे खिलाड़ियों को नज़दीक से देखने का मौक़ा मिल रहा है.

इस तरह के टूर्नामेंट पिछले तीन वर्षो से कश्मीर में आयोजित हो रहे हैं और क्रिकेट प्रेमियों की अच्छी-खासी तादाद इन्हें देखने पहुंचती है.

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कश्मीर क्रिकेट

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ऐसे ही एक क्रिकेट प्रेमी हिलाल क्रिकेटर परवेज़ रसूल के प्रशंसक हैं, जो क्रिकेट लीग में खेल रहे हैं.

हिलाल बताते हैं, "मैंने सुना कि यहाँ मैच चल रहा है और मैं परवेज रसूल को देखने आ गया."

युवा खिलाड़ियों के लिए तो इससे बेहतर जगह कश्मीर में दूसरी कोई नहीं जहाँ रसूल, आबिद नबी और मिथुन जैसे खिलाड़ियों को एक साथ खेलने का मौक़ा मिल रहा है.

परवेज़ रसूल

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इमेज कैप्शन, क्रिकेटर परवेज़ रसूल.

टूर्नामेंट आयोजकों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य नए खिलाड़ियों को एक प्लेटफ़ॉर्म मुहैया कराना है.

श्रीनगर के डाउन टाउन निवासी 37 वर्षीय नसीर अहमद ने तीन वर्ष पहले अपने कुछ दोस्तों के साथ ऐसे टूर्नामेंट्स आयोजित करने का मन बनाया था.

नसीर कहते हैं, "हमारा मक़सद नए खिलाडियों को अपना हुनर दिखाने का मौक़ा देना है. कश्मीर में क्रिकेट के हवाले से काफ़ी हुनर मौजूद है. इस टूर्नामेंट में सिर्फ जम्मू कश्मीर के ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों के रणजी खिलाड़ी भी खेल रहे हैं."

घाटी में क्रिकेट टूर्नामेंट

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नसीर के मुताबिक़, ऐसे एक टूर्नामेंट पर कम से कम 40 लाख रुपए का खर्च आता है.

पिछले 55 वर्षो में जम्मू-कश्मीर टीम ने रणजी के 249 मैच में से सिर्फ़ 21 मैच जीते हैं.

साल 2014-15 की रणजी ट्रॉफी के दौरान जम्मू-कश्मीर ने मुंबई टीम को उन्हीं के मैदान में हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी.

वर्ष 1983 और 1987 में कश्मीर में दो अंतरराष्ट्रीय मैच खेले गए थे, दोनों ही मुक़ाबलों में भारत को शिकस्त झेलनी पड़ी थी.

परवेज़ रसूल, मिथुन मन्हास, आबिद नबी जैसे खिलाड़ी डाउन टाउन लीग जैसे टूर्नामेंट्स को राज्य क्रिकेट में एक क्रांतिकारी क़दम मानते हैं.

बड़ा बदलाव

कश्मीर क्रिकेट लीग

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परवेज रसूल ने बीबीसी को बताया, "पिछले तीन सालों से कश्मीर में ऐसे टूर्नामेंट्स से कई खिलाड़ी रणजी तक पहुंचे हैं. कश्मीर में तो क्रिकेट का जुनून है."

लेकिन परवेज़ को शिकायत है कि सरकार कश्मीर में क्रिकेट के ढांचे को बेहतर बनाने के लिए आगे नहीं आ रही है.

वे कहते हैं, "दूसरे राज्यों के मुक़ाबले हमारे यहाँ 10 प्रतिशत भी क्रिकेट का ढांचा नहीं है. हर ज़िले में एक कोचिंग कैंप होना चाहिए."

आमिर सुहैल

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इमेज कैप्शन, आमिर सुहैल

लीग में खेल रही एक टीम के कप्तान आमिर सुहेल को इस बात की ख़ुशी है कि वह परवेज़ रसूल जैसे खिलाड़ियों से साथ खेल रहे हैं. सुहेल अगले वर्ष रणजी खेलने जाएंगे.

सुहेल कहते हैं, "ये तो मुझ जैसे खिलाड़ियों के लिए बहुत बड़ी बात है कि हम परवेज़ रसूल, मिथुन और समी उल्लाह जैसे खिलाड़ियों के साथ खेल रहे हैं. अब जो यहाँ अच्छा प्रदर्शन करेगा, वही रणजी तक जा सकता है.”

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