लोग पूछते थे- 'द्युति, तुम लड़की हो या लड़का'

इमेज स्रोत,
मुझे पता चला कि मेरा फैसला आने वाला है, लेकिन ये नहीं पता था कि कितने बजे...
जब मैंने ऑनलाइन देखा तो मालूम हुआ कि <link type="page"><caption> मैं जीत </caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/sport/2015/07/150728_dutee_chand_athlete_iaaf_hormone_ban_sk" platform="highweb"/></link>गई.
अब मैं ट्रैक पर वापिस आ जाऊंगी और अपने देश और स्टेट का नाम ऊंचा करूंगी. बहुत अच्छा लगा मुझे!
मैंने कभी ये नहीं सोचा कि मैं हार जाऊँगी.
मैंने कभी कुछ गलत नहीं किया, तो मुझे लगता था कि मेरे साथ जो होगा, सही ही होगा.
जज साहब ने अच्छा किया कि मेरी सारी बात अच्छी तरह पढ़ कर मुझे न्याय दिया.
'अब एथलीट्स को वो नहीं सुनना पड़ेगा'

इमेज स्रोत, AFP
मुझे खासकर इसलिए अच्छा लगा कि अब मेरे जैसे एथलीट्स को ट्रैक पर दुख नहीं झेलना पड़ेगा.
जो बुरी बातें मुझे सुननी पड़ीं- ये लड़की है या लड़का- ये किसी एथलीट को नहीं सुनना पड़ेगा.
मेरी मम्मी ने भी कहा कि भगवान हमारे साथ थे इसलिए सब कुछ ठीक हुआ.
अब तुम सब कुछ भूल जाओ, और नए साल से एक बार फिर नए तरीके से ट्रेनिंग शुरू करो.
फिर एक दिन ज़रूर ऐसा आएगा कि तुम ऑलंपिक में जाकर मेडल जीतोगी.
'लोगों ने मुझे सपोर्ट किया'

इमेज स्रोत,
मुझमें इस लड़ाई के लिए साहस इसलिए आया क्योंकि लोग मुझे सपोर्ट कर रहे हैं.
इसलिए मुझमें साहस आया कि मैं इसमें अकेली नहीं हूं.
फिर क्यों डरूं? मैंने केस लड़ा और जीत कर दिखाया.
'ट्रेनिंग का नुकसान हुआ'
इस पूरे मानसिक तनाव के कारण मैं ट्रेंनिंग अच्छे से नहीं कर पाई लेकिन अभी ऑलंपिक शुरू होने से पहले सात महीने हैं मेरे हाथ में.
और भारत सरकार ने जो स्कीम निकाली है उसके तहत यूएस भेजा जाएगा ट्रेनिंग के लिए.
अगर मैं ट्रेनिंग कर लेती हूं, तो मैं बहुत अच्छा पर्फॉर्मेंस करके दिखाउंगी.
'बहुत बुरी बातें सुननी पड़ीं'

इमेज स्रोत,
इतनी लंबी कानूनी लड़ाई में सबसे बड़ा नुकसान मेरी ट्रेनिंग का ही हुआ है. बहुत बुरी बातें सुननी पड़ीं मुझे.
मैं कहीं जा नहीं पाई. जितना नाम कमाया था भारत में, वो नाम सब चला गया.
अब फिर से सब शुरू करना होगा. ट्रेनिंग भी फिर से शुरू करनी पड़ेगी. बहुत नुकसान हो गया मेरा.
जो लोग मुझे बहुत प्यार करते थे वो ये सोचने लगे कि ये लड़की है या लड़का.
'दोस्त भी नज़रें चुराते थे'
मुझे बहुत सुनना पड़ा. लोग फोन करके पूछते थे कि द्युति तुम रियल में क्या हो लड़की या लड़का.
फिर जो मेरी दोस्त थीं, उनका परिवार भी पूछता था कि ये लड़की है या लड़का.
हम अगर अपनी लड़की को इसके पास भेजते हैं तो गलत तो नहीं होगा.
दोस्त भी मुझसे बचने लगे.
जैसे ट्रेनिंग के दौरान जिस हॉस्टल में हम रहते हैं, उसमें दो लड़कियां एक कमरे में रहती हैं, लेकिन मुझे अलग से एक कमरा दिया गया.
मुझसे भेदभाव किया गया. लेकिन अब मैं फिर से यहां हैदराबाद में ट्रेनिंग शुरू कर रही हूं.
(द्युति चांद की बीबीसी की रूपा झा से बातचीत पर आधारित)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक </caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link>करें. आप हमें<link type="page"><caption> फ़ेसबुक </caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link>और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)













