पिंच हिटर ने बदल दिया क्रिकेट का चेहरा

इमरान ख़ान

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क्रिकेट विश्व कप के इतिहास की तीसरी कड़ी में 1992 और 1996 के महाकुंभ की दिलचस्प यादें.

वर्ष 1992 में हुए विश्व कप की मेजबानी का मौक़ा ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड को मिला.

इस विश्व कप में कई बदलाव किए गए. पहली बार दिन-रात के मैच हुए.

रंगीन कपड़े, उजली गेंदें

मार्क ग्रेटबैच और दीपक पटेल

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मैच में खिलाड़ी रंगीन कपड़े पहनकर उतरे और उजली गेंदों का भी इस्तेमाल हुआ.

अब पहले 15 ओवर के दौरान 30 गज के दायरे से बाहर सिर्फ़ दो खिलाड़ी ही रह सकते थे.

इस नए नियम के कारण पिंच हिटर खिलाड़ी का जन्म हुआ और इस विश्व कप में इयन बॉथम ने यह तमग़ा हासिल किया. इसी विश्व कप में न्यूज़ीलैंड ने स्पिनर से गेंदबाज़ी की शुरुआत करके एक और नया प्रयोग किया.

रंगभेद की नीति के कारण लगी पाबंदी हटने के बाद पहली बार दक्षिण अफ़्रीका की टीम ने इस विश्व कप में हिस्सा लिया. नौ टीमों ने इस विश्व कप में हिस्सा लिया.

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राउंड-रॉबिन के आधार पर 36 मैच खेले गए और चार शीर्ष टीमों को सेमी फ़ाइनल में प्रवेश मिला.

पहली बार विश्व कप में खेल रही दक्षिण अफ़्रीका की टीम ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और पाकिस्तान, न्यूज़ीलैड और इंग्लैंड के साथ उसे सेमीफ़ाइनल में जगह मिली.

भारत का ख़राब प्रदर्शन

भारत की टीम सिर्फ़ दो मैच ही जीत पाई. हाँ, उसने पाकिस्तान को हराने में ज़रूर सफलता पाई. इसके अलावा उसे ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ ही जीत मिल पाई.

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सेमीफ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड का मुक़ाबला पाकिस्तान से हुआ. पाकिस्तान को जीत के लिए 263 रनों का लक्ष्य मिला जिसे उन्होंने हासिल कर पहली बार फ़ाइनल में जगह बनाई.

दूसरे सेमीफ़ाइनल में बारिश ने दक्षिण अफ़्रीका की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.

बारिश के कारण लक्ष्य फिर से निर्धारित करने के नए नियम की गाज दक्षिण अफ़्रीका पर गिरी. एक समय दक्षिण अफ़्रीका को जीत के लिए 13 गेंद पर 22 रन चाहिए थे.

लेकिन बारिश क्या आई, लक्ष्य फिर से निर्धारित हुआ और फिर दक्षिण अफ़्रीका को एक गेंद पर 21 रन बनाने का लक्ष्य दिया गया.

और इस तरह 20 रन से हारकर दक्षिण अफ़्रीका की उसके पहले विश्व कप से दुर्भाग्यपूर्ण विदाई हुई.

पाकिस्तान चैंपियन

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फ़ाइनल में पाकिस्तान के सामने थी इंग्लैंड की टीम.

पाकिस्तान ने 50 ओवर में छह विकेट पर 249 रन बनाए.

जवाब में इंग्लैंड की शुरुआत की ख़राब रही और उसके चार विकेट सिर्फ़ 69 रन पर गिर गए.

पाकिस्तान ने 22 रन से जीत हासिल की और पहली बार विश्व कप का ख़िताब जीता.

1996 विश्व कप

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वर्ष 1996 में विश्व कप की मेज़बानी भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने संयुक्त रूप से की.

इस विश्व कप में 12 देशों ने हिस्सा लिया. संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स और कीनिया ने पहली बार विश्व कप में भाग लिया.

कीनिया ने वेस्टइंडीज़ को हराकर सबको चौंकाया.

सभी 12 टीमों को छह-छह के दो ग्रुपों में बाँटा गया. इसी विश्व कप से तीसरे अंपायर की भी भूमिका शुरू हुई.

श्रीलंका में खेलने से इनकार

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इस विश्व कप में श्रीलंका में होने वाले मैचों को लेकर विवाद भी हुआ. विश्व कप के कुछ दिन पहले संदिग्ध तमिल विद्रोहियों के हमले में 90 लोग मारे गए थे.

ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ ने श्रीलंका में जाकर मैच खेलने से इनकार कर दिया.

आईसीसी ने इन दोनों मैच का विजेता श्रीलंका को घोषित कर दिया. श्रीलंका को इसका लाभ मिला और ग्रुप में उसकी टीम शीर्ष स्थान पर रही.

ग्रुप बी में दक्षिण अफ़्रीका ने अपने सभी मैच जीते.

ईडन गार्डन में बवाल

इयान बॉथम

भारत ने क्वॉर्टरफ़ाइनल में पाकिस्तान को 39 रनों से हराकर विश्व कप में पाकिस्तान के ख़िलाफ अपराजेय रहने का रिकॉर्ड कायम रखा.

कोलकाता के ईडन गार्डन में भारत और श्रीलंका के बीच हुआ सेमीफ़ाइनल मैच काफ़ी नाटकीय रहा. एक लाख 10 हज़ार से ज़्यादा संख्या में मौजूद दर्शक भारत की तय मानी जा रही हार पचा नहीं पाए और हुडदंग पर उतर आए.

श्रीलंका के 252 रनों के जवाब में भारत ने 120 रन पर अपने आठ विकेट गँवा दिए थे.

पिच तो ऐसी हो गई कि गेंद कब कहाँ घूम रही थी, बल्लेबाज़ों के पल्ले कुछ भी नहीं पड़ रहा था. हुड़दंग के कारण आईसीसी ने श्रीलंका को विजेता घोषित कर दिया. हालाँकि उनकी जीत तो तय ही थी.

श्रीलंका चैंपियन

दूसरे सेमीफ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने रोमांचक मुक़ाबले में वेस्टइंडीज़ को पाँच रन से हरा दिया.

लाहौर में खेला गया फ़ाइनल मैच एकतरफ़ा रहा. ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए 241 रन बनाए लेकिन श्रीलंका ने तीन विकेट के नुक़सान पर ही लक्ष्य हासिल कर लिया.

किसी भी विश्व कप फ़ाइनल में एक खिलाड़ी ने इतना दमख़म नहीं दिखाया था, जैसा कि इस फ़ाइनल में अरविंद डी सिल्वा ने दिखाया. उन्होंने दो कैच पकड़े, तीन विकेट लिए और नाबाद 107 रनों की पारी खेली. श्रीलंका ने पहली बार विश्व कप का ख़िताब हासिल किया.

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