वेलिंग्टन वनडेः क्या भारत का खाता खुलेगा?

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
भारतीय क्रिकेट टीम शुक्रवार को न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ मौजूदा एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट सिरीज़ का पांचवां और आख़िरी मैच वेलिंग्टन में खेलेगी.
भारतीय टीम हेमिल्टन में खेले गए चौथे एकदिवसीय मैच में सात विकेट से हारने के साथ ही सिरीज़ को 3-0 से गंवा चुकी है.
एक तरफ जहां न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ों ने भारतीय बल्लेबाज़ो को पूरी सिरीज़ में बैकफुट पर रखा तो उनके बल्लेबाज़ों ने तमाम भारतीय गेंदबाज़ो का बेहद आसानी से सामना किया.
सिरीज़ शुरू होने से पहले माना जा रहा था कि भारतीय गेंदबाज़ न्यूज़ीलैंड पर भारी पड़ेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
असमंजस में धोनी
न्यूज़ीलैंड के सलामी बल्लेबाज़ मार्टिन गुप्टिल, अनुभवी रॉस टेलर, भरोसेमंद केन विलियम्सन, नये तूफ़ानी बल्लेबाज़ कोरी एंडरसन, ल्यूक रोंकी और उसके बाद ख़ुद कप्तान ब्रैंडन मैकुलम ने इतनी शानदार बल्लेबाज़ी की थी कि लगा ही नहीं कि यह टीम अपने से कहीं ऊंची रैंकिंग वाली ताक़तवर टीम का सामना कर रही है.
विलियम्सन ने तो अभी तक खेले गए चारों मैचों में अर्धशतक जमाए. इससे न्यूज़ीलैंड के मध्यक्रम को बेहद मज़बूती मिली.
रॉस टेलर ने पिछले एकदिवसीय मैच में शतक जमाया तो मार्टिन गुप्टिल ने भी तीसरे एकदिवसीय मैच में 111 रनों की शतकीय पारी खेली थी.
वैसे मौजूदा सिरीज़ में इन दो शतकों के अलावा न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ों ने सात अर्धशतक भी जमाए हैं. भारत के लिए केवल विराट कोहली ही पहले एकदिवसीय मैच में 123 रनों की शतकीय पारी खेल सके.

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अर्धशतक तो भारत की तरफ से भी सात लगे लेकिन हक़ीकत यह है कि भारत किसी भी मैच में जीत की स्थिति में नहीं था.
ऑकलैंड में खेला गया तीसरा एकदिवसीय मैच टाई ज़रूर हुआ जिसमें रवींद्र जडेजा ने कमाल की बल्लेबाज़ी करते हुए नाबाद 66 रन बनाए थे.
आखिरी ओवर में भारत को जीत के लिए 19 रन बनाने थे इसीसे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि टीम किस कदर दबाव में थी.
ऐसे में वेलिंग्टन में भारत किस तैयारी से मैदान में उतरे कि हार का सिलसिला टूटे यह न तो कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की समझ में आ रहा है और न ही टीम मैनेजमेंट को.
नए जोश से उतरना होगा
धोनी ने तो इन दिनों भारत के सबसे कामयाब बल्लेबाज़ विराट कोहली को पिछले मैच में सलामी बल्लेबाज़ बना दिया और सुरेश रैना को टीम से बाहर कर दिया.
अजिंक्य रहाणे के टीम में रहते विराट से सलामी बल्लेबाज़ी कराना किसी भी क्रिकेट समीक्षक तक की समझ में नहीं आया.
इसके अलावा स्टुअर्ट बिन्नी से केवल एक ओवर की गेंदबाज़ी कराना भी किसी के गले नहीं उतरा. आईपीएल मैचों में धुआंधार बल्लेबाज़ी के दम पर भारतीय टीम में पहुंचे स्टुअर्ट बिन्नी बल्लेबाज़ी में भी पैड बांधे रह गए क्योंकि रवींद्र जडेजा को बल्लेबाज़ी क्रम में ऊपर भेजा गया.

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धोनी बल्ले से तो कामयाब रहे हैं लेकिन बाकी टीम को प्रेरणा देने में नाकाम. यह हाल तो तब है जबकि न्यूज़ीलैंड ने ग्रीन टॉप विकेट नहीं दिए है, हां वहां के विकेट पर स्वभाविक उछाल ज़रूर है.
गेंदबाज़ी में मोहम्मद शमी को छोड़कर बाकी सभी तेज़ गेंदबाज़ अनुकूल परिस्थितियों का लाभ उठाने में नाकाम रहे.
भुवनेश्वर कुमार की गेंदों में स्विंग नज़र नहीं आई तो ईशांत शर्मा को टीम से बाहर करना पड़ा. ऐसे में आर अश्विन और रविंद्र जड़ेजा की स्पिन को संभलकर खेलते हुए न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ों ने बची-खुची उम्मीदों को को भी समाप्त कर दिया.
ऐसे में वेलिंग्टन में भारतीय क्रिकेट टीम के पास अब तक जो हुआ सो हुआ उसे भूलकर नए जोश के साथ उतरने के अलावा कोई रास्ता नहीं है.
वेलिंग्टन की जीत भारत में टेस्ट सिरीज़ के लिए थोड़ा जोश भरेगी जो छह फरवरी से शुरू होगी अन्यथा एक और हार तो उसके हौसले पूरी तरह पस्त कर देगी.
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