भारत-ऑस्ट्रेलिया मैच: मोहाली में भी बल्लेबाज़ों के भरोसे धोनी

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शनिवार को मोहाली में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की सीरीज़ की तीसरा मैच खेला जाएगा.
भारतीय गेंदबाज इस वक्त दरियादिली के मूड में लगते हैं क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक टवेंटी-टवेंटी और दो एकदिवसीय मैचों में वो 864 रन दे चुके हैं.
अगर जयपुर में भी भारत के गेंदबाज़ फ़ॉर्म में नहीं आते तो भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की रंगत कायम रहना मुश्किल हो सकता है.
इस वक्त उनके सामने अहम सवाल यही होगा कि सिर्फ़ बल्लेबाज़ों के दम पर वो मैच कब तक जीत सकते हैं.
मोहाली में अब तक शतक नहीं
भारतीय गेंदबाज़ों में से कोई भी ऑस्ट्रेलियन बल्लेबाज़ो पर असर छोड़ने में कामयाब नहीं लग रहा है. ईशांत शर्मा, आर विनय कुमार और भुवनेश्वर कुमार की तेज़ गेंदबाज़ी असरहीन दिख रही है तो स्पिन में आर अश्विन ख़ास नही कर पा रहे.
वैसे भी जब से दोनों छोर से नई गेंद का इस्तेमाल शुरू हुआ है तब से उनकी गेंदों को घुमाव नहीं मिल पा रहा. और फ्लाइट देने में तो वह पहले से ही कंजूसी करते हैं.
रविंद्र जडेजा भी अभी तक प्रभावहीन साबित हुए हैं.
हालत तो यह है कि ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों ने एक समान भाव से सभी भारतीय गेंदबाज़ों की धुनाई की है.
लेकिन शायद धोनी की कामयाबी का बड़ा मंत्र है- जीत है तो सब ठीक है. वैसे भारतीय गेंदबाज़ों और जयपुर में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों की धुनाई ने भारतीय विकेटों की भी पोल खोल दी है.

ऐसे विकेट केवल बल्लेबाज़ों की मदद करते है. आईपीएल ने तो क्रिकेट को सिर्फ बल्लेबाज़ों का खेल बनाकर रख दिया है.
गेंदबाज़ों की उपेक्षा?
भारत में न तो क्रिकेट के दीवानों की कमी है और न ही जानकारों की. इसलिए जब हर मैच में गेंदबाज़ों का यही हाल होगा तो उनकी आलोचना भी होगी.
ऐसे में बीसीसीआई की पिच कमेटी पर भी सवाल उठ सकते हैं. वह भारतीय कप्तान के मनमुताबिक़ सपाट पिच बनाएगी या फिर बल्लेबाज़ों के लिए स्वर्ग कही जाने वाली पाटा विकेट का निर्माण करने वाले क्यूरेटरों को रखेगी.
मोहाली में अभी तक भारत ने 12 एकदिवसीय मैच खेले हैं लेकिन वहा आज तक कोई भारतीय बल्लेबाज़ शतक नहीं बना सका है.
अगर मोहाली में भी ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए बड़ा स्कोर खड़ा किया तो भारतीय बल्लेबाज़ी पर एक बार फिर दबाव आ जाएगा.
वैसे भारतीय टीम में अमित मिश्रा के चयन की मांग भी होने लगी है. पिछले दिनों उन्होंने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ 18 विकेट लिए थे.
पूर्व क्रिकेटर अतुल वासन आर अश्विन के खराब फ़ॉर्म के बावजूद टीम में रहने पर कहते हैं, "किसी खिलाड़ी का ये मानना कि वो जैसा भी खेले टीम में तो रहेगा ही- उसी की प्रतिभा के लिए नुक्सानदायक है. ऐसे में अमित मिश्रा को मौक़ा मिलना चाहिए. ज़िम्बाब्वे के खिलाफ़ तो वो बेहतर प्रदर्शन कर ही चुके हैं अब एक मजबूत टीम के खिलाफ़ भी उन्हें आजमाना जाना चाहिए."
दूसरी तरफ कमज़ोर मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम ने जिस अंदाज़ में भारत में अभी तक प्रदर्शन किया है उसे लेकर क्रिकेट प्रेमी उत्साहित हैं और उन्हें आगे और अच्छे मैचों की उम्मीद है.
अब देखना है कि मोहाली में भारतीय बल्लेबाज़ो के शतक का सूखा टूटता है या नहीं और क्या भारतीय टीम केवल बल्लेबाज़ों के दम पर जीत की राह पर बढ़ती रहेगी.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml " platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi " platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi " platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












