'कमबैक किंग' हैं युवराज

अपने 13 साल के करियर में युवराज सिंह ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं. इस दौरान कई बार वह टीम से बाहर हुए लेकिन हर बार उन्होंने असली चैंपियन की तरह दमदार वापसी की.

दोस्तों में 'युवी' के नाम से मशहूर युवराज ने साल 2000 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया और अपने दूसरे ही वनडे ऑस्ट्रेलिया जैसी शक्तिशाली टीम के ख़िलाफ़ जोरदार पारी खेलकर अपनी काबिलियत का सबूत दे दिया.

निरंतर शानदार प्रदर्शन के दम पर युवराज ने टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की कर ली. इस मैच विजेता खिलाड़ी ने इस दौरान टीम को कई यादगार जीत दिलाई.

साल 2007 में इंग्लैंड में पहले ट्वंटी-20 विश्वकप में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को चैंपियन बनाया था. इस टूर्नामेंट में उन्होंने स्टुअर्ट ब्रॉड के ओवर में छह छक्के मारने का रिकॉर्ड बनाया.

खराब फॉर्म के चलते युवराज को पहली बार 2010 में टीम इंडिया से बाहर कर दिया गया था.

लेकिन उन्होंने 2011 में विश्वकप के लिए टीम में वापसी की और अपने हरफनमौला प्रदर्शन से टीम को 28 साल बाद यह प्रतिष्ठित ख़िताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई. युवराज ने विश्वकप में 362 रन बनाए और 15 विकेट लिए. इस दौरान उन्हें चार बार मैन ऑफ़ द मैच और प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट से नवाजा गया.

इसके बाद आया उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा इम्तेहान. उनमें कैंसर पाया गया और अमरीका में उनका इलाज चला. भारत को क्रिकेट के मैदान में कई मैच जिताने वाले युवराज ने कैंसर की जंग जीतकर फिर से मैदान में वापसी की.

लेकिन श्रीलंका में खेले गए ट्वंटी-20 विश्वकप और फिर पाकिस्तान और इंग्लैंड के ख़िलाफ़ घरेलू वनडे सिरीज़ में खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें एक बार फिर टीम से बाहर कर दिया. युवराज ने हार नहीं मानी और फ्रांस में कड़ा शारीरिक अभ्यास करने के बाद वेस्टइंडीज-ए और फिर चैलेंजर ट्राफी में शानदार प्रदर्शन करते हुए फिर से टीम इंडिया में जगह बना ली.
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