ऑस्ट्रेलिया में 'धड़ल्ले' से होती है डोपिंग

साल भर चली एक जांच में पता चला है कि ऑस्ट्रेलिया में पेशेवर खेलों में 'धड़ल्ले' से प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल होता है.
ऑस्ट्रेलियाई अपराध आयोग का कहना है कि संगठित आपराधिक गिरोहों की मदद से खेलों पर डोपिंग का साया गहरा रहा है.
आयोग का कहना है कि इस आपराधिक साठगांठ की वजह से मैच फिक्सिंग और सट्टेबाजी ही हेराफेरी के मामले भी सामने आ सकते हैं.
ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री जैसन क्लेयर ने कहा है कि आयोग के नतीजों से ऑस्ट्रेलिया के खेल प्रेमियों को धक्का लगा है.
काला दिन
ऑस्ट्रेलिया में बीबीसी संवाददाता निक ब्रायंट का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया जैसे खेल प्रेमी देश के लिए इस आयोग की रिपोर्ट के दूरगामी परिणाम होंगे.
हाल के वर्षों में डोपिंग अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में एक गंभीर समस्या बन कर उभरी है. साइकलिंग की दुनिया के महानतम खिलाड़ी कहे जाने वाले लांस आर्मस्ट्रांग ने जहां हाल में ही डोपिंग का सहारा लेने की बात कबूली, वहीं भारत में कई खिलाड़ी डोपिंग में पकड़े जा चुके हैं.
कबड्डी से लेकर भारोत्तलन और एथलेटिक्स जैसे कई खेलों में डोपिंग को लेकर भारतीय खिलाड़ियों पर सवाल उठे हैं.
निक ब्रायंट का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में लोग सवाल पूछ रहे हैं किस खिलाड़ी पर वो भरोसा करें और किस पर नहीं. वो इसे ऑस्ट्रेलियाई खेल जगत के लिए काला दिन मान रहे हैं.
आयोग ने अपनी जांच में पाया है कि खिलाड़ी पेप्टीडेस, हारमोन्स और प्रदर्शन को बेहतर करने वाली अन्य प्रतिबंधित दवाएं ले रहे हैं.
कई मामलों में तो खिलाड़ी ऐसे पदार्थ भी ले रहे हैं जो इंसानों के लिए स्वीकृत नहीं हैं.
कौन कौन है शामिल
रिपोर्ट कहती है कि डोपिंग के इस 'खेल' में खेल वैज्ञानिक, कोच, सपोर्ट स्टाफ, डॉक्टर और फार्मासिस्ट शामिल हैं. कई बार तो पूरी टीम डोपिंग में फंसी पाई गई.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि चूंकि आपराधिक जांच अब भी जारी है, इसलिए रिपोर्ट में विस्तार से ब्यौरा नहीं है.

रिपोर्ट के अनुसार एक मैच फिक्स भी पाया गया है लेकिन ये कौन सा मैच था, ये अभी नहीं बताया गया है.
क्लेयर ने कहा, “ऑस्ट्रेलिया में खेल क्बलों के बहुत से खिलाड़ी या तो पेप्टीडेस इस्तेमाल कर रहे हैं या पहले ऐसा कर चुके हैं, जो डोपिंग विरोधी नियमों का उल्लंघन है. ये धोखेबाजी है, लेकिन इससे भी बुरी बात ये है कि ये सब अपराधियों की मदद से हो रहा है.”
खेल मंत्री केट लंडी ने कहा है कि इस समस्या से निपटने के लिए खेल संगठनों में खास यूनिट बनाई जाएंगी और एंटी डोपिंग एजेंसी और कानून को लागू करने वाली एजेंसियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा.












