
भारतीय क्रिकेट का नया सितारा.
अंडर 19 टीम के साथ पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे के मुकाबलों में पिछड़ने वाले अंडर-19 के कप्तान उन्मुक्त चंद ने ऑस्ट्रेलिया जाने के पहले कहा था कि उन्होंने अपनी हार से सीखा है और वर्ल्ड कप जीत कर उन्होंने यह साबित कर दिखाया.
कोई भ्रम नहीं
ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हरा कर अंडर 19 वर्ल्ड कप जीतने वाले उन्मुक्त चंद ने ऑस्ट्रेलिया रवाना होने के पहले बीबीसी को दिए एक क्लिक करें खास इंटरव्यू में कहा था कि वो जानते हैं कि अंडर 19 में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विराट कोहली, युवराज जैसे खिलाड़ी भारतीय टीम का हिस्सा बने हैं लेकिन उन्हें इस बारे में कोई भ्रम नहीं है.
उन्मुक्त ने कहा " अंडर 19 महत्वपूर्ण है लेकिन भारतीय टीम में जगह पाने के लिए आपको हर जगह अच्छा खेलना होता है, रण जी ट्रॉफी में, आईपीएल में, राज्यों के मैचों में, तब जा कहीं आप पर विचार हो सकता है."
आईपीएल में दिल्ली डेयर डेविल्स के लिए खेलने वाले उन्मुक्त चंद का कहना है कि दिल्ली डेयर डेविल्स के कप्तान और भारतीय टीम के बमबार बल्लेबाज़ वीरेन्द्र सहवाग से उन्होंने बहुत कुछ सीखा है.
सहवाग से सीखा
उन्मुक्त कहते हैं "वीरू भैया मेरी हमेशा मदद करते हैं. मेरी उनसे बहुत बार बात हुई है. हम दो महीने साथ रहते हैं. उनको देख कर भी बहुत कुछ सीखते हैं. उनका प्रोफेशनलिज्म, उनका प्रैक्टिस करने का अंदाज़ और मैंने उनकी चीज़ों को अपने अंदर उतारने की कोशिश की है."
अपने जीवन की अब तक की बेहतरीन पारियों की बात करते हुए चंद की आँखें चमक उठती हैं, खास तौर पर तब जब वो रण जी ट्रॉफी में दिल्ली के सबसे पुराने रोशनआरा मैदान पर रेलवे के खिलाफ बनाया हुआ अपना पहला शतक याद करते हैं.
उन्मुक्त उस दिन को याद करते हुए चहक उठते हैं "वो मेरे जीवन के सबसे अच्छे दिनों में से एक था. मुझे लग रहा था कि वो दिन मेरा ही था. मुझे बस गेंद ही दिख रही थी."
उन्मुक्त को मैच पल पल याद है. उन्मुक्त ओपनर हैं और उस दिन को याद करते हुए वो बताते हैं " मैं दिन अंत तक खेला था. विकेट कठिन था बॉल में बहुत ज़्यादा स्विंग था. लेकिन बस वो दिन मेरा था. "
कोच से मोहब्बत
उन्मुक्त कहते हैं " मेरे कोच संजय भरद्वाज देर से मैदान में आये थे. मैंने सोचा की आज चलो इन्हें भी थोड़ा अपने दिखाए जाएँ."
उन्मुक्त के कोच संजय भरद्वाज वर्ल्ड कप फाइनल मुकाबले से ठीक पहले उन्मुक्त से बात करते हुए उन्हें बस एक ही नसीहत दी थी" आखिर तक टिकना तभी तुम भारत को जीता पाओगे. और उन्मुक्त ने यही किया.
संजय भारद्वाज गौतम गंभीर के भी कोच हैं.
उन्मुक्त ने उस दिन वादा किया था कि वो अपने कोच के साथ तभी लंच या डिनर करेगें जब वो उस दिन शतक बनायेगें.
ठीक इसी तरह उन्मुक्त ने ऑस्ट्रेलिया रवाना होने के पहले कहा था कि वो वहां अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे.
वर्ल्ड कप फाइनल में 111 नाबाद रन बना कर उन्मुक्त ने एक बार फिर अपना वादा दिखाया.









