
धोनी वही कप्तान हैं जिनकी कप्तानी में भारत ने टी20 विश्व कप और वनडे वर्ल्ड कप जीता है
हाल ही में सन्यास लेने वाले भारतीय क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने जब यह कहा कि सभी जानते हैं कि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी तक पहुच पाना बहुत कठिन है तो इससे एक विवाद पैदा हो गया है.
एक राय यह है कि कप्तान को हमेशा अपने खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध रहना चाहिए. पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की भी कुछ ऐसी ही राय है.
लेकिन क्या हम यह भूल रहे हैं कि भारतीय क्रिकेट के कप्तान या फिर किसी सावर्जनिक ओहदे पर बैठे व्यक्ति की भी निजी जिंदगी हो सकती है.
क्या यह जरूरी है कि महेंद्र सिंह धोनी अपने फोन पर आने वाली हर कॉल का जवाब दें चाहे वो किसी भी वक्त हो?
धोनी को इस बात का श्रेय देना होगा कि जब उनसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस 'विवाद' पर सवाल किया गया तो उन्होंने माना कि उनसे संपर्क करना वाकई कठिन है.
उन्होंने कहा कि वे अपनी इस आदत को सुधारने का प्रयास भी करते रहे हैं क्योंकि इसे लेकर टीम के कई सदस्यों को शिकायत रहती है.
अलग स्वभाव
धोनी को जानने वाले लोग जानते हैं कि उनका स्वभाव या आदत बाकियों से अलग है.
वे गांगुली की तरह नहीं हैं जो नेटवेस्ट सिरीज जीतने के बाद शायद अपनी कमीज़ उतार सकते हैं.
वो सोशल वेबसाइट ट्विटर पर हैं तो सही और उनके 15 लाख से अधिक प्रशंसक हैं, लेकिन आज तक उन्होंने केवल 135 ट्वीट किए हैं.
वो उन लोगों की तरह नहीं जो हर दिन में अपनी हर हरकत पर टवीट करते हैं.
एक ऐसी जमाने में जब लोग बातें करते नहीं थकते वो उन लोगों में से हैं जो अपनी निजी जिंदगी में भी कुछ समय चाहते हैं.
धोनी वो कप्तान हैं जिनके चेहरे पर उनकी टीम के विश्व कप जीतने पर भी कोई भाव नहीं आते. वो ऐसे खाली बर्तन नहीं जो सबसे अधिक शोर करते हैं. शायद इसलिए उन्होंने लोग 'कैप्टन कूल' भी कहते हैं.
प्रधानमंत्री से तुलना
ट्विटर और फेसबुक पर उनकी तुलना भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी की गई है. यह कहा गया है कि दोनों अपनी टीम में सबसे चुप रहने वालों में से हैं.
क्यों हम भूल जाते हैं कि इंट्रोवर्ट या अंतर्मुखी लोग बोलते कम हैं और सुनते अधिक भी हैं और बेहतर भी.
चार्लस डारविन और एलबर्ट आईंसटाइन जैसे सबसे मशहूर लोग बहुत बड़े अंतमुर्खी लोग भी थे. महात्मा गांधी भी अंतर्मुखी लोगों में से गिने जाते रहे हैं.
क्यों हम भूल जाते हैं कि यह वही कप्तान हैं जिनकी कप्तानी में भारत पहले टी20 विश्व कप जीता और वनडे वर्ल्ड कप भी. उन्हीं की कप्तानी में भारत टेस्ट रेंकिंग में भी शीर्ष पर पहुंचा था.
धोनी कितने सफल कप्तान हैं, क्या इस सवाल का मापदंड उनकी आसान उपलब्धता होनी चाहिए या फिर उनका प्रदर्शन?









